''हम्मर बेटवा भी मिलिटरी में है, शहीद भी हो जाये तो कोई गम नहीं''

Updated at :21 Sep 2016 8:51 AM
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''हम्मर बेटवा भी मिलिटरी में है, शहीद भी हो जाये तो कोई गम नहीं''

गया: गया-परैया रोड पर स्थित दूर्बे गांव के रहनेवाले भरत प्रसाद की पत्नी 75 वर्षीया राजमणि देवी ने बिल्कुल अलग अंदाज में शहीद सुनील कुमार विद्यार्थी को श्रद्धांजलि दी. मंगलवार की सुबह राजमणि को पता चला कि शहीद का शव उनके गांव से होकर गुजरने वाला है. वह सड़क किनारे करीब आधा घंटा खड़ा होकर […]

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गया: गया-परैया रोड पर स्थित दूर्बे गांव के रहनेवाले भरत प्रसाद की पत्नी 75 वर्षीया राजमणि देवी ने बिल्कुल अलग अंदाज में शहीद सुनील कुमार विद्यार्थी को श्रद्धांजलि दी. मंगलवार की सुबह राजमणि को पता चला कि शहीद का शव उनके गांव से होकर गुजरने वाला है. वह सड़क किनारे करीब आधा घंटा खड़ा होकर काफिले का इंतजार करने लगी.

जब काफिला उनके गांव से गुजरने लगा, तो वह सड़क किनारे सलामी देने की मुद्रा में खड़ी हो गयीं. राजमणि की गतिविधि देख मीडियाकर्मियों के साथ-साथ काफिले में मोटरसाइकिल से चल रहे युवकों की टोली वहां रुक गयी. सभी वृद्धा की आंखों में एक शहीद के प्रति आस्था देख अचंभित हो उठे. आर्मी के जिस वाहन में शहीद का शव रखा था, उसे चला रहे जवान ने वृद्धा की आस्था देख गाड़ी को धीमा कर दिया. इसी बीच, राजमणि थोड़ी लपकी और गाड़ी में रखे शहीद के शव पर अपना शीश झुका कर बहादुर बेटे को नमन किया. उनकी आंखों से आंसू की धारा लगातार बह रही थी.

बेटा मर जायेगा, पर दुश्मन से हारेगा नहीं : राजमणि ने प्रभात खबर को बताया कि ‘हम्मर बेटवा भी मिलिटरी में है, शहीद भी हो जाये तो कोई गम नहीं है.’ ऐसी घटना के बाद भी वह अपने बेटे को नहीं कहेंगी कि आर्मी की नौकरी छोड़ कर घर चले आओ. बेटे को फोन किया और कह दिया कि बाबू अपना ध्यान रखना. कोई मारे तो खूब गोली चलाना. कोई हमारे बेटे को ऐसे थोड़े ही पछाड़ देगा. कलेजा का दूध पिला कर पाला हूं. वह मर जायेगा, पर किसी दुश्मन से हारेगा नहीं. राजमणि के बेटे एके सक्सेना गुजरात में आर्मी में पोस्टेड हैं.
हमारे गांव-जवार का बेटा था
अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में पहुंची चुकी राजमणि ने कहा कि शहीद सुनील हमारे गांव-जवार का बेटा था. दु:ख तो है, लेकिन देश की खातिर शहीद होना भी एक गौरव की बात है. बेटा अपना हो या किसी दूसरे का. वह था तो किसी मां का बेटा ही. बुजुर्ग मां-बाप का सपना होता है कि उनका जनाजा बेटे के कंधे पर निकले. लेकिन, मां-बाप के कंधे पर बेटे का जनाजा निकलना और उसे सहन करना बहुत ही कठिन है.
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