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पटना में पांच साल बाद फिर शुरू होगा फ्लोटिंग रेस्तरां, जानें कब से ले सकते हैं गंगा नदी में क्रूज का आनंद

Updated at : 17 Jul 2022 7:55 AM (IST)
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पटना में पांच साल बाद फिर शुरू होगा फ्लोटिंग रेस्तरां, जानें कब से ले सकते हैं गंगा नदी में क्रूज का आनंद

इस क्रूज की मरम्मत का काम दोबारा शुरू किया गया है. बिहार स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लि द्वारा गांधी घाट, पटना में जल पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2009 में एमवी गंगा विहार फ्लोटिंग रेस्तरां शुरू किया गया था, लेकिन इसमें तकनीकी खराबी आने से सुरक्षा दृष्टिकोण से 2017 से यह बंद है.

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पटना. अक्तूबर से पटना के गंगा नदी में क्रूज और फ्लोटिंग रेस्तरां का फिर से लोग आनंद उठा सकेंगे. इस क्रूज की मरम्मत का काम दोबारा शुरू किया गया है. बिहार स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लि द्वारा गांधी घाट, पटना में जल पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2009 में एमवी गंगा विहार फ्लोटिंग रेस्तरां शुरू किया गया था, लेकिन इसमें तकनीकी खराबी आने से सुरक्षा दृष्टिकोण से 2017 से यह बंद है.

जल पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू हुआ था रेस्तरां

बिहार स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट के प्रबंध निदेशक कंवल तनुज ने कहा कि इसके मरम्मत का काम दोबारा से शुरू किया गया है और अक्तूबर से इसे दोबारा लोगों के लिए शुरू कर दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि इस निविदा को सफल बनाने में भी देश के सभी तटीय शहरों और तटीय राज्यों के सभी प्रमुख शहरों में व्यापक प्रचार-प्रसार कराया गया था,जिसमें संध्या सम्राट कंस्ट्रक्शन एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड पटना का चयन किया गया है. चयनित एजेंसी को पीपीपी मोड के तहत 15 वर्षों के लिए लीज पर संचालन के लिए दिया गया है.

पटना जू में जानवरों के बाड़े और पेड़ों पर लगेगा बार कोड

पटना पटना जू में आने वाले विजिटर्स को यहां के वन्यप्राणियों और पेड़ों की जानकारी अब स्मार्ट फोन से भी मिल सकेगी. जू प्रशासन की ओर से वन्यप्राणियों के बाड़े और महत्वपूर्ण पेड़ों पर बार कोड लगाये जायेंगे. यहां आने वाले दर्शक उस कोड को अपने मोबाइल में स्कैन कर वन्यप्राणी और पेड़ों की पूरी जानकारी ले सकेंगे. पटना जू में पहली बार यह सुविधा विजिटर्स के लिए बहाल की जा रही है.

300 प्रजातियों के एक हजार से अधिक वन्यप्राणी

पटना जू में करीब 300 प्रजातियों के एक हजार से अधिक वन्यप्राणी हैं. इनमें बाघ, दरियाई घोड़ा, मगरमच्छ, तेंदुआ, हाथी, सियार, काला हिरण, हिमालयी काले भालू, चित्तीदार हिरण, मोर, पहाड़ी मैना, घड़ियाल, एमू, मोर अजगर, भारतीय गैंडा, चिंपाजी, जिराफ और जेब्रा आदि शामिल हैं. पौधों के प्रदर्शन में औषधीय पौधों के लिए एक नर्सरी, आर्किड रूम, फर्न हाउस, एक ग्लास हाउस और एक गुलाब उद्यान बनाया गया है.

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