पटना में बेकाबू हुआ डेंगू, संक्रमितों की संख्या पहुंची 233, पिछले 24 घंटे में मिले रिकॉर्ड 60 नये मरीज

जिले में डेंगू तेजी से पांव पसार रहा है़ मंगलवार को पीएमसीएच, आइजीआइएमएस और एनएमसीएच में डेंगू के कुल 60 नये मरीज मिले हैं, जो इस सीजन में एक दिन में मिले डेंगू मरीजों की सबसे अधिक संख्या है. इनमें सबसे अधिक पीएमसीएच में 46 और एनएमसीएच में 10 और आइजीआइएमएस में चार डेंगू मरीज पाये गये.
पटना. जिले में डेंगू तेजी से पांव पसार रहा है़ मंगलवार को पीएमसीएच, आइजीआइएमएस और एनएमसीएच में डेंगू के कुल 60 नये मरीज मिले हैं, जो इस सीजन में एक दिन में मिले डेंगू मरीजों की सबसे अधिक संख्या है. इनमें सबसे अधिक पीएमसीएच में 46 और एनएमसीएच में 10 और आइजीआइएमएस में चार डेंगू मरीज पाये गये. 24 घंटे में 301 संदिग्ध मरीजों के सैंपलों की जांच की गयी, जिनमें से 60 मरीज पाॅजिटिव पाये गये. इनमें नौ मरीजों को संबंधित तीनों अस्पतालों में भर्ती किया गया है़ इसके अलावा बाकी मरीज प्राइवेट अस्पतालों में, तो कुछ का घर में ही इलाज चल रहा है.
इन तीनों मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में अभी कुल 24 मरीज भर्ती हैं. वहीं सिविल सर्जन डॉ केके राय ने बताया कि डेंगू मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है़ इस सीजन में जिले में अब तक डेंगू मरीजों की संख्या 233 तक पहुंच गयी है़ पिछले एक माह से वायरल फीवर का प्रकोप गहराया. इसके बाद से लगातार डेंगू के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है़
लगातार बढ़ रहे डेंगू के मरीजों की संख्या के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे तेज कर दिया है़ अब तक दो लाख से अधिक घरों में डेंगू के लार्वा की जांच की जा चुकी है़ इस दौरान 85 से अधिक घरों में डेंगू का लार्वा मिला है़.
राजीव नगर, शास्त्रीनगर, महेंद्रु, कंकड़बाग, गोविंद मित्रा रोड, बुद्धा कॉलोनी, राजेंद्र नगर, गोला रोड, खाजपुरा, नेपाली नगर, न्यू बाइपास, ट्रांसपोर्ट नगर, यारपुर, बहादुरपुर, पाटलिपुत्रा कॉलोनी, नागेश्वर कॉलोनी, बोरिंग रोड, राजाबाजार, दानापुर, बिहटा, मसौढ़ी, पुनपुन, मोकामा, मनेर आदि इलाकों से डेंगू के नये मरीज मिले हैं. इन इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है.
शरीर में खून को रोके रखने के लिए प्लेटलेट्स की जरूरत होती है. लेकिन, डेंगू अगर गंभीर स्थिति में पहुंच जाये, तो प्लेटलेट्स तेजी से घटना शुरू हो जाता है. स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में 1.40 लाख से लेकर चार लाख तक प्लेटलेट्स होता है. अगर यह 20 हजार के आसपास पहुंच जाये, तो ब्लीडिंग शुरू हो जाती है. साथ ही प्लेटलेट्स भी चढ़ाना पड़ सकता है. मल्टी ऑर्गन फेल्योर का जोखिम भी बढ़ जाता है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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