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शिशु व प्रसूताओं की मृत्यु दर को समाप्त करने के लिए संस्थागत प्रसव जरूरी : डीएम

Updated at : 09 Jun 2025 6:27 PM (IST)
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शिशु व प्रसूताओं की मृत्यु दर को समाप्त करने के लिए संस्थागत प्रसव जरूरी : डीएम

प्रभावती अस्पताल में प्रसूताओं के बीच जच्चा-बच्चा पौष्टिक किट का डीएम ने किया वितरण

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प्रभावती अस्पताल में प्रसूताओं के बीच जच्चा-बच्चा पौष्टिक किट का डीएम ने किया वितरण

वरीय संवाददाता, गया जी़

नवजात व प्रसूताओं की मृत्यु दर को पूरी तौर से समाप्त करने के लिए संस्थागत प्रसव बहुत जरूरी है. यहां पर हर तरह के संसाधन व डॉक्टर की मौजूदगी में प्रसव कराया जाता है. हर किसी को सुरक्षित रखने के लिए यह बहुत जरूरी है. सरकार की ओर से कई तरह की योजनाएं चलाकर इसे बढ़ावा दिया जा रहा है. यह बातें सोमवार को प्रसूताओं के लिए राज्यस्तरीय योजना की शुरुआत शहर के प्रभावती अस्पताल से करते हुए डीएम शशांक शुभंकर ने कहीं. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह किट प्रसूताओं को मुहैया कराया जा रहा है. जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत महिलाओं को 1400 रुपये की राशि भी दी जा रही है. आशा घर-घर जाकर जच्चा-बच्चा किट व संस्थागत प्रसव के लाभ के बारे में लोगों को जानकारी दें. यह नयी पहल सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव को बढ़ावा देने के लिए की गयी है. प्रसव के उपरांत महिला को डिस्चार्ज के समय जच्चा-बच्चा किट उपलब्ध कराया जायेगा. डीएम ने कहा कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ शिशु की जननी होती है व एक स्वस्थ शिशु ही समाज की सशक्त नींव रखता है. इसी मूल मंत्र को आधार बनाते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जच्चा-बच्चा किट वितरण योजना की शुरुआत की गयी है. इसको लेकर जिले में भी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में संस्थागत प्रसव कराने वाली माताओं के लिए जच्चा-बच्चा किट का वितरण प्रारंभ कर दिया गया है. जच्चा-बच्चा किट में प्रसूता माताओं के लिए 11 प्रकार के सामान और नवजात शिशु के लिए चार तरह की दवाएं होती हैं.

संस्थागत प्रसव को बढ़ावा एकमात्र उद्देश्य

सिविल सर्जन राजाराम प्रसाद ने कहा कि जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत जच्चा-बच्चा किट वितरण का उद्देश्य मातृत्व को सुरक्षित बनाना, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, प्रसवोत्तर जटिलताओं में कमी लाना तथा नवजातों को जीवन के आरंभ से ही उचित पोषण और चिकित्सा सुविधा देना है. ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाएं पोषण की कमी, संक्रमण और आवश्यक औषधियों के अभाव में प्रसवोत्तर समस्याओं से जूझती हैं. दूसरी ओर नवजात शिशुओं की मृत्यु दर भी तब बढ़ जाती है, जब जन्म के बाद उन्हें समय पर आवश्यक दवाएं और स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलती. सीएस ने डीएम को बताया कि हर दिन यहां 100 से ऊपर मरीजों का ओपीडी भी किया जाता है.

कई प्रकार के आहार मौजूद

डीपीएम नीलेश कुमार ने बताया कि प्रसव के बाद महिला का शरीर बेहद कमजोर होता है़ उसे तुरंत ऊर्जा, प्रोटीन, और पोषक तत्वों की जरूरत होती है. इसी को ध्यान में किट में मां के लिए घी, खिचड़ी प्रीमिक्स, नमकीन दलिया प्रीमिक्स, राइस-खीर प्रीमिक्स, प्रोटीन बार व बेसन बर्फी शामिल हैं. इन पोषण वस्तुओं के नियमित सेवन से प्रसवोत्तर कमजोरी दूर होती है और स्तनपान में सहायता मिलती है. साथ ही मां की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. उन्होंने बताया कि सभी प्रखंडों में पौष्टिक आहार किट का वितरण होना है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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