11 बजे लेट नहीं, तीन बजे भेंट नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Nov 2017 4:29 AM (IST)
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बदहाली़. शिक्षा विभाग के दफ्तरों में नहीं बदल रही संस्कृति अधिकारी से लेकर बाबू तक कार्यालय में रहते हैं गायब ग्रामीण इलाके से आये शिक्षकों के हाथ लगती है निराशा गोपालगंज : प्रशासनिक सख्ती के बीच शिक्षा विभाग की संस्कृति नहीं बदल रही है. यहां 11 बजे लेट नहीं तीन बजे भेट नहीं वाली संस्कृति […]
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बदहाली़. शिक्षा विभाग के दफ्तरों में नहीं बदल रही संस्कृति
अधिकारी से लेकर बाबू तक कार्यालय में रहते हैं गायब
ग्रामीण इलाके से आये शिक्षकों के हाथ लगती है निराशा
गोपालगंज : प्रशासनिक सख्ती के बीच शिक्षा विभाग की संस्कृति नहीं बदल रही है. यहां 11 बजे लेट नहीं तीन बजे भेट नहीं वाली संस्कृति आज भी कायम है. अधिकारी से लेकर बाबू तक कार्यालय तक गायब रहते हैं. कौन साहब कार्यालय में कब मिलेंगे कोई जानकारी नहीं. बाबू कब ऑफिस में मिलेंगे यह कहना भी मुश्किल है. 11 बजे बाबू कार्यालय पहुंच गये तो 10 मिनट बाद डाकघर चौक के चाय की दुकानों पर चाय की चुस्की के बीच राजनीतिक बहस में जुट जाते हैं. इधर दूर दराज से आने वाले शिक्षकों को निराशा हाथ लगती है. उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है. शिक्षकों की लगातार की जा रही शिकायत के बाद प्रभात खबर की टीम सोमवार को सुबह 10 बजे से 11.30 बजे तक शिक्षा विभाग में जब पहुंची तो न तो ऑफिस खुला था और नहीं कोई कर्मी थे.
10.30 बजे प्यून पहुंचा और कार्यालय खोल कर बैठ गया. 11.30 बजे तक कार्यालय में एक भी अफसर नहीं पहुंचे थे. आंखों देखी स्थिति पर यह लाइव रिपोर्ट तैयार की.
खुला मिला डीपीओ कार्यालय
डीपीओ स्थापना का कार्यालय
डीपीओ लेखा योजना धनंजय कुमार पासवान अपने लिपिक ताजुदीन ताज एवं एक अन्य कर्मी के साथ रिपोर्ट तैयार कराने में लगे रहे.
वे 10.47 बजे अपने कार्यालय से मीटिंग के लिए समाहरणालय के लिए निकल पड़े.
डीपीओ स्थापना का कार्यालय खुल गया था. जहां तक दो कार्यालय कक्ष पूर्ण रूप से खाली था. न तो बाबू थे और नहीं साहब, जबकि एक कार्यालय कक्ष में प्रधान सहायक शंकर यादव एवं दूसरे कक्ष में अर्जुन कुमार तथा सूरज प्रसाद मौजूद थे.
तबादले के बाद भी कार्यालय के बाहर लगी है नेम प्लेट
डीईओ कार्यालय मेें नहीं िदखे िकरानी, लौटे िशक्षक
पूर्व डीईओ अशोक कुमार के तबादला के 10वां दिन भी डीईओ का नेम प्लेट नहीं बदला गया था. वही प्रभारी डीईओ के नेम प्लेट को नहीं लगाया गया है. जिससे अधिकांश लोग दिग भ्रमित हो रहे है.
जिला शिक्षा पदाधिकारी का कार्यालय में 11.03 िमनट तक कोई भी लिपिक नहीं आये थे. कार्यालय का ताला कार्यालय परिचारियों के द्वारा खोल दिया गया था. शिक्षक लिपिकों से मिलने आते थे और नहीं मिलने के कारण वापस चले जाते थे.
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