नई ट्रेन के बदले अतिरिक्त वाशिंग पिट के निर्माण की ज्यादा जरूरी

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नई ट्रेन के बदले अतिरिक्त वाशिंग पिट के निर्माण की ज्यादा जरूरी

तमाम गाड़ियां प्राय: सालों भर फुल रहती है. लिहाजा अतिरिक्त ट्रेनों की डिमांड जोरशोर से होती रहती है, लेकिन यहां नई गाड़ियों से कहीं अधिक जरूरत अतिरिक्त वाशिंग पिट का निर्माण है.

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दरभंगा. दरभंगा के यात्रियों को लंबी दूरी की किसी भी ट्रेन में ऑन डिमांड आरक्षण नहीं मिलता. चाहे दिल्ली जाना हो, या फिर मुंबई. बेंगलुरू, पुणे सहित कोलकाता तक के लिए यात्रियों को आपात स्थिति में टिकट के लिए तत्काल आरक्षण का ही सहारा लेना पड़ता है अथवा कोई दूसरा विकल्प तलाशना पड़ता है. तमाम गाड़ियां प्राय: सालों भर फुल रहती है. लिहाजा अतिरिक्त ट्रेनों की डिमांड जोरशोर से होती रहती है, लेकिन यहां नई गाड़ियों से कहीं अधिक जरूरत अतिरिक्त वाशिंग पिट का निर्माण है. वैसे यहां दो वाशिंग पिट है, जिनपर ट्रेनों की साफ-सफाई के साथ ही जरूरी मेंटिनेंस का कार्य किया जाता है. ट्रेनों की संख्या के अनुपात में वाशिंग पिट कम होने के कारण नई गाड़ियां यहां से नहीं चलायी जा पाती हैं. अगर कोई नई गाड़ी दी भी जाती है तो उसके लिए पूर्व से चल रही किसी महत्वपूर्ण ट्रेन की दूसरे स्टेशन विस्तार के रूप में कीमत अदा करनी पड़ती है. सनद रहे कि यहां से पिछले कुछ वर्षों में कई गाड़ियों का विस्तार कर दिया गया.

एक दिन में अधिकतम आठ ट्रेनों की धुलाई संभव

लंबी दूरी की ट्रेनों के मेंटिनेंस एवं साफ-सफाई के लिए वाशिंग पिट की जरूरत होती है. इसपर ट्रेन की मुकम्मल सफाई के साथ ही अभियंत्रण विभाग के अलग-अलग अधिकारी के नेतृत्व में जरूरी जांच की जाती है. गड़बड़ियों को दुरूस्त कर फिट दिया जाता है. इसके बाद ही ट्रेन का परिचालन होता है. एक ट्रेन की साफ-सफाई के लिए छह घंटे का समय निर्धारित है. इस नजरिए से एक दिन में अधिकतम आठ गाड़ियों की धुलाई संभव हो पाती है. जंक्शन से प्रतिदिन 16 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन फिलहाल हो रहा है.

र्षों से साप्ताहिक ट्रेन के रूप में चल रही कई गाड़ियां

वाशिंग पिट की किल्लत एवं स्टेबलिंग लाइन की कमी के कारण एक दशक से अधिक समय से चल रही कई गाड़ियों का फेरा विस्तार आज तक नहीं हो सका है. सूत्र बताते हैं कि फेरा बढ़ाने के लिए उसकी साफ-सफाई एवं मेंटिनेंस का प्रबंध यहां किया जाना जरूरी है, जिसका अभाव है. बता दें कि बेंगलुरू के लिए 12578 बागमती एक्सप्रेस एवं पुणे के लिए 11034 ज्ञान गंगा एक्सप्रेस सालों से साप्ताहिक ट्रेन के रूप में चल रही हैं, जबकि इन गाड़ियों में शायद ही किसी दिन आरक्षण सहज रूप में उपलब्ध हो पाता है. सिकंदराबाद एक्सप्रेस भी सातों दिन नहीं चल रही.

लंबी दूरी की ट्रेन बढ़ाया जाना जरूरी

दरभंगा से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू, पुणे एवं हैदराबाद-सिकंदराबाद के लिए दैनिक अतिरिक्त ट्रेनों की शिद्दत से जरूरत महसूस की जा रही है. मुंबई के लिए पहले पवन एक्सप्रेस दरभंगा से ही चला करती थी, जिसे अब जयनगर से चलाया जा रहा है. बेंगलुरू के यात्री विशेषकर पटना से मजबूरन सफर करते हैं. लिहाजा राजस्व का लाभ भी समस्तीपुर रेल मंडल को नहीं मिल पा रहा है. गाड़ियों की संख्या बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा वाशिंग पिट एवं प्लेटफार्म की कमी बतायी जा रही है.

लहेरियासराय स्टेशन का हो उपयोग

जंक्शन से ठीक उत्तर अगल-बगल में दो वाशिंग पिट बने हुए हैं, जिनका उपयोग किया जा रहा है. यहां यात्रियों की संख्या के नजरिए से दो और वाशिंग पिट की आवश्यकता है. उपभोक्ता कल्याण संघ के महासचिव विश्वनाथ शर्मा इसके लिए लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं. बताते हैं कि कटहलबाड़ी से उत्तर रेलवे का बड़ा भूखंड बेकार पड़ा है. उसका उपयोग किया जा सकता है. वहीं बगल के लहेरियासराय स्टेशन से भी लंबी दूरी की गाड़ियां चलायी जा सकती है. उन्होंने इस दिशा में ठोस पहल की जरूरत जतायी है.

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