10% घरों में शौचालय बनवा लिया अवार्ड

Published at :08 Jul 2017 8:33 AM (IST)
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10% घरों में शौचालय बनवा लिया अवार्ड

लाभुकों को नहीं मिली शौचालय के अनुदान की राशि गोपालगंज : थोड़ी देर के लिये आप भी चौक जायेंगे. पर बात 16 आने सच है. सिधवलिया प्रखंड की कुशहर पंचायत को निर्मल ग्राम घोषित करते हुए अवार्ड दिया जा चुका है. यह तसवीर कुशहर पंचायत की दलित बस्ती की है, जहां महज छह घरों में […]

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लाभुकों को नहीं मिली शौचालय के अनुदान की राशि
गोपालगंज : थोड़ी देर के लिये आप भी चौक जायेंगे. पर बात 16 आने सच है. सिधवलिया प्रखंड की कुशहर पंचायत को निर्मल ग्राम घोषित करते हुए अवार्ड दिया जा चुका है. यह तसवीर कुशहर पंचायत की दलित बस्ती की है, जहां महज छह घरों में शौचालय है. जीविका दीदियों की रिपोर्ट पर नजर डालें, तो पंचायत के 10 फीसदी घरों में ही शौचालय बना हुआ है. यानी 10 फीसदी घरों में शौचालय बना कर निर्मल ग्राम का पुरस्कार ले लिया गया है.
जिला पर्षद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी की अनुशंसा पर स्वास्थ्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता के पत्रांक एनबीए – 50, दिनांक 20 अगस्त, 2013 को कुशहर को निर्मल ग्राम घोषित किया गया. निर्मल पुरस्कार के लिए फर्जीवाड़ा का सहयोग लिया गया है. महम्मदपुर उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक एवं स्टेट बैंक महम्मदपुर से कुशहर पंचायत के सरकारी मद से फर्जी लाभुकों के नाम पर 11.40 लाख रुपये की निकासी की गयी है, जो धरातल पर नहीं है. इस राशि का फर्जीवाड़ा कर घोटाले का खुलासा जदयू के प्रदेश महासचिव सह पूर्व विधायक मंजीत सिंह ने किया है. मंजीत सिंह ने निगरानी मंत्रिमंडल के सचिव को पत्र लिख कर पूरे मामले में जांच कर कार्रवाई की अपील की है.
एनजीओ ने किया 2.16 लाख का घोटाला : निर्मल भारत अभियान में कुशहर पंचायत के 18 लाभुकों के नाम पर 2.16 लाख की राशि चेक संख्या – 984506 के साथ सूची सेंट्रल बैंक महम्मदपुर को भुगतान के लिए भेजा गयी. लेकिन, चेक की भुगतान अवधि समाप्त होने के बाद बैंक ने वापस कर दिया. बाद में उस चेक को रद्द कर एनजीओ के नाम पर चेक निर्गत किया गया,जो आज तक लाभुकों को नहीं मिला और राशि की बंदरबांट हो गयी.
विज्ञापन के नाम पर लाखों का दुरुपयोग : पूर्व विधायक मंजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि जिले में स्वच्छता अभियान के लिए जन जागरण के नाम पर डेढ़ वर्षों से नुक्कड़ नाटक, प्रचार तथा विज्ञापन के नाम पर खानापूर्ति कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है. इसका कोई लेखा -जोखा नहीं है. वर्ष 2016-17 में 4.14 लाख शौचालय बनाने थे, जिसके एवज में 40 हजार शौचालय बन पाये. उनमें भी गुणवत्ता में भारी धांधली की गयी है.
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