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गया : राजसत्ता बौराती है, तो शिक्षक ही देते हैं नयी दिशा : अरुण

Updated at : 26 Nov 2018 9:21 AM (IST)
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गया : राजसत्ता बौराती है, तो शिक्षक ही देते हैं नयी दिशा : अरुण

कहा, शिक्षक ही करते हैं नरेंद्र मोदी सरीखे प्रधानमंत्री गढ़ने का काम मगध साम्राज्य की स्थापना में शिक्षक चाणक्य की भूमिका से कराया रूबरू गया : राजसत्ता के कारण शिक्षकों का सम्मान घटा है. जब भी राजसता बौराती है, तो शिक्षक ही सता को नयी दिशा देते हैं. जब तक शिक्षक नहीं होंगे, तब तक […]

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कहा, शिक्षक ही करते हैं नरेंद्र मोदी सरीखे प्रधानमंत्री गढ़ने का काम
मगध साम्राज्य की स्थापना में
शिक्षक चाणक्य की भूमिका से कराया रूबरू
गया : राजसत्ता के कारण शिक्षकों का सम्मान घटा है. जब भी राजसता बौराती है, तो शिक्षक ही सता को नयी दिशा देते हैं. जब तक शिक्षक नहीं होंगे, तब तक संसद भी व्यवस्थित नहीं होगी. शिक्षक ही चाणक्य की परंपराओं के मूल्यों के संवाहक हैं.
उन्होंने कहा कि शिक्षक ही राष्ट्र का निर्माण कर सकता है. चाहे नरेंद्र मोदी जैसे प्रधानमंत्री को गढ़ना हो या रामपाल सिंह जैसे अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष को गढ़ना हो, यह काम शिक्षक ही कर सकते हैं. ये बातें गांधी मैदान में आयोजित अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के 28वें शिक्षा-शिक्षक सम्मेलन में जहानाबाद सांसद अरुण कुमार ने कहीं.
शिक्षकों से आशीर्वाद लेने आये हैं गलैक्सी ऑफ लीडर : सांसद श्री कुमार ने कहा कि मगध के लिए गौरव का विषय है कि बड़ी संख्या में लैक्सी ऑफ लीडर एक मंच पर शिक्षकों से आशीर्वाद लेने आये हैं. चूंकि यह भूमि शिक्षकों की भूमि है, जिसने राष्ट्र को दिशा दिया है.
खास कर उन कवि शृंखलाओं को जिन्होंने इस भूमि को सींचा है चाहे वह मोहन लाल वियोगी हों, जानकी बल्लभ शास्त्री हों या तिवारी जी हों. इसीलिए हम चाणक्य की इस भूमि पर, बार-बार आपका अभिनंदन करते हैं. यही नहीं गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरु परंपरा के पूजक होने के नाते दृढ़ निश्चय और सफलता के साथ इस राष्ट्र को अराजकता से बाहर निकाला है. मगध की इस धरा पर उनका अभिनंदन करते हैं.
धनानंद व चाणक्य के इतिहास को याद कर शिक्षकों का बढ़ाया हौसला
सांसद श्री कुमार ने कहा कि एक से बढ़ कर एक लोग इस मगध की मिट्टी से भारत की आजादी की लड़ाई लड़ने, समाज की व्यवस्था में बदलाव लाने, समाज की कुरीतियों से लड़ने में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया है.
ऐसे तमाम लोगों के कारण मगध को विशेष ख्याति मिली है. यह वैसी मगध की भूमि है, जहां राज सत्ता भी बौराती है, तो शिक्षक उसे दिशा देते हैं. उन्होंने कहा कि इसी भूमि पर मगध के साम्राज्य व धनानंद का इतिहास है. जब धनानंद राजसत्ता में पागल हो जाता है और भाेग की संस्कृति का प्रत्यारोपण करता है, तो आज के पाकिस्तान के उस हिस्से में तक्षशिला विश्वविद्यालय जो उन दिनों मगध का हिस्सा हुआ करता था, उस तक्षशिला से एक शिक्षक आता है और धनानंद को चुनौती देता है. शिक्षक कहता है कि धनानंद तुम राजा जरूर हो, लेकिन प्रजा को तकलीफ मत पहुंचाओ. तुम्हारी भोग तंत्र संस्कृति से राजसत्ता का खजाना लूटा जा रहा है. उसका दुरुपयोग हो रहा है. धनानंद ने कहा यह मामूली शिक्षक इसकी हैसियत हमें चुनौती दे, इसे गिरफ्तार कर लो. लेकिन, चाणक्य मानने वाले नहीं थे.
उन्होंने कहा कि चाणक्य ने चौराहे से चंद्रगुप्त को उठा कर इस मगध का सम्राट बनाया और इस देश को हजारों वर्ष तक शासन करने का इतिहास जनता को समर्पित किया. चाणक्य मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित था जिन्होंने राष्ट्र का निर्माण किया और राजसत्ता को यह स्वीकार करना पड़ा कि शिक्षक ही राष्ट्र निर्माता हैं. शिक्षक ही सृजनकर्ता हैं.
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