EXCLUSIVE : पीएमसीएच में वेंटिलेटर घोटाला, नहीं लगे तीन वेंटिलेटर, भुगतान कर दिया 36 लाख

Updated at : 20 Jan 2022 9:09 AM (IST)
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EXCLUSIVE : पीएमसीएच में वेंटिलेटर घोटाला, नहीं लगे तीन वेंटिलेटर, भुगतान कर दिया 36 लाख

पीएमसीएच के शिशु रोग विभाग में गंभीर बच्चों के इलाज के लिए 19 मार्च, 2012 को तीन और 30 मार्च, 2012 को पांच वेंटिलेटर खरीदे गये थे.

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आनंद तिवारी पटना पीएमसीएच में वेंटिलेटर की खरीद के नाम पर लाखों रुपये का घोटाला सामने आया है. त्रिसदस्यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. इसमें पाया गया है कि शिशु रोग विभाग में बिना इंस्टाॅल किये तीन वेंटिलेटर को स्टोर में मंगा कर पैसे का भुगतान कर दिया गया.

वेंटिलेटर मुहैया कराने वाली कंपनी सोना ड्रग एजेंसी को 36 लाख तत्कालीन अधीक्षक कार्यालय में कार्यरत रोकड़पाल अजय उप्पल ने भुगतान कर दिया, जबकि आज तक वेंटिलेटर शिशु वार्ड में नहीं लगे हैं. जांच टीम ने रोकड़पाल को दोषी पाया है. एक वेंटिलेटर की कीमत 12 लाख है. इस हिसाब से तीन वेंटिलेट की कीमत 36 लाख है.

10 साल से स्टोर में धल फांक रहे हैं तीनों वेंटिलेटर

पीएमसीएच के शिशु रोग विभाग में गंभीर बच्चों के इलाज के लिए 19 मार्च, 2012 को तीन और 30 मार्च, 2012 को पांच वेंटिलेटर खरीदे गये थे. इनमें पांच वेंटिलेटर तत्कालीन शिशु रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ संजता राय चौधरी व अधीक्षक की देखरेख में खरीदे गये, जिन्हें शिशु रोड वार्ड में लगा दिया गया.

वहीं, बाकी तीन वेंटिलेटर के लिए बिना अधीक्षक व विभागाध्यक्ष की अनुमति के स्टोर से ही भुगतान कर दिया गया. जबकि पांच वेंटिलेटर के लिए स्टोर से मंगा कर वार्ड में लगाया. उसका ट्रायल किया गया और इसके बाद पैसे का भुगतान किया गया था. बाकी तीन के बारे में अस्पताल प्रशासन को कोई जानकारी नहीं थी.

जब मामला पकड़ में आया, तो तीनों वेंटिलेटर को वार्ड में लगाने पर रोक लगा दी गयी. नतीजतन 10 साल से 36 लाख रुपये के वेंटिलेटर आज भी धूल फांक रहे हैं. वेंटिलेटर खरीद के नाम पर रुपये के लेन-देन के संदेह और वित्तीय अनियमितता के बाद वर्तमान अधीक्षक डॉ आइएस ठाकुर ने रोकड़पाल अजय उप्पल को तत्काल कैंसर वार्ड में ट्रांसफर कर दिया.

कर्मचारियों पर गिर सकती है गाज

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ आइएस ठाकुर ने कहा कि जांच टीम ने हाल ही में रिपोर्ट सौंपी है. अधीक्षक कार्यालय में कार्यरत तत्कालीन रोकड़पाल ने बिना विभागाध्यक्ष व अधीक्षक की अनुमति लिये ही कंपनी को 36 लाख रुपये भुगतान करदिये.

सरकारी पैसों का गबन व मरीजों के साथ किसी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. फिलहाल रोकड़पाल को कैंसरवार्ड में ट्रांसफर करदिया गया. इस मामले में अभी और कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है़

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