गया नगर निगम के 2400 कर्मचारियों का नहीं हुआ पुलिस वेरिफिकेशन, चोरी-डकैती में पकड़े जा रहे

गया नगर निगम
गया शहर में एक भी सफाई कर्मचारी का पुलिस सत्यापन नहीं हुआ है. इनमें से कई सफाई कर्मचारी आपराधिक मामलों में पकड़े जा रहे हैं, खास तौर पर चोरी और डकैती में. कई गंभीर अपराधों में उनकी संलिप्तता उजागर हो चुकी है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है. नगर निगम, अपराध और वेरीफिकेशन पर पढ़िए गया से जितेंद्र मिश्रा की खास रिपोर्ट...
Gaya Nagar Nigam: नौकरी से पहले प्राइवेट हो या सरकारी विभाग हर जगह पुलिस वेरिफिकेशन और आचरण प्रमाणपत्र जरूर मांगा जाता है. लेकिन, आश्चर्य की बात है कि गया नगर निगम में दैनिक मजदूरी पर करीब 2400 मजदूर, ड्राइवर और मिस्त्री आदि को रखा गया है. इनमें से एक का भी पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया गया और न ही आचरण प्रमाणपत्र लिया गया है.
चोरी-लूट में पकड़े जा रहे निगम के कर्मी
हाल के दिनों में देखा जाये, तो शहर में आपराधिक मामले में निगम के कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इसमें चोरी, बमबाजी व लूट जैसे मामले भी शामिल हैं. इसके बाद भी निगम में किसी कर्मचारी से आचरण देने की सुगबुगाहट तक नहीं की गयी है. इतना ही नहीं, पुराने मामलों के आरोपित कई कर्मचारियों की गिरफ्तारी पहले भी काम के दौरान हो चुकी है.
पुलिस वेरिफिकेशन होने पर कई पर गिर सकती है गाज
निगम सूत्रों का कहना है कि कुछ वर्ष पहले इसकी जांच निगम में शुरू की गयी. लेकिन, यूनियन आदि के दबाव में सब कुछ बंद करना पड़ा. इतना ही नहीं, आउटसोर्सिंग से भी यहां मजदूर काम करते हैं. निगम को यह पता नहीं है कि उनके मजदूरों का आचरण लिया गया या नहीं. नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस वेरिफिकेशन होने पर कई पर गाज गिर सकती है. इसके चलते भी कोई इस पर हाथ नहीं डालना चाहता है. हालांकि इस बार मेयर ने जांच कराने की बात कही है.
निगम में दैनिक कर्मचारियों की संख्या
- निगम स्टोर में दैनिक कर्मचारी- 600
- वार्डों में दैनिक कर्मचारी- 1800 के करीब
- ( इसके अलावा आउटसोर्सिंग से 600 मजदूर निगम में काम करते हैं )
आपराधिक मामले जिसमें निगम कर्मी पकड़ाये
- चाण्यक्यापुरी कॉलोनी के एक घर में डकैती
- बाइपास के पास ऑटो लूट के मामले में
- मेडिकल थानाक्षेत्र में बमबारी मामले में
- अलीगंज के रोड नंबर तीन के जहांगीर खां के यहां चोरी के मामले में
जेल से आने के बाद बीमार का जमा कर देते हैं रिपोर्ट
आपराधिक मामले में गिरफ्तारी का पता किसी को नहीं चलता या फिर हल्ला नहीं होने पर बड़ा ही खेल यहां दोबारा काम पर रहने के लिए कर दिया जाता है. जेल से छूटने के बाद बीमारी का पर्ची किसी डॉक्टर से बनवा कर निगम में जमा कर दिया जाता है. हालांकि, बाद में खुलासा होने पर कार्रवाई नहीं हो पाती है. इतना ही नहीं शराब पीकर पकड़ाने के बाद छूटने पर गरीब होने की दुहाई देकर काम पर रखने का दबाव बनाया जाता है. इसमें उनका साथ कई लोग भी देते हैं.
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अब तक नहीं लिया गया आचरण प्रमाणपत्र
यहां दैनिक मजदूरी पर काम करनेवाले कर्मचारियों का अब तक आचरण प्रमाणपत्र नहीं लिया गया है. मेरी नियुक्ति के पहले ही सारे दैनिक मजदूर या कर्मचारियों को रखा गया है. फिलहाल सिर्फ आउटसोर्सिंग के तहत ही लेबर को रखा जा रहा है. पहले के कर्मचारियों पर आपराधिक मामला सामने आने पर उन्हें तत्काल ही काम से मुक्त कर दिया जाता है.
अभिलाषा शर्मा, नगर आयुक्त
सभी का जांच कराना बहुत जरूरी
निगम में दैनिक पर काम करने वाले कर्मचारियों का अब तक पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हुआ है. रखते वक्त आचरण प्रमाणपत्र भी नहीं लिया गया है. डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने वाले या फिर यहां पर काम करने वालों का आचरण जांच बहुत ही जरूरी है. इसकी जांच करायी जाएगी.
वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान, मेयर
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लेखक के बारे में
By Anand Shekhar
Dedicated digital media journalist with more than 2 years of experience in Bihar. Started journey of journalism from Prabhat Khabar and currently working as Content Writer.
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