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गया में कैबिनेट की बैठक : 29 प्रस्तावों को मिली मंजूरी, शराबबंदी के मामलों की सुनवाई को बनेंगे 74 कोर्ट

Updated at : 19 Dec 2019 8:39 AM (IST)
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गया में कैबिनेट की बैठक : 29 प्रस्तावों को मिली मंजूरी, शराबबंदी के मामलों की सुनवाई को बनेंगे 74 कोर्ट

गया : राज्य में 74 विशेष पूर्णकालिक न्यायालय सृजित करने का निर्णय गया में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया, जिनमें केवल मद्य निषेध से संबंधित मुकदमाें की सुनवाई हाेगी. अपर सचिव आमिर सुबहानी ने कैबिनेट की बैठक के बाद यह जानकारी दी. उन्हाेंने बताया कि अब तक इन मामलों की सुनवाई […]

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गया : राज्य में 74 विशेष पूर्णकालिक न्यायालय सृजित करने का निर्णय गया में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया, जिनमें केवल मद्य निषेध से संबंधित मुकदमाें की सुनवाई हाेगी.
अपर सचिव आमिर सुबहानी ने कैबिनेट की बैठक के बाद यह जानकारी दी. उन्हाेंने बताया कि अब तक इन मामलों की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, प्रथम के न्यायालय में हाेती थी. ये स्पेशल काेर्ट थे, फुल टाइम काेर्ट नहीं थे, जहां दूसरी सुनवाई भी हाेती थी. इससे शराबबंदी के मामले में सुनवाई व सजा दिलाने में देर हाे रही थी. इसलिए राज्य सरकार ने हाइकोर्ट की सहमति से एडीजे लेबल के 74 विशेष पूर्णकालिक काेर्ट सृजित करने का निर्णय लिया, जाे जल्दी ही कार्यरत हाे जायेंगे. अगस्त, 2019 तक शराबंदी केदाे लाख 16 हजार लंबित थे. इसी के आधार पर न्यायालय का गठन किया गया है. जजों की नियुक्ति हाइकाेर्ट करेगा. कैबिनेट सचिव दीपक कुमार ने बताया कि राज्य वानिकी प्रशिक्षण संस्थान में हुई ऐतिहासिक कैबिनेट में 29 बिंदुआें पर निर्णय लिये गये.
कैबिनेट की बैठक में बिहार राज्य चीनी निगम की बंद पड़ी आठ चीनी मिलों की कुल भूमि काे बिहार आैद्याेगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) काे हस्तांतरित करने व बियाडा द्वारा भूमि काे लीज पर आवंटित कर इसके रुपये सरकारी काेष में जमा करने के प्रस्ताव पर स्वीकृति दी गयी. इन चीनी मिलों में गुरारू, वारिसलीगंज, लाेहट, हथुआ(डिस्टीलरी), बनमनखी, गाेराैल, न्यू सावन व सीवान की चीनी मिलें शामिल हैं.
बंद पड़ी आठ चीनी मिलाें की जमीन अब बियाडा की
गया, बाेधगया व राजगीर के लाेग जून 2021 से पी सकेंगे गंगा का पानी
गया : कैबिनेट की बैठक में गंगा जल उद्वह याेजना के पहले चरण के लिए 2836 कराेड़ रुपये मंजूर किये गये. इसके पहले चरण में गया, बाेधगया व राजगीर काे 43.0 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) व 70 एमसीएम गंगा के पानी की आपूर्ति की जानी है. पहला चरण मार्च, 2021 तक पूरा कर लिया जायेगा. जून, 2021 से लाेगाें के घराें तक गंगा का शुद्ध पानी पहुंचने लगेगा. पहले चरण में पटना के मरांची गांव के निकट से पाइपलाइन के जरिये गंगा का पानी इन तीनों शहरों में पहुंचाया पायेगा.
मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री को लिखा पत्र गया ओटीए बंद नहीं करने की मांग
पटना/नयी दिल्ली : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर गया से आर्मी की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) को नहीं हटाने की मांग की है. बुधवार को लिखे पत्र में उन्होंने अपनी मांग के पीछे कई रणनीति और सुरक्षा से संबंधित वजहें बतायी हैं.
पत्र में यह भी कहा गया है कि तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटोनी ने गया में ‘ए’ श्रेणी के प्रीमियर स्तर का दूसरा राष्ट्रीय स्तर का ओटीए स्थापित करने का आश्वासन 20 जून, 2009 को दिया था. सीएम ने इस आश्वासन पत्र का पत्रांक और दिनांक का भी उल्लेख किया है. इसकी स्थापना से इस क्षेत्र में कई तरह के रोजगार के अवसर भी विकसित होने की संभावनाएं विकसित होंगी, जिससे इस क्षेत्र की सुरक्षा के साथ ही आर्थिक गतिविधि को भी बढ़ावा मिलेगा. यहां की जनता इसके कारण पर्याप्त सुरक्षित भी महसूस करेगी. इससे पहले यहां से आर्मी सर्विस कॉर्पस को हटाकर 2011 में ओटीए को स्थापित किया जा चुका है.
मुख्यमंत्री ने लिखा है कि कुछ दिन पहले अखबार और सोशल मीडिया में गया से ओटीए को हटाने से संबंधित खबर प्रसारित हुई थी, जो बहुत शॉकिंग और व्यथित करने वाली है. उल्लेखनीय है कि बिहार में आर्मी के यूनिट बेहद कम हैं. आपको पता होगा कि गया में ओटीए की स्थापना 2011 में की गयी थी. इसका उदे्श्य भारतीय सेना की शक्ति को बढ़ाना और आर्मी अधिकारियों की कमी को दूर करना है.
सीएम ने आगे लिखा है कि गया विश्व के टूरिस्ट मैप पर मौजूद है, जहां प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं. यहां एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट भी मौजूद है. ओटीए यहां विभिन्न स्थानों से आने वाले पर्यटकों को भी सुरक्षा का एहसास भी कराता है.
गया में मौजूद यह ओटीए न सिर्फ सीधी भर्ती से आये अधिकारियों और विशेष रूप से चयनित अधिकारियों को प्रशिक्षित करता है, बल्कि कई मित्र देशों के सैन्य अधिकारियों को भी प्रशिक्षित करता है. मुझे यह बात समझ में आयी है कि गया ओटीए से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अधिकारियों की गिनती बेहतरीन अधिकारियों की श्रेणी में होती है. यह ज्यादा जरूरत है कि भारतीय सेना में अधिकारियों की कमी को देखते हुए, इनकी संख्या को बढ़ाने पर खासतौर से ध्यान दिया जाये.
सीएम ने अंत में लिखा है कि उपरोक्त बातों के मद्देनजर गया में मौजूद ओटीए को बंद करना कहीं से भी उचित नहीं है. रक्षा मंत्रालय की तरफ से लिया यह गलत निर्णय राज्य के हित में विरुद्ध होगा और यह बिहार के जनमानस के साथ अन्याय होगा. इस वजह से उन्होंने रक्षा मंत्रालय से इस मामले में हस्तक्षेप करने और 2009 में दिये गये आश्वासन को पूरा करने का अनुरोध किया है.
गया ओटीए के कैडेट अब आइएमए, देहरादून में ले सकते हैं ट्रेनिंग
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को कहा कि गया के अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कैडेट्स को देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) में स्थानांतरित किया जा सकता है और खाली हुई जगह में जल्द ही सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंटल केंद्र बनाया जा सकता है. सैन्य अधिकारी ने बुधवार को कहा, ‘‘ओटीए कैडेट गया में जिस जगह को खाली करेंगे, वहां सिख लाइट इन्फैंट्री रेजीमेंटल केंद्र बनाया जा सकता है, जो इस समय उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ में राजपूत रेजीमेंटल केंद्र के साथ चल रहा है.
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