गया के लोगों को मिली एक और सौगात, 30 किमी की दूरी घटकर रह जाएगी महज 5 किमी
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 27 Mar 2025 8:04 PM
प्रतीकात्मक फोटो
Gaya Underpass: जीतन राम मांझी ने बताया कि टनकुप्पा रेलवे स्टेशन के पूर्वी गेट के समीप अंडरपास की स्वीकृति मिल गई है. कुछ दिनों में इसका निर्माण कार्य शुरू होगा.
Gaya Underpass: गया के लोगों को जीतन राम मांझी ने खुशखबरी दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ्रॉम X पर बताया, “टनकुप्पा वासियों के आदेश के अनुसार टनकुप्पा रेलवे स्टेशन के पूर्वी गेट के पास अंडरपास की स्वीकृत मिल गई है,जल्द ही निर्माण का काम शुरू होगा. अंडर पास बन जाने के कारण 30km की दूरी 5km हो जाएगी.” इसके लिए उन्होंने पीएम मोदी और अश्विनी वैष्णव को धन्यवाद कहा.
इसी साल फरवरी में पत्र लिख की थी मांग
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने टनकुप्पा प्रखंड के रेल यात्रियों की समस्याओं को लेकर अंडरपास निर्माण के लिए केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र 13 फरवरी 2025 को लिखा था. इस पत्र में उन्होंने गया धनबाद ग्रैंड कोर्ड रेलखंड संघर्ष समिति के द्वारा टनकुप्पा स्टेशन पर हावड़ा देहरादून एक्सप्रेस अप और डाउन का ठहराव, आरक्षित टिकट प्रणाली सुविधा की दोबारा बहाली, पूर्वी गेट के समीप रेलवे अंडर पास का निर्माण, राजगीर कोडरमा स्पेशल एक्सप्रेस का ठहराव करवाने की मांग की थी.
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हजारों लोगों को मिलेगी सुविधा
टनकुप्पा रेलवे स्टेशन पर अंडरपास बन जाने से हजारों ग्रामीणों को सुविधा होगी. कई बार लोग रेलवे ट्रैक पार कर बाइक और साइकिल से आते- जाते थे. इस दौरान कई बार दुर्घटना भी हो चुकी है. लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी चारपहिया वाहन को उठानी पड़ती थी. उन्हें 5 किमी की दूरी को 30 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है. अंडर पास बन जाने से यह दूरी महज 5 किलोमीटर राज जाएगी. टनकुप्पा रेलवे स्टेशन पर अंडरपास बनने से रेलवे क्रॉसिंग पर होने वाली दुर्घटनाओं और ट्रैफिक जाम में भी कमी आएगी.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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