गोपालगंज : रमजान में कुरान की तिलावत से सवाब मिलता है. यह महीना रहमत, मगफिरत और जहन्नम से निजात का है. जामा मसजिद के इमाम शौकत फहमी कहते हैं कि रोजे का सबाब हासिल करने के लिए हर मर्द औरत बराबर के हकदार हैं.
देखा जाता है कि औरतें तो रोजा रखती हैं, लेकिन नमाज पढ़ने में पीछे रह जाती हैं. दिन भर अपने घरेलू काम-काज में उलझी रहती हैं.
वे कुरान की तिलावत से महरूम रह जाती हैं. औरतों को कम-से-कम रमजान में ज्यादा-से-ज्यादा कुरान की तिलावत करना चाहिए. रोजे की हालत में दिन भर कुछ खाने-पीने की हलाल चीजों को छोड़ना पड़ता है. रोजा रखनेवाले हर मुसलमान को इससे सीख मिलती है कि पूरी जिंदगी हराम और बुरे कामों से दूर रहो.
