सुरक्षा एजेंसियों ने भी मामले की शुरू की जांच

Published at :13 Dec 2017 4:45 AM (IST)
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सुरक्षा एजेंसियों ने भी मामले की शुरू की जांच

चौकीदार के बयान पर पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी गोपालगंज : बरौली से मिले वायरलेस सेट के हाई फ्रीक्वेंसी होने की खुलासा होने के साथ ही पुलिस ही नहीं सुरक्षा एजेंसियां भी बेचैन हो उठी है. पुलिस कप्तान मृत्युंजय कुमार चौधरी के आदेश पर बरौली के थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार दल बल के साथ सिसई स्थित […]

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चौकीदार के बयान पर पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

गोपालगंज : बरौली से मिले वायरलेस सेट के हाई फ्रीक्वेंसी होने की खुलासा होने के साथ ही पुलिस ही नहीं सुरक्षा एजेंसियां भी बेचैन हो उठी है. पुलिस कप्तान मृत्युंजय कुमार चौधरी के आदेश पर बरौली के थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार दल बल के साथ सिसई स्थित धमही नदी के किनारे पहुंच कर पूरे इलाके को खंगाला. हालांकि पुलिस के हाथ कुछ भी नहीं लगा है. पुलिस के अधिकारी पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने में लगे हुए है,
उधर, चौकीदार के बयान पर बरौली थाने में अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है. बरौली पुलिस इस बात को लेकर हैरत में है कि आखिर नगर पंचायत तहां कुड़ा फेकता है उसके बगल में वायरलेस सेट कहां से पहुंच गया. वायरलेस सेट फेकने वाले की तलाश पुलिस को है. ध्यान रहे कि सोमवार की दोपहर धमही नदी के किनारे सिसई गांव के पास से लावारिस स्थिति में छह वायरलेस सेट बरामद किया गया था. वायरलेस सेट से बकरी के चारवाह बच्चे खेल रहे थे.
किसी की नजर पड़ी तो पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे जब्त किया.
बरौली के वीरान स्थान से लावारिस स्थिति में बरामद किये गये वायरलेस सेट की फॉरेंसिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है. पुलिस के वरीय अधिकारी स्थानीय जांच पड़ताल के बाद इसे फॉरेंसिक जांच के लिए पटना भेजने का निर्णय लिया है. फिंगर प्रिंट के जरिये कुछ खुलासा होने की संभावना है. वायरलेस सेट की फ्रीक्वेंसी 20 से 25 किमी होने के कारण यह माना जा रहा है कि किसी खतरनाक काम के लिए उपयोग हो रहा था.
वैसे तो सुरक्षा एजेंसियां पल पल की स्थिति की जांच में जुटी है. सुरक्षा सूत्रों का मानना है कि शहर में रह कर सोहैल खान अकेले धन्नु राजा को ही नहीं बल्कि अन्य कई लोगों को अपने संगठन से जोड़ चुका है. अगर वायरलेस सेट बरामदगी का कनेक्शन लश्कर से जोड़ कर जांच की जा रही है. सूत्रों का मानना है कि इस इलाके में नक्सली गतिविधियों भी पहले से सक्रिय है. कही इस वायरलेस का उपयोग नक्सली तो नहीं कर रहे थे.
पूरे प्रकरण की हाई लेवल पर जांच चल रही है. सच जो भी हो हकीकत को सामने लाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां जुटी हुई है.
ध्यान भटकाने की हो सकती है कोशिश
वायरलेस सेट प्रकरण की जांच में जुटे अधिकारियों की माने तो हालही में लश्कर के आतंकी शेख अब्दुल नईम के गोपालगंज में नेटवर्क का खुलासा होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरे प्रकरण की जांच में जुटी है. वही दूसरी तरफ जांच को भटकाने के लिए यह कोशिश भी हो सकती है. कई लोगों का तो यह भी कहना है कि किसी कंपनी में काम करने वाले वाचमैन टाइप के लोग भी कंपनी से वायरलेस सेट लेकर भाग आये है अब फंसने के डर से यहां फेंक सकते है. वैसे सुरक्षा एजेंसियां इसे गंभीरता से लेकर जांच कर रही है.
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