कानून बने, पर नहीं बदली तकदीर

Published at :01 May 2017 1:00 AM (IST)
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कानून बने, पर नहीं बदली तकदीर

मजदूर दिवस . काम के लिए भटकते रहते हैं मजदूर गोपालगंज : आज एक मई है. विश्व स्तर पर इसे मजदूर दिवस के रूप में मनाया जायेगा. प्रतिवर्ष इस दिन जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. सभाएं होती है और उनके जीवन पर व्यापक रूप से प्रकाश डाला जाता है. तालियां बजती हैं और मजदूर […]

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मजदूर दिवस . काम के लिए भटकते रहते हैं मजदूर

गोपालगंज : आज एक मई है. विश्व स्तर पर इसे मजदूर दिवस के रूप में मनाया जायेगा. प्रतिवर्ष इस दिन जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. सभाएं होती है और उनके जीवन पर व्यापक रूप से प्रकाश डाला जाता है. तालियां बजती हैं और मजदूर घर लौट जाते हैं, लेकिन सुबह जैसे ही होती है फिर उसे गुलामी का एहसास होता है.
और एक बार फिर वह कोल्हू के बैल की तरह अपने काम में जुट जाता है.
एक मजदूर हाड़तोड़ मेहनत कर राष्ट्र की प्रगति के चक्र को आगे घुमाता है, लेकिन आज भी वह बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. मजदूरों के लिए नियम तो बने, लेकिन उनकी समस्याएं हल नहीं हुईं. हकीकत तो यह है कि मई दिवस के दिन भी मजदूर काम की तलाश में रहते है. कारण है कि उनके चूल्हे की आग कैसे जलेगी. सवाल उठता है
कि आखिर यह मई दिवस किसके लिए मनाया जाता है. जब अवकाश वाले दिन भी उसे काम करना पड़ता हो, तो फिर ऐसे में मजदूर दिवस का मायने क्या. सबसे बुरा हाल तो असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का है, जिन्हें निर्धारित मजदूरी भी नहीं मिल पाती. आजादी के 70 सालों में भी श्रमिकों के बारे में कई कानून बने. लेकिन, आज भी उनकी तकदीर नहीं बदल पायी है. अनुमान के मुताबिक जिले में श्रमिकों की संख्या लगभग 6.5 लाख है लेकिन इसमें चार लाख को निर्धारित मजदूरी नहीं मिल पाती है.
सूची बद्ध नहीं किये गये मजदूर : जिले में मजदूरों की वास्तविक संख्या ज्ञात करना टेढ़ी खीर है. कारण प्रशासन के पास इसकी कोई सूची नहीं है. जहां तक मजदूरी का सवाल है. जो दर निर्धारित की गयी है, उससे कम मजदूरों को प्राप्त होती है.
रोजी रोटी की तलाश में गंवाते हैं जान : काम नहीं मिलने की वजह से मजदूर अन्य प्रदेशों में पलायन करते रहते हैं. कई बार इनकी जान जा चुकी है. वर्ष 2012 में जादोपुर शुक्ल के एक दर्जन मजदूर उत्तराखंड में बादल फटने से मर गये. वर्ष 2017 में अब तक खाड़ी देशों में आधा दर्जन मजदूरों की मौत हो चुकी है. यह सिलसिला अभी भी जारी है.
बुनियादी सुविधाओं से हैं वंचित
फैक्ट फाइल
मजदूरों की कुल संख्या -– 6.65 लाख
जॉब कार्ड-– 3.95 लाख
100 दिन का कार्य प्राप्त– 8000 लगभग
प्रशासन के पास नहीं है सूची
(आंकड़े अनुमान एवं मजदूर संगठन के आधार पर है)
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