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Gaya News : कर्मियों को सम्मानजनक वातावरण देना संस्थागत विकास की आधारशिला

Updated at : 16 Apr 2025 10:51 PM (IST)
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Gaya News : कर्मियों को सम्मानजनक वातावरण देना संस्थागत विकास की आधारशिला

Gaya News :मगध विश्वविद्यालय में बुधवार को सेफ माइंड एंड सेफ वर्कप्लेस: मेंटल हेल्थ एंड डिग्निटी विषय पर एक दिवसीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

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बोधगया. मगध विश्वविद्यालय में बुधवार को सेफ माइंड एंड सेफ वर्कप्लेस: मेंटल हेल्थ एंड डिग्निटी विषय पर एक दिवसीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम आंतरिक शिकायत समिति (आइसीसी) एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आइक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ. कार्यक्रम का उद्देश्य कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य, कर्मियों की गरिमा, उनके संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक सशक्तीकरण से जुड़े विषयों पर गंभीर संवाद स्थापित करना था. संवाद कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकों एवं विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने पैनलिस्ट के रूप में भाग लिया और विशिष्ट विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किये. कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही. कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय की आइसीसी समन्वयक प्रो निभा सिंह के उद्घाटन वक्तव्य से हुआ. उन्होंने कहा कि वर्तमान सामाजिक एवं शैक्षणिक परिवेश में मानसिक स्वास्थ्य और कर्मियों की गरिमा को लेकर चर्चा व संवाद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक हो गयी है. प्रो सिंह ने कहा कि कार्यस्थल पर सभी कर्मियों को सुरक्षित, सहयोगी और सम्मानजनक वातावरण देना न केवल नैतिक दायित्व है, बल्कि संस्थागत विकास की आधारशिला भी है. आइक्यूएसी के समन्वयक प्रो मुकेश कुमार ने इस संवाद की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालय न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता का केंद्र है, बल्कि सामाजिक चेतना और मानसिक स्वास्थ्य को भी समान प्राथमिकता देना आवश्यक है.

नैतिकता के नाम पर स्त्रियों की इच्छाओं, स्वाभाविक प्रवृत्तियों और अभिव्यक्तियों को बार-बार दबाया गया

समाजशास्त्र विभाग की प्राध्यापक डॉ वंदना कुमारी ने स्त्री की आत्मचेतना की यात्रा: नैतिक मानदंडों से विरोधाभास तक विषय के अंतर्गत स्त्री की आत्मचेतना और सामाजिक संरचनाओं के बीच अंतर्विरोध पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि समाज में नैतिकता के नाम पर स्त्रियों की इच्छाओं, स्वाभाविक प्रवृत्तियों और अभिव्यक्तियों को बार-बार दबाया गया है.

कानून तभी प्रभावी होता है जब समाज में उसकी समझ और संवेदनशीलता भी विकसित हो. कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा की रक्षा विषय के संदर्भ में संवैधानिक दृष्टिकोण से कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों पर प्रकाश डाला. संस्कृत विभाग की डॉ ममता मेहरा द्वारा यह स्पष्ट करते हुए कहा गया कि मानसिक तनाव को दूर करने में वैदिक मंत्र एवं उच्चारण की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है. भूगोल विभाग की डॉ मीनाक्षी प्रसाद ने महिलाओं के जीवन में कार्य-जीवन संतुलन की चुनौती पर अपने विचार साझा किए. कार्यक्रम के अंतिम पैनलिस्ट डॉ रविंद्र सिंह ने क्षमा और लेटिंग गो की प्रक्रिया को मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में प्रस्तुत किया.

मानसिक संतुलन एवं एकाग्रता को प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित किये सत्र

पैनल चर्चा के प्रतिभागियों के मानसिक संतुलन एवं एकाग्रता को प्रोत्साहित करने के लिए पांच मिनट का माइंडफुलनेस ध्यान सत्र आयोजित किया गया. इसके बाद एक प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों और उपस्थित अतिथियों ने पैनलिस्टों से सीधे सवाल किये. धन्यवाद ज्ञापन डॉ कुमारी दीपा रानी द्वारा प्रस्तुत किया गया एवं मंच का संचालन डॉ दीपशिखा पांडे ने किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PRANJAL PANDEY

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PRANJAL PANDEY is a contributor at Prabhat Khabar.

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