गया जी की सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल विजेता बेटी को नहीं मिल रही सही ट्रेनिंग, नेहा कुमारी ने सम्राट सरकार से लगाई गुहार
Published by : Sakshi kumari Updated At : 10 Jun 2026 1:42 PM
खो-खो खिलाड़ी नेहा सर्टिफिकेट के साथ
Gaya ji News: गया जी जिले के फतेहपुर प्रखंड के करी गांव की रहने वाली इंटर की छात्रा नेहा कुमारी आज अपने खेल करियर को बचाने के लिए सरकार से मदद की गुहार लगा रही हैं.
गया जी से अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट
Gaya Ji News: गया जी जिले के फतेहपुर प्रखंड के करी गांव की रहने वाली इंटर की छात्रा नेहा कुमारी आज अपने खेल करियर को बचाने के लिए सरकार से मदद की गुहार लगा रही हैं. खो-खो खेल में शानदार प्रदर्शन कर चुकी नेहा का सपना राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बनकर अपने गांव, जिले और बिहार का नाम रोशन करना है, लेकिन संसाधनों और प्रशिक्षण की कमी उनके सपनों की राह में बड़ी बाधा बन गई है.
बिहार, झारखंड और बंगाल में दिखा चुकी हैं अपना दम
नेहा कुमारी ने बताया कि वह नवोदय विद्यालय की छात्रा रह चुकी हैं. वर्ष 2024 तक उन्होंने विद्यालय की ओर से बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में आयोजित कई खो-खो प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था. अपने शानदार खेल प्रदर्शन के दम पर उन्होंने सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल भी हासिल किए, जिससे परिवार और गांव का नाम रोशन हुआ.
स्कूल छूटा तो खेल भी छूटने लगा
नवोदय विद्यालय से पास आउट होने के बाद नेहा ने गया जिले के वजीरगंज स्थित एक इंटर कॉलेज में नामांकन कराया. लेकिन कॉलेज में खो-खो खिलाड़ियों के लिए न तो कोई विशेष प्रशिक्षण व्यवस्था है और न ही बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं. ऐसे में उनकी नियमित तैयारी प्रभावित हो रही है और खेल करियर धीरे-धीरे रुकता हुआ नजर आ रहा है.
डेढ़ साल से अवसर के इंतजार में बैठी है खिलाड़ी
नेहा का कहना है कि पिछले करीब डेढ़ वर्ष से वह उचित मंच और प्रशिक्षण के इंतजार में हैं. प्रतिभा होने के बावजूद सही मार्गदर्शन और अभ्यास की सुविधाएं नहीं मिलने के कारण वह आगे नहीं बढ़ पा रही हैं. उनका मानना है कि यदि उन्हें सही कोचिंग और प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिले तो वह राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं.
सरकार और खेल मंत्री से लगाई उम्मीद
नेहा और उनके परिवार ने बिहार सरकार के खेल विभाग तथा खेल मंत्री से मदद की अपील की है. उन्होंने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण, मैदान और प्रतियोगिताओं में भागीदारी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आर्थिक और संसाधनों की कमी किसी खिलाड़ी के भविष्य को प्रभावित न कर सके.
ग्रामीण प्रतिभाओं को चाहिए सही मंच
परिजनों का कहना है कि गांवों में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिनमें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की क्षमता है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उनकी प्रतिभा दबकर रह जाती है. यदि सरकार समय रहते ऐसे खिलाड़ियों को सहयोग दे तो वे राज्य और देश के लिए पदक जीत सकते हैं.
क्या नेहा का सपना होगा पूरा?
करी गांव की यह बेटी आज भी उम्मीद लगाए बैठी है कि उसकी मेहनत और प्रतिभा को पहचान मिलेगी. खेल जगत में अपनी अलग पहचान बनाने का सपना देखने वाली नेहा चाहती हैं कि उन्हें सिर्फ एक मौका मिले, ताकि वह साबित कर सकें कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां भी बड़े मंच पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं.
एक खिलाड़ी की कहानी, हजारों युवाओं की आवाज
नेहा की कहानी सिर्फ एक छात्रा की नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीण खिलाड़ियों की आवाज है जो प्रतिभा होने के बावजूद सुविधाओं के अभाव में संघर्ष कर रहे हैं. अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार और खेल विभाग इस उभरती खिलाड़ी के सपनों को नई उड़ान देने के लिए आगे आएंगे.
Also Read: गया जी में ट्रेन में छूटा यात्री का 16 हजार का सामान, आरपीएफ ने खोजकर लौटाया बैग
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Sakshi kumari
साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










