पत्नी बोलीं : अब किसके सहारे आैर किसलिए जीएं
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :21 Sep 2016 8:51 AM
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गया. मंगलवार की दाेपहर विष्णुपद स्थित श्मशान घाट का नजारा देख देश के काेने-काेने से आये पिंडदानी भी हैरत में थे कि यह क्या हाे रहा है. इतने सैन्य अधिकारी व पुलिस के जवान क्याें? बाद में उन्हें जानकारी मिली कि जम्मू-कश्मीर के उरी में शहीद सेना के जवान सुनील कुमार विद्यार्थी काे यहां अंतिम […]
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गया. मंगलवार की दाेपहर विष्णुपद स्थित श्मशान घाट का नजारा देख देश के काेने-काेने से आये पिंडदानी भी हैरत में थे कि यह क्या हाे रहा है. इतने सैन्य अधिकारी व पुलिस के जवान क्याें? बाद में उन्हें जानकारी मिली कि जम्मू-कश्मीर के उरी में शहीद सेना के जवान सुनील कुमार विद्यार्थी काे यहां अंतिम विदाई दी जानी है. घाट पर ईंट, बालू, सीमेंट से आनन-फानन में मंच बनाया गया, जिसपर शहीद का पार्थिव शरीर रखकर अंतिम संस्कार किया गया.
परैया थाना क्षेत्र के बाेकनारी से निकली शहीद के पार्थिव शरीर की यात्रा जब श्मशान घाट पर पहुंची ताे उपस्थित भीड़ में एक जाेश के साथ अपने जिला के वीर सपूत काे खाेने का गम भी था. इस बीच शहीद की पत्नी किरण कुमारी की नजर जब भी अपने अबाेध बेटे आर्यन राज पर पड़ती ताे वह फफक कर राे पड़ती. उसकी यह आवाज कि अब किसके सहारे आैर किसलिए जीयें, लाेगाें काे जैसे भेद रही थी. किरण की चीत्कार सुन यहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थी.
वहीं आर्यन इन सबसे बेफिक्र सिर्फ लाेगाें काे निहार रहा था. उसे क्या पता कि अब उसके सिर पिता का साया नहीं रहा. अभी ताे उसने जमीन पर चलना ही सीखा है. बड़ा हाेने पर वह अपने पिता काे सिर्फ तसवीर देखकर ही पहचान पायेगा. उसे ताे कुछ भी नहीं मालूम यह भीड़ यहां क्याें इकट्ठी है. किसके सम्मान में ये लाेग जुटे हैं.
मां और बहनों को ढांढस बंधा रही थी आरती : शहीद की बड़ी बेटी आरती की आंखाें में आंसू नहीं थे, मुंह जरूर मलीन था पर चेहरा लाल हो रखा था. यह गुस्सा शायद पिता के कातिलाें से बदला लेने का था. वह अपनी दाे छाेटी बहनाें अंशु व अंशिका के राेने पर ढांढस बंधा रही थी. बीच-बीच में मां काे भी सहारा देती. पिता मथुरा यादव घाट तक लाये गये पर देश के लिए न्याैछावर अपने बेटे की सजी चिता काे देख वह भी दहाड़ें मारकर रोने लगे. उन्हें दूर बैठाया
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