जमीन पर बैठ पढ़ते हैं स्कूल के छात्र-छात्राएं

Published at :04 Aug 2017 4:13 AM (IST)
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जमीन पर बैठ पढ़ते हैं स्कूल के छात्र-छात्राएं

बदहाली. सहयोगी उच्च विद्यालय सह इंटर कॉलेज में महज चार कमरों में होती है 13 सौ िवद्यार्थियोें की पढ़ाई फुलवरिया : फुलवरिया प्रखंड के बथुआ बाजार में स्थापित सहयोगी उच्च विद्यालय सह इंटर कॉलेज में सिर्फ चार कमरों में 13 सौ छात्र-छात्राओं की पढ़ाई होती है. इन छात्र-छात्राओं को शिक्षा देने के लिए महज आठ […]

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बदहाली. सहयोगी उच्च विद्यालय सह इंटर कॉलेज में महज चार कमरों में होती है 13 सौ िवद्यार्थियोें की पढ़ाई

फुलवरिया : फुलवरिया प्रखंड के बथुआ बाजार में स्थापित सहयोगी उच्च विद्यालय सह इंटर कॉलेज में सिर्फ चार कमरों में 13 सौ छात्र-छात्राओं की पढ़ाई होती है. इन छात्र-छात्राओं को शिक्षा देने के लिए महज आठ शिक्षक हैं. 54 साल पहले स्थापित इस विद्यालय में आज भी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. नौंवी और दसवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को जमीन पर बैठ कर पढ़ना पड़ता है. वहीं, कमरों की कमी के कारण एक कक्षा में 300 सौ छात्राओं को बैठा कर पढ़ाया जाता है. इससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यहां कुल 35 शिक्षकों की आवश्यकता है, जिनकी जगह पर महज आठ शिक्षक ही मौजूद हैं.
उनमें भी हाइस्कूल के छात्र-छात्राओं के लिए हिंदी, गणित, उर्दू, संस्कृत विषयों के शिक्षक नहीं हैं. वहीं इंटर कॉलेज में अंगरेजी, संस्कृत, गृह विज्ञान, गणित, भूगोल विषयों के शिक्षक नहीं हैं, जिससे कई महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई नहीं होती है.इससे छात्र-छात्राओं का सिलेबस पूरा नहीं होता है. छात्र-छात्राओं को निजी कोचिंग व ट्यूशन का सहारा लेकर अपना सिलेबस पूरा करना पड़ता है. स्कूल में प्रयोगशाला व पुस्तकालय की व्यवस्था भी नहीं है और छात्रों को प्रैक्टिकल की शिक्षा नहीं मिल पाती है. इसके अलावा स्कूल में तकनीकी शिक्षा के लिए कंप्यूटर नहीं है. कंप्यूटर की शिक्षा के लिए छात्र-छात्राओं को कोचिंग सेंटरों में जाना पड़ता है.
क्या कहते हैं अिधकारी
विद्यालय में फर्नीचर, पेयजल एवं भवन की समस्या को लेकर कई बार वरीय पदाधिकारियों को पत्र भेजा गया है. लेकिन आज तक कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई.
जितेंद्र नाथ राय, प्राचार्य
विद्यालय में भवन का अभाव है. महज चार कमरों में जमीन पर बैठ कर पढ़ाई करनी पड़ती है, शिक्षकों की कमी से सिलेबस पूरा नहीं हो पाता है.
अनुष्का कुमारी
विद्यालय में शिक्षकों की काफी कमी के कारण हमारा सिलेबस निजी कोचिंग और ट्यूशन के भरोसे पूरा होता है.
नेहा कुमारी
विद्यालय में न भवन है और न ही पेयजल की सुविधा, जिसके कारण जरूरत पड़ने पर हमें दूसरी जगह जाना पड़ता है.
बिट्टू कुमार
विद्यालय में क्लास नहीं चलती है. कमरों की कमी के कारण न प्रयोगशाला और न पुस्तकालय है. इससे छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी होती है.
संकल्प राय
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