असहष्णिुता कोई मुद्दा ही नहीं, राजनीतिक रोटियां सेंक रहे कुछ लोग
असहिष्णुता कोई मुद्दा ही नहीं, राजनीतिक रोटियां सेंक रहे कुछ लोगसंवाददाता, गया देश में इन दिनों असहिष्णुता के मुद्दे पर खूब बयानबाजी हो रही है. आरोप-प्रत्यारोप लगाये जा रहे हैं. संसद में हंगामा हो रहा है. इन सबके बीच शहर के शिक्षाविद व छात्र इसे कोई मुद्दा ही नहीं मानते. उनका कहना है कि विविधताओं […]
असहिष्णुता कोई मुद्दा ही नहीं, राजनीतिक रोटियां सेंक रहे कुछ लोगसंवाददाता, गया देश में इन दिनों असहिष्णुता के मुद्दे पर खूब बयानबाजी हो रही है. आरोप-प्रत्यारोप लगाये जा रहे हैं. संसद में हंगामा हो रहा है. इन सबके बीच शहर के शिक्षाविद व छात्र इसे कोई मुद्दा ही नहीं मानते. उनका कहना है कि विविधताओं के देश भारत में असहिष्णु शब्द के लिए कोई जगह ही नहीं है. बेकार में ही कुछ लोग इस मुद्दे को तूल देकर राजनीति रोटियां सेंकना चाहते हैं.दैनिक जीवन में सहिष्णुता को जगह देंहर मनुष्य अपने हृदय को विशाल बनाएं. अपने दैनिक जीवन में सहिष्णुता को जगह दें. इसके बाद देश-समाज में उनको कहीं भी असहिष्णुता की झलक नजर नहीं आयेगी. जिस देश में कई धर्मों के माननेवाले लोग निवास करते हैं, वहां के समाज में इस शब्द के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए. उन्हें ही असहिष्णुता दिखाई देती है, जो खुद असहिष्णु हैं.डॉ केके नारायण, विभागाध्यक्ष अंगरेजी विभाग, गया कॉलेजदेश में अराजक स्थिति पैदा करने का प्रयास इस व्यर्थ के मुद्दे पर जितना समय बरबाद किया जा रहा है, अगर उस समय को देश के विकास की बहस में लगाया जाये, तो भविष्य में देश की तसवीर कुछ और होगी. एक ओर केंद्र सरकार विश्व पटल पर भारत का नाम और मजबूत करने के लिए नयी-नयी कार्ययोजनाओं को मूर्त रूप देने में जुटी है, तो दूसरी ओर कुछ लोगों द्वारा इस मुद्दे को व्यर्थ ही हवा देकर देश में अराजक स्थिति पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है. इस मुद्दे पर संसद का बहुमूल्य समय भी बरबाद किया जा रहा है. इस समय का थोड़ा अंश भी देश के विकास व लोगों के जीवन स्तर सुधारने में लगाया जाये, तो इससे बड़ी बात या मुद्दा कोई और नहीं होगा.डॉ अवध तिवारी, विभागाध्यक्ष भूगोल, गया कॉलेज. आम आदमी को कोई लेना-देना नहीं आम आदमी को इस मुद्दे से कोई लेना देना नहीं है. जिस देश में कई धर्मों के लोग एकसाथ रह रहे हैं, वहां के आम लोगों में असहिष्णुता के मुद्दे की चर्चा तक नहीं हो रही है. देश के नेताओं को लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार, सामूहिक विकास व शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिए बहस करनी चाहिए. सभी वर्ग के लोगों को सकारात्मक सोच के साथ देश की तरक्की में हाथ बढ़ाना चाहिए. असहिष्णुता की बात को आपस में मिल-बैठ कर समाप्त करनी चाहिए. इसको लेकर समाज में किसी तरह की भ्रांति फैलाना देश हित में नहीं है.प्रतिमा कुमारी, छात्रा, स्नातकोत्तरधर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में असहिष्णुता को तरजीह नहीं धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में इस तरह के मुद्दे को कोई तरजीह नहीं देनी चाहिए. जिस देश में अलग-अलग धर्मों के लोग एक जगह रहकर भी शांतिपूर्ण माहौल में अपने-अपने भगवान को मान रहे हैं, वहां अगर थोड़ी बहुत नाराजगी हो भी जाती है, तो उसे आपस में वार्ता कर दूर कर लेना चाहिए. कुछ लोग साधारण बात को भी तूल देकर राजनीति रोटियां सेंकना चाहते हैं. इससे सभी को बचना चाहिए, ताकि देश में अराजकता की स्थिति उत्पन्न न हो.नेहा कुमारी, लॉ कॉलेज छात्रा
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