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लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव बोली- कांच के बहंगिया' सुन आज भी दिल... सुनिए उनसे छठ पर्व पर बातचीत और गीत

Updated at : 28 Oct 2022 4:19 PM (IST)
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लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव बोली- कांच के बहंगिया' सुन आज भी दिल... सुनिए उनसे छठ पर्व पर बातचीत और गीत

बिहार इन दिनों पूरी तरह से छठ के रंग में रंग जाता है. हर तरफ छठ की तैयारी हो रहा होता है. सड़कों पर छठ के धुन बज रहे होते हैं. इसको लेकर सुनिए लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव ने क्या कुछ कहा..

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पटना. बिहार का महान लोक आस्था का महापर्व छठ मुख्य रूप से सूर्य के प्रत्यक्ष उपासना का पर्व है. प्रकृति पूजक बिहार के समाज में यूं तो अनेक लोकपर्व हैं, लेकिन छठ की बात कुछ अलग है. इन दिनों पूरे बिहार में छठमय माहौल हो जाता है. हर तरफ सड़कों पर छठ की गीत इसे और भी अद्भुत बना देता है. छठ महापर्व के लोकगीत को लेकर बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव से बातचीत हुई. इस दौरान उन्होंने कहा कि लोकगीत सर्वप्रिय होता है.

छठ त्योहार में न कोई शास्त्र होता है और न कोई मंत्र- मनीषा श्रीवास्तव

लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि छठ महापर्व एक ऐसा त्योहार है, जिसमें न कोई मंत्र होता है और ना कोई शास्त्र होता है. इसमें लोकगीत ही शास्त्र और शस्त्र दोनों है. इस बार छठ को लेकर लोगों में काफी उत्साह है. छठ व्रती भगवान भास्कर के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए व्रत करती हैं. दिनोंदिन छठ का विस्तार हो रहा है. छठ के लोकगीत आज भी काफी प्रचलित हैं. इतने सालों बाद भी छठ के गीत जीवित है.

‘कांच के बहंगिया’ आज भी सुन हमारा दिल सीधे गांव से जुड़ जाता है’

आगे बातचीत में मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि छठ के लोकगीत ‘कांच के बहंगिया’ आज भी सुनकर हमारा दिल सीधे गांव से जुड़ जाता है. मां से जुड़ जाता है. इन गानों का आज भी कोई दूसरा विकल्प नहीं है. लोकगीत को आज भी बहुत पसंद किया जाता है. वहीं. उन्होंने भोजपुरी पर कहा कि आज भी अच्छे कटेंट को पसंद करने वाले लोग हैं. बस खराब चीजों पर लोगों का मन पहले जाता है. भोजपुरी में भी बहुत से अच्छे गाने हैं. सभी पारंपरिक गीत का अपना एक विशेष महत्व है. उसे बस ढूंढने की जरूरत है. वीडियो में देखिये पूरी बातचीत…

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