बोधगया लाया गया 2000 वर्ष पुराना त्रिपिटक

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बोधगया लाया गया 2000 वर्ष पुराना त्रिपिटक फोटो- बोधगया 03- 2000 वर्ष पुराना त्रिपिटक.04- त्रिपिटक के साथ बग्गी पर सवार थाइलैंड के संघराजा.05- शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु.06, 07- शोभायात्रा में शामिल थाइलैंड के श्रद्धालु.08- त्रिपिटक का दर्शन करते श्रद्धालु.प्राचीन त्रिपिटक को थाइलैंड के संघराजा अपने साथ लेकर बोधगया पहुंचे महाबोधि मंदिर में आयोजित चैंटिंग में […]

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बोधगया लाया गया 2000 वर्ष पुराना त्रिपिटक फोटो- बोधगया 03- 2000 वर्ष पुराना त्रिपिटक.04- त्रिपिटक के साथ बग्गी पर सवार थाइलैंड के संघराजा.05- शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु.06, 07- शोभायात्रा में शामिल थाइलैंड के श्रद्धालु.08- त्रिपिटक का दर्शन करते श्रद्धालु.प्राचीन त्रिपिटक को थाइलैंड के संघराजा अपने साथ लेकर बोधगया पहुंचे महाबोधि मंदिर में आयोजित चैंटिंग में शामिल किया जायेगा त्रिपिटक को निकाली गयी शोभायात्रा राॅयल थाई मोनास्टरी में त्रिपिटक की पूजा-अर्चनासंवाददाता, बोधगयादुनिया के पुरानों त्रिपिटकों में एक व करीब 2000 साल पहले लिखे गये त्रिपिटक को मंगलवार को थाइलैंड से बोधगया लाया गया. यह त्रिपिटक अफगानिस्तान के कंधार क्षेत्र में खुदाई के दौरान मिला था. इसे नार्वे के स्कोयेन स्थित कंजरवेशन इंस्टीट्यूट में रखा गया था. बाद में 235 ईसा पूर्व सम्राट अशोक द्वारा बुद्धिष्ट संगठनों को सौंपा गया था. उसे म्यांमार व थाइलैंड के बीच स्थित सुवनभूमि में रखा गया था. तब से इसे सहेज कर रखा जा रहा है. फिलहाल इसे बैंकॉक में शिफ्ट कर दिया गया है. इसे एशिया के 150 मिलियन बुद्धिष्टों की आस्था के रूप में देखा जाता है. मंगलवार को इस त्रिपिटक को थाइलैंड से विशेष विमान से लाया गया. इसके साथ संघराजा व थाइलैंड के बुद्धिष्ट मामलों के मंत्री भी बोधगया पहुंचे हैं. बोधगया स्थित रॉयल थाई मोनास्टरी पहुंचने पर इस दुर्लभ त्रिपिटक के बारे में नार्वे के सांस्कृतिक मामले के मंत्री ने श्रद्धालुओं को बताया. इसे बोधगया में आयोजित 11वें त्रिपिटक चैंटिंग समारोह में शामिल करने के लिए थाई मोनास्टरी के मुख्य भिक्षु को सौंपा गया. त्रिपिटक के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा गया. इस मौके पर निकली शोभायात्रा में थाईलैंड के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए. इसके बाद थाई मोनास्टरी में आयोजित पूजा में बीटीएमसी के सचिव एन दोरजे व महाबोधि मंदिर के मुख्य पुजारी भिक्खु चालिंदा भी शामिल हुए. बुधवार को सुबह नौ बजे थाई मोनास्टरी से कालचक्र मैदान तक शोभायात्रा निकाली जायेगी व इसमें थाइलैंड से लाये गये दुर्लभ त्रिपिटक को भी शामिल किया जायेगा. सबसे पुराने त्रिपिटक के बारे में साथ आये थाईलैंड के बुद्धिष्ट मंत्री ने भी कई जानकारी दी.

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