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लापरवाही. गोपालगंज सिविल कोर्ट में कई बार हो चुकी हैं घटनाएं, फिर भी हो रही चूक

बॉडीगार्ड के भरोसे कोर्ट की सुरक्षा ! अपराधियों के निशाने पर मंदिर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बैंक और सरकारी संपत्ति ही नहीं बल्कि सिविल कोर्ट भी है. सारण के सिविल कोर्ट में सोमवार को जिस प्रकार जोरदार विस्फोट हुआ, उससे गोपालगंज सिविल कोर्ट की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. प्रभात खबर की […]

बॉडीगार्ड के भरोसे कोर्ट की सुरक्षा !

अपराधियों के निशाने पर मंदिर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बैंक और सरकारी संपत्ति ही नहीं बल्कि सिविल कोर्ट भी है. सारण के सिविल कोर्ट में सोमवार को जिस प्रकार जोरदार विस्फोट हुआ, उससे गोपालगंज सिविल कोर्ट की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. प्रभात खबर की टीम ने गोपालगंज कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था की आंखों देखी यह रिपोर्ट तैयार की.

सोमवार को चार दिनों की छुट्टी के बाद खुला था कोर्ट

मुख्य गेट पर भी कोई सुरक्षा का इंतजाम नहीं था

गोपालगंज : गोपालगंज सिविल कोर्ट की सुरक्षा राम भरोसे है. कोर्ट में कोई भी घातक हथियार लेकर आसानी से आ-जा सकता है. आने-जाने वालों पर किसी प्रकार की कोई रोक-टोक नहीं है. सिविल कोर्ट के सभी रास्ते आम हैं. कोर्ट के भीतर अपराधियों का आना-जाना लगा रहता है. हालांकि इस कोर्ट में मुकदमे की पैरवी के दौरान सरेआम सुबास भगत नामक व्यक्ति की राजा भगत नामक अपराधी ने गोली मार कर हत्या कर दी थी. इस हत्या के बाद कोर्ट की सुरक्षा दो-चार दिनों के लिए बढ़ा दी गयी.
घटना के दो-चार दिन बीतते ही कोर्ट की सुरक्षा भी पुराने ढर्रे पर आ गयी. सोमवार को कोर्ट चार दिनों की छुट्टी के बाद खुला था, जिसके कारण काफी भीड़ थी. सीजेएम का कोर्ट मुख्य गेट के सामने है. सीजेएम के गार्ड के अलावा एक भी पुलिस यहां नहीं दिखा. भीड़ के बीच आसानी से कुछ भी लेकर कोर्ट के भीतर प्रवेश किया जा सकता था. कहीं भी एक सुरक्षा कर्मी नहीं दिखा. मुख्य गेट पर भी कोई सुरक्षा का इंतजाम नहीं था. किसी प्रकार की कोई जांच भी नहीं हो रही थी.
यहां कुछ मुश्किल नहीं : यह नजारा देख कर आप भी चौंक जायेंगे. यहां कुछ भी मुश्किल नहीं है. कुख्यात से लेकर शातिर अपराधियों को लेकर यहां कैदी वैन पहुंचता है. कैदियों को लेकर आनेवाले जवान ही सुरक्षा में रहते हैं. कैदी कोर्ट की हाजत से कई बार फरार हो चुके हैं. इसके बाद भी यहां की सुरक्षा को दुरुस्त नहीं किया जा सका है.
सुरक्षा की कमी के कारण कैदी से उनके परिजन यहां आकर मिलते हैं और कई आपत्तिजनक सामान उपलब्ध कराते हैं, जो जेल तक आसानी से पहुंच जाता है.
यहां भी कम खतरा नहीं : समाहरणालय के मुख्य गेट के आगे भी कम खतरा नहीं है. इस रास्ते की निगरानी नहीं होती. वैसे तो इस रास्ते का कोई औचित्य नहीं है, लेकिन कभी भी साजिश इस रास्ते की जा सकती है. इस रास्ते में किसी तरह की चूक बड़ी घटना को निमंत्रण देने से कम नहीं होगी.
पूर्वी गेट सबसे असुरक्षित : सिविल कोर्ट का पूर्वी गेट आज सबसे असुरक्षित महसूस किया जा रहा है. यहां किसी तरह की रोक-टोक भी नहीं है. कोई भी आपत्तिजनक समान लेकर आसानी से कोर्ट में जा सकता है. यहां न तो किसी प्रकार की जांच होती है और न ही किसी प्रकार की निगरानी होती है. अपराधियों के लिए यह मार्ग काफी महफूज साबित हुआ है. सुबास भगत हत्याकांड में इसी रास्ते का उपयोग अपराधियों ने किया था.
कोर्ट की सुरक्षा पर एसपी ने मांगी रिपोर्ट
कोर्ट की सुरक्षा के प्रति पुलिस संवेदनशील है. छपरा की घटना को ध्यान में रखते हुए गोपालगंज सिविल कोर्ट की सुरक्षा की रिपोर्ट सदर डीएसपी से तलब की गयी है. किन-किन प्वाइंट पर सुरक्षा की आवश्यकता है, इसका मंथन कर सिविल कोर्ट की सुरक्षा बढ़ा दी जायेगी. कोर्ट की सुरक्षा में किसी तरह की कमी नहीं होगी.
आग में झुलसने से युवती की मौत : भोरे (गोपालगंज). विजयीपुर थाना क्षेत्र के िबक्रमपुर गांव में रविवार को चाय बनाने के दौरान आग से झुलस कर एक किशोरी की मौत हो गयी. दिव्यांग पुनिता कुमारी पुत्री पारस यादव चाय बनाने के लिए किचेन में गयी थी. चूल्हे की चिनगारी से किशोरी के शरीर में आग लग गयी.
Prabhat Khabar Digital Desk
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यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

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