गया : प्रभारी गयीं गुरु गोष्ठी में, शिक्षक भी अनुपस्थित, स्कूल बंद
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Mar 2019 8:46 AM (IST)
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गया : सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर हमेशा से ही सवाल उठते रहे हैं. यह कोई गलत भी नहीं लगता जब चीजें सामने ही गड़बड़ दिख जाये. शिवरात्रि की छुट्टी के बाद भी नगर प्रखंड के पथरौरा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में छुट्टी मनायी जाती रही. दोपहर 12 तक स्कूल बंद रहा. यहां जब प्रभात […]
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गया : सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर हमेशा से ही सवाल उठते रहे हैं. यह कोई गलत भी नहीं लगता जब चीजें सामने ही गड़बड़ दिख जाये. शिवरात्रि की छुट्टी के बाद भी नगर प्रखंड के पथरौरा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में छुट्टी मनायी जाती रही. दोपहर 12 तक स्कूल बंद रहा.
यहां जब प्रभात खबर की टीम पहुंची, तो विद्यालय में बच्चे नहीं थे. सभी क्लास रूम में ताला लगा हुआ था. स्कूल के बरामदे में लगभग 20-25 महिलाएं बैठी थीं. पूछने पर कहा कि नन बैकिंग कंपनी की बैठक हो रही है. स्कूल की पहली मंजिल पर एक आंनगबाड़ी सेविका कुछ बच्चों के साथ मौजूद थीं. पूछने पर उन्होंने बताया कि स्कूल में तो कोई आया ही नहीं था. बच्चे आये थे फिर चले गये.
प्रभारी ने टोलासेवक पर बात टाली
विद्यालय की प्रभारी शशि प्रभा से जब दूरभाष पर स्कूल के बंद रहने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह गुरु गोष्ठी में भाग लेने के लिए बाहर हैं.
स्कूल के ही एक शिक्षक अाकास्मिक अवकाश पर हैं व दूसरे इंटर की काॅपियां जांचने गये हैं. टोलासेवक उपेंद्र कुमार को जिम्मेदारी दी गयी है. टोलासेवक के भी नहीं होने की बात जब कही गयी तो वह कोई जवाब नहीं दे सकीं. स्कूल के पास मौजूद कुछ महिलाओं ने बताया कि टोलासेवक आये थे और फिर चले गये. कुछ बच्चे आये और वे भी चले गये. बच्चों के नहीं रहने की स्थिति में मध्याह्न भोजन भी नहीं बनाया गया.
किसके आदेश पर हो रही थी बैठक
स्कूल के बरामदे में चल रही नन बैंकिंग की बैठक के लिए किससे आदेश लिया गया, यह भी स्पष्ट नहीं हुआ. वहीं, विद्यालय कैंपस के अंदर बैठक के लिए निश्चित रूप से किसी एक जिम्मेदार पदाधिकारी का आदेश लिया जाना जरूरी होता है.
इस कुव्यवस्था में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का जो दावा शिक्षा विभाग के अधिकारी करते हैं, वह कैसे पूरा होगा समझ से परे है. एक विद्यालय बिना आदेश के ही बंद हो जाता है, शिक्षक कहां हैं किसी को कोई खबर नहीं और टोलासेवक को किस आधार पर बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी दी गयी, यह सवाल तो खड़े होंगे ही.
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