गया जी : टिकारी के भैरवा गांव में पेयजल संकट गहराया, नल-जल योजना ठप, दो चापाकलों के सहारे ग्रामीण

भैरवा गांव में जर्जर नल-जल योजना की टंकी | Prabhat Khabar Network
गया जी के टिकारी प्रखंड के भैरवा गांव में भीषण पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है. हर घर नल-जल योजना ठप पड़ी है और ग्रामीण केवल दो चापाकलों पर निर्भर हैं. इस गंभीर समस्या को लेकर प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है.
Gaya Ji News : टिकारी प्रखंड क्षेत्र के मखदुमपुर पंचायत अंतर्गत मोरहर नदी किनारे स्थित भैरवा गांव इन दिनों भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा है. सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल-जल योजना इस गांव में लगभग पूरी तरह ठप हो चुकी है. ग्रामीणों के मुताबिक, पानी संग्रहित करने वाली मुख्य टंकी निर्माण के समय से ही क्षतिग्रस्त थी, जिसकी स्थिति देखरेख के अभाव में अब और भी ज्यादा गंभीर हो गयी है. इसके कारण गांव के अधिकांश घरों तक नल का पानी नहीं पहुंच पा रहा है और जिन गिने-चुने घरों में आपूर्ति हो भी रही है, वहां केवल बूंद-बूंद पानी ही टपक रहा है.
मात्र दो चापाकलों पर निर्भर है पूरा गांव
ग्रामीणों ने दर्द बयां करते हुए बताया कि पूरे गांव की पेयजल व्यवस्था फिलहाल मात्र दो चापाकलों पर ही निर्भर है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. गर्मी के मौसम में यह स्थिति और भी विकट हो जाती है.
हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु शेखर, कांग्रेस नेता नागेंद्र सिंह सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक संयुक्त टीम ने भैरवा गांव का दौरा कर ग्रामीणों की इन गंभीर समस्याओं को सुना. ग्रामीणों ने टीम को बताया कि वे कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों से पेयजल संकट दूर करने की लिखित मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है.
मुख्यमंत्री और गया डीएम से सुधार की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता श्री शेखर ने मुख्यमंत्री एवं जिला पदाधिकारी, गया से भैरवा गांव के इस पेयजल संकट को गंभीरता से लेने की अपील की है. उन्होंने नल-जल योजना की तत्काल मरम्मत कराने, क्षतिग्रस्त जल टंकी के पुनर्निर्माण करने, गांव में एक और नई बोरिंग कराने एवं कुछ नए चापाकल लगाने तथा नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की है.
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि स्वच्छ पेयजल पाना प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार है और इस संवेदनशील दिशा में जिला प्रशासन को शीघ्र ही प्रभावी और ठोस कार्रवाई करनी चाहिए.
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