गांव के चौपाल पर हो रही बॉर्डर जाने की बात
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :24 Sep 2016 8:32 AM
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गया : बदलते माहौल में गांवों में लगनेवाला चौपाल अब धीरे-धीरे इतिहास बनने के कगार पर है. भाग-दौड़ व बदलती लाइफ स्टाइल के कारण अब लोगों के पास चौपाल में बैठने की फुरसत नहीं है. हर कोई अपने-अपने कामकाज में व्यस्त है. लेकिन, एक वीर जवान की शहादत की घटना ने चौपाल को फिर से […]
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गया : बदलते माहौल में गांवों में लगनेवाला चौपाल अब धीरे-धीरे इतिहास बनने के कगार पर है. भाग-दौड़ व बदलती लाइफ स्टाइल के कारण अब लोगों के पास चौपाल में बैठने की फुरसत नहीं है. हर कोई अपने-अपने कामकाज में व्यस्त है. लेकिन, एक वीर जवान की शहादत की घटना ने चौपाल को फिर से जीवंत कर दिया है. पाकिस्तान की करतूत, आतंकियों की कायरता व ऐसे नाजुक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाये जा रहे कदमों को लेकर गांवों की चौपाल फिर से गुलजार होने लगा है.
दिन हो या रात, जहां देखिए, वहां आठ-10 व्यक्ति चौपाल लगा कर बैठे नजर आये और उक्त घटना को लेकर अपनी-अपनी राय दे रहे थे. ऐसा ही एक चौपाल गुरुवार की दोपहर शहीद सुनील के गांव बोकनारी से ढाई किलाेमीटर पीछे स्थित हसपुरा रेलवे गुमटी के पास लगा था.
वहां मौजूद मुसाफिर यादव, महावीर यादव, सुदामा यादव, महेश ठाकुर, महादेव यादव सहित अन्य लोग आपस में आतंकी हमले की चर्चा कर रहे थे. महेश ठाकुर बोलते हैं कि जम्मू-कश्मीर के उड़ी स्थित आर्मी कैंप में हुए आतंकी हमले से खून खौल रहा है. लग रहा है, अभी बॉर्डर पर चले जायें और बॉर्डर फिल्म के नायक सुनील शेट्टी की स्टाइल में बम-बारूद को अपने शरीर में भर लें और पाकिस्तान में ले जाकर आतंकियों के बंकरों में घुस कर ब्लास्ट कर दें.
हम मर जायेंगे, लेकिन कम से कम 20 आतंकियों को तो जरूर मार देंगे. लेकिन, सरकार उन्हें लड़ाई में नहीं भेजेगी.
कड़क रहा है शरीर
सुदामा यादव कहते हैं कि हमारा पूरा शरीर कड़क रहा है. लग रहा है कि अभी के अभी बाॅर्डर पर चले जायें और एक ट्रक में बम-बारूद लोड करके पाकिस्तान में घुस जाये. मर जायेंगे तो मर जायेंगे. लेकिन, दुश्मनों को छट्ठी का दूध याद दिला देते. इतना गंभीर मसला है और सरकार चुप है. बाॅर्डर पर हमारे बच्चों को सरकार बैठा कर रखी है. पाकिस्तान पर हमला करने का आॅर्डर ही नहीं दे रही है. जब हमला नहीं करना है, तो उन्हें बाॅर्डर पर बैठा कर क्यों रखे हो. हम सभी बाॅर्डर से हजारों मील दूर हैं, तो शरीर में इतनी आग लगी है. हमारा लड़का जो बाॅर्डर पर तैनात है, उसका क्या हाल हो रहा होगा. गोली-बंदूक, गोला-बारूद सब होते हुए भी बाॅर्डर पार खड़े दुश्मन को मार नहीं सकता है. सरकार उसके हाथ बांधे हुए है. सरकार एक बार आॅर्डर तो कर के देखे, दुश्मनों की छाती पर चढ़ कर एेसा हमला करेंगे कि फिर पाकिस्तान सातों जन्म तक हमारे देश की आेर उलट कर नहीं देखेगा.
सरकार हमें वहां पहुंचा दे
महावीर यादव कहते हैं कि अब हमारे के जीवन में क्या रखा है. ज्यादा दिनों की जिंदगी तो बची नहीं है. अगर अंतिम समय में उनका शरीर देश के काम आ जाये, तो कितना बढ़िया रहे. यहां से बाॅर्डर दूर है. अपने बल-बूते वहां जाना संभव नहीं है. लेकिन, सरकार हमें तो बाॅर्डर पर पहुंचा दे, तो चुन-चुन के दुश्मनों को मारेंगे.
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