सुशील मोदी को सर्फि दूसरों में दिखती है बुराई : संजय सिंह
सुशील मोदी को सिर्फ दूसरों में दिखती है बुराई : संजय सिंहसंवाददाता, पटनाजदयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद संजय सिंह ने भाजपा नेता सुशील मोदी पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा भाजपा नेता सुशील मोदी को सिर्फ दूसरों में ही बुराई दिखती है, जबकि उनमें कितनी बुराई है वो इस बात को नहीं जानते […]
सुशील मोदी को सिर्फ दूसरों में दिखती है बुराई : संजय सिंहसंवाददाता, पटनाजदयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद संजय सिंह ने भाजपा नेता सुशील मोदी पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा भाजपा नेता सुशील मोदी को सिर्फ दूसरों में ही बुराई दिखती है, जबकि उनमें कितनी बुराई है वो इस बात को नहीं जानते हैं. भाजपा में अपने अंहकारी चरित्र के लिए ही सुशील मोदी जाने जाते हैं और महत्वाकांक्षी इतना ज्यादा हैं कि वो कभी भी अपने आगे किसी भी बिहार भाजपा के नेता को आगे बढ़ने नहीं देना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि सुशील मोदी एक अवसरवादी नेता हैं, जो अपने फायदा के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं. अपनी हार को देखते हुए सुशील मोदी और पूरी भाजपा हताश हो गयी है. यही वजह कि देश के प्रधानमंत्री को बिहार में एक दिन में चार-चार सभाएं करनी पड़ रही है. आज तक ऐसा नहीं हुआ है कि देश का प्रधानमंत्री किसी विधानसभा चुनाव में इतनी सभाएं करता हो, इससे भाजपा की हार साफ दिखती है. संजय सिंह ने कहा कि सुशील मोदी महागठबंधन के नेताओं से आय का स्रोत मांग रहे हैं तो राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद ने अपने आय का स्रोत भी बता दिया है और सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हे क्लीन चीट भी दे दी है. सुशील मोदी कभी अपने नेता गिरिराज सिंह से नहीं पूछते है कि उनके पास इतनी संपत्ति कहां से आयी, आज तक उसका हिसाब ना तो गिरिराज सिंह ने दिया है और ना ही भाजपा ने. सुशील मोदी गिरिराज सिंह पर सवाल इसलिए भी नहीं उठाते है क्यों कि वो डरते हैं. गिरिराज सिंह भी सुशील मोदी के कई ऐसे राज जानते है जो वो सार्वजनिक कर सकते हैं. इसलिए सुशील मोदी इस मुद्दे पर कभी सवाल नही खड़े करते हैं. सुशील मोदी को पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र से सवाल पूछना चाहिए कि उनके पास इतनी संपत्ति कहां से आयी. उनको अब तक आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई ने कोई क्लीन चिट नही दी है. उन्होंने कहा कि भाजपा ने जो दृष्टि पत्र जारी किया है वो घोषणा पत्र नहीं है. वो महज एक छलावा है, जो जनता के आंख में धूल झोंकने के काम में लाया जा रहा है. भाजपा के दृष्टि पत्र में किसी भी सहयोगी पार्टी की कोई सहमति नहीं है ऐसे में कैसे मान लिया जाए कि जो दृष्टि पत्र में जारी किया गया है वो लागू होगा. वैसे भी भाजपा ने नीतीश कुमार के सात संकल्प में से चोरी करके अपने दृष्टि पत्र में लगाया है.
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