56 अभ्यर्थी नहीं बन सके शिक्षक!
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :29 Feb 2016 7:50 AM (IST)
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गोपालगंज : कुचायकोट प्रखंड शिक्षक नियोजन स्वार्थ की भेंट चढ़ कर रह गया. शिक्षक नियोजन में स्वार्थ के कारण प्रखंड नियोजन इकाई के अध्यक्ष सचिव तथा बीइओ की सहमति नहीं बनी. अभ्यर्थी नियोजन की उम्मीद लगाये प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगा कर थक हार चुके हैं. उनके पास अब कोई उम्मीद भी नहीं है. विभागीय […]
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गोपालगंज : कुचायकोट प्रखंड शिक्षक नियोजन स्वार्थ की भेंट चढ़ कर रह गया. शिक्षक नियोजन में स्वार्थ के कारण प्रखंड नियोजन इकाई के अध्यक्ष सचिव तथा बीइओ की सहमति नहीं बनी. अभ्यर्थी नियोजन की उम्मीद लगाये प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगा कर थक हार चुके हैं.
उनके पास अब कोई उम्मीद भी नहीं है. विभागीय सूत्रों की मानें, तो कुचायकोट में शिक्षक नियोजन के 56 पदों पर नियोजन करने के लिए प्रखंड प्रमुख, बीडीओ, बीइओ में आपसी सहमति नहीं बनी. इसके कारण नियोजन को लटकाने के लिए बीडीओ की तरफ से डीपीओ स्थापना को पत्र भेज कर मार्गदर्शन की मांग की गयी. विभाग ने किसी प्रकार का मार्गदर्शन देने के बजाय इस पत्र पर चुप्पी साध ली.
इधर आदर्श आचार संहिता 26 फरवरी की रात से प्रभावी हो गयी. आचार संहिता प्रभावित होते ही इस नियोजन इकाई के अध्यक्ष प्रखंड प्रमुख नियोजन से आउट हो गये. ऐसे में नियोजन पर पूरी तरह से ग्रहण लग गया.
56 अभ्यर्थियों का शिक्षक बनने का सपना तार-तार हो गया. यूं कहें कि जो इसके लायक थे उनका कैरियर स्वार्थ की इस खेल में भेंट चढ़ गया.
क्या कहते हैं अधिकारी
अपीलीय प्राधिकार के आदेश पर जो शिक्षक योगदान कर काम कर रहे हैं, उनका वेतन का भुगतान विभाग द्वारा नहीं किया जा सकता है. सभी नियोजन इकाइयों को निर्देश भी दिया जा चुका है कि वे योगदान न कराएं.
अशोक कुमार, डीइओ, गोपालगंज
कैसे समाप्त हो गयी रिक्ति
शिक्षा विभाग ने 2006 में रिक्त पदों को वर्ष 2008 में समाहित कर दिया. वर्ष 2008 की रिक्ति को वर्ष 2011 में समाहित कर एसटीइटी और टीइटी पास अभ्यर्थियों के नियोजन का आदेश दिया गया.
उधर, प्रधान सचिव के पत्रांक 465 दिनांक 9 जुलाई, 2012 के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2011 तक की रिक्ति को अपने में सम व्यवहार में अग्रहित कर नियमावली 2012 दिनांक 22/06/2012 के प्रभावी होने के पश्चात अपीलीय प्राधिकार में अपील करना नियमानुकूल नहीं है. इसके बाद भी प्राधिकार का आदेश धड़ाधड़ जारी है.
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