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वित्त विभाग में मोटी होती रही फाइल, नहीं हुई कोई कार्रवाई

Updated at : 30 Sep 2019 9:25 AM (IST)
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वित्त विभाग में मोटी होती रही फाइल, नहीं हुई कोई कार्रवाई

गया : जाली नोट छपाई का मामला सामने आते ही जेल प्रेस का सरकारी क्वार्टर चर्चा में आ गया है. पुलिस अधिकारी भी यहां हो रही आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए कई तरह की योजना बना रहे हैं. हालांकि, तीन दिन पहले पुलिस कार्रवाई के बाद यहां असामाजिक तत्वों का लगनेवाला जमावड़ा थम […]

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गया : जाली नोट छपाई का मामला सामने आते ही जेल प्रेस का सरकारी क्वार्टर चर्चा में आ गया है. पुलिस अधिकारी भी यहां हो रही आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए कई तरह की योजना बना रहे हैं. हालांकि, तीन दिन पहले पुलिस कार्रवाई के बाद यहां असामाजिक तत्वों का लगनेवाला जमावड़ा थम गया. क्वार्टर पर अवैध रूप से कब्जा का मामला 2012 से ही चल रहा है.

करीब 50 कर्मचारी जेल प्रेस में कार्यरत हैं. जेल प्रेस के कर्मचारियों के रहने के लिए शास्त्री नगर में करीब 52 क्वार्टर बने हुए हैं. इसमें महज 10-12 क्वार्टर में ही कर्मचारी रहते हैं. बाकी क्वार्टरों पर अवैध रूप से लोगों ने कब्जा कर रखा है. शुक्रवार को पुलिस छापेमारी के दौरान यहां के क्वार्टर में जाली नोट छपाई का मामला सामने आया था.
क्वार्टर से पुलिस ने नोट छपाई के मशीन, स्कैनर, इंक, एक लाख का जाली नोट, कागज व शराब आदि बरामद किये थे. इसमें सुरेश रजक को एक लाख के जाली नोट व नोट छापने की मशीन के अलावा शराब के साथ गिरफ्तार किया था. नोट छपाई का मास्टरमाइंड झारखंड के चौपारण का रहनेवाला संदीप कुमार उर्फ संदीप साव भागने में सफल रहा था.
एसएसपी राजीव मिश्रा ने बताया कि संदीप की गिरफ्तारी के लिए पुलिस सघन छापेमारी कर रही है. शास्त्रीनगर स्थित जेल प्रेस के सरकारी क्वार्टर में अवैध धंधे पर रोक के लिए पुलिस निगरानी रखी जा रही है. उन्होंने कहा कि जल्द ही सारे अवैध धंधेबाज पुलिस गिरफ्त में होंगे. पुलिस सूत्रों का मानना है कि संदीप की गिरफ्तारी के बाद कुछ और आपराधिक घटनाओं से पर्दा उठने की संभावना है.
जाली नोट छापने का काम होता था सरकारी क्वार्टर में
अधिकारियों के पास भेजे गये पत्र
यहां जब तक अधीक्षक तैनात रहे, क्वार्टरों पर अवैध कब्जा किये जाने की सूचना वरीय अधिकारी को देते रहे. उस वक्त के अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने कई बार वित्त विभाग के अधिकारी को पत्र भेज कर सूचना दी. जेल प्रेस कार्यालय के पत्रों से सिर्फ फाइल मोटी हुई.
कार्रवाई क्या, जांच तक करने यहां अधिकारी नहीं पहुंचे. वित्त विभाग के अधिकारियों ने डीएम को भी अब तक पत्र भेज कर जांच करने की गुजारिश शायद ही की है. मामला धीरे-धीरे पेचिदा होता चला गया.
पहले किराये पर लिया, फिर कब्जा जमाया
कार्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रिटायर्ड कर्मचारियों के खाली हुए क्वार्टर दूसरे कार्यरत कर्मचारी को ही देखरेख की जिम्मेदारी दे दी जाती रही है. जिम्मेदारी लेनेवाले कर्मचारी ही शुरू में खाली आवास को थोड़े पैसे के लोभ में आसपास के लोगों को किराये पर दे दिया.
बाद में अवैध धंधा करनेवाले लोगों ने क्वार्टर पर कब्जा जमाया. उसके बाद किराया देना क्या, यहां रहनेवाले कर्मचारियों को भी भगाना शुरू किया. ज्यादातर कर्मचारी किसी तरह के लड़ाई-झगड़े में न पड़ कर क्वार्टर खाली कर दूसरी जगह रहने लगे.
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