जान जोखिम में डाल भवष्यि का सफर

सड़क सुरक्षा सप्ताह : जीवन है अनमोल, फिर भी जान की नहीं है फिक्र जान जोखिम में डाल भविष्य का सफरकानून का पालन करानेवाले भी नहीं मानते परिवहन कानूनट्रिपल लोडिंग तथा बिना हेलमेट के खराटा भर रही बाइकपरिवहन विभाग की तरफ से नहीं हो पा रही ठोस कार्रवाईफोटो – 5 – नाबालिग चला रहा बाइकफोटो […]
सड़क सुरक्षा सप्ताह : जीवन है अनमोल, फिर भी जान की नहीं है फिक्र जान जोखिम में डाल भविष्य का सफरकानून का पालन करानेवाले भी नहीं मानते परिवहन कानूनट्रिपल लोडिंग तथा बिना हेलमेट के खराटा भर रही बाइकपरिवहन विभाग की तरफ से नहीं हो पा रही ठोस कार्रवाईफोटो – 5 – नाबालिग चला रहा बाइकफोटो – 7 – ये चौकीदार हैं, फिर भी जान की परवाह किये बिना तोड़ रहे नियमफोटो – 8 – महिलाओं के साथ ट्रिपल लोडिंग कर फर्राटा भरती बाइकपरिवहन विभाग सड़क सुरक्षा सप्ताह मना रहा है. सड़क सुरक्षा सप्ताह का भी असर आम लोगों पर नहीं दिख रहा है. विभाग लोगों को जागरूक करने में विफल साबित हो रहा है. इसे और कारगर बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है. सबसे बड़ी सफलता तब होगी, जब हम अपनी आदतों में बदलाव लायेंगे. सड़क सुरक्षा के प्रति जब तक हम खुद जिम्मेवार नहीं बनेंगे, तब तक हमारी जान को खतरा रहेगा. अपने जीवन के लिए सतर्क होना होगा. प्रभात खबर की टीम ने शहर के विभिन्न चौराहों से ली गयी तसवीरों पर आधारित यह रिपोर्ट तैयार की है.संवाददाता, गोपालगंजयह कैसा सड़क सुरक्षा सप्ताह है! यहां सड़क सुरक्षा के प्रति किसी को परवाह नहीं है. यहां तक कि कानून का पालन करानेवाले ही नियमों को तोड़ रहे हैं. परिवहन विभाग के सड़क सुरक्षा सप्ताह का कोरम पूरा किया जा रहा है. छात्रों को लगा कर लोगों में जागरूकता लाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन विभाग के अधिकारी सड़क पर अब तक लोगों को जागरूक करने के लिए नहीं उतरे हैं. इसका नतीजा है कि हर ओर नियमों का मखौल उड़ते देखा जा रहा है. नियमों का पालन नहीं करने के कारण आये दिन सड़क हादसे हो रहे हैं. सड़क हादसे में मरनेवालों की संख्या प्रतिवर्ष 478 तथा घायलों की संख्या 690 तक पहुंच जाती है. इन मौतों के पीछे जितना जिम्मेवार परिवहन विभाग है, उतना ही कानून का उल्लंघन करनेवाले हैं. नमूने के तौर पर तीन तसवीरें आपके सामने हैं. परिवहन नियमों की कैसे अवहेलना हो रही आप खुद देख सकते हैं. इनको रोकने के लिए शहर के चौक पर ट्रैफिक पुलिस तैनात हैं, लेकिन वह 10-20 रुपये वसूलने तक ही अपनी ड्यूटी समझते हैं. पुलिस के जवान भी यहां बिना हेलमेट के बाइक चलाते हुए मिलते हैं. केस स्टडी 1- सीवान-गोपालगंज एनएच-85 पर मंगलवार को सीवान जिले के शिव प्रसाद यादव के पुत्र सरल यादव तथा प्रकाश यादव बाइक से विष्णु सुगर मिल में जा रहे थे. उचकागांव थाना क्षेत्र के वृंदावन गांव के पास डंपर में टकरा गये. दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी. डॉक्टरों का मानना था कि बाइक चला रहे सरल यादव अगर हेलमेट पहना रहता, तो उसकी जान बच सकती थी.केस स्टडी 2- मीरगंज के रविंद्र कुमार पिछले शुक्रवार को गोपालगंज से मीरगंज जा रहे थे. जैसे ही इटवा पुल के पास पहुंचे कि सामने से आ रहे ट्रक ने ठोकर मार दी. हेलमेट नहीं रहने के कारण उनके सिर में चोट लगी और जीवन मौत से गोरखपुर के अस्पताल में जूझ रहे हैं. केस स्टडी 3-कटेया के सतीश कुमार सिंह यूपी के देवरिया से घर लौट रहे थे. पगरा मोड़ पर सामने से आ रही बाइक ने टक्कर मार दी. महज संयोग था कि हेलमेट पहने हुए थे, जिससे उनकी जान बच गयी. सिर्फ हाथ और पैरों में चोटें आयीं. एक नजर में पिछले पांच वर्ष के सड़क हादसेवर्ष हादसे में मौत घायल2011 290 4632012 310 5622013 372 4902014 410 6112015 390 522क्या कहते हैं अधिकारीसड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत वाहनचालकों को सतर्क करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है. इसके बाद कार्रवाई के लिए अभियान चलाया जायेगा. पुलिस की तरफ से सघन वाहन चेकिंग अभियान चल रहा है. दिवाकर झा, डीटीओ, गोपालगंज
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










