Darbhanga News: दरभंगा. छह पीजी विभागों में नामांकित छह सत्र के अर्हताधारी करीब 250 छात्रों की सुलभ छात्रवृत्ति योजना की राशि कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि दबाए बैठा है. सुलभ इंटरनेशनल के तत्कालीन चेयरमैन डॉ विदेश्वर पाठक ने छह पीजी विभागों में नामांकित आर्थिक रूप से कमजोर व योग्यता के आधार पर चयनित छात्रों को पढ़ने में सहायता के उद्देश्य से 25 लाख रुपये विवि को दे रखा है. विवि उस राशि को बैंक में जमा किये हुये है. बैंक से प्राप्त ब्याज से प्रत्येक विषय के नामांकित अर्हताधारी पांच- पांच छात्रों को अध्ययन अवधि यानी दो वर्षों के पाठ्यक्रम में 750 रुपये प्रतिमाह सत्रवार 20 महीना तक छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है. इसके अनुसार पीजी साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष, वेद, दर्शन व धर्मशास्त्र विषय में सत्रवार लगभग 40 छात्र-छात्राओं को विवि से राशि मिलनी है, जो नहीं दी जा रही है. जानकारों की मानें तो बैंक में जमा 25 लाख रुपये का प्रतिवर्ष करीब 187500 रुपया ब्याज मिल रहा है. जितने दिनों से विवि ने छात्रवृत्ति मद का भुगतान रोक रखा है, ब्याज मद की राशि ही करीब 10 लाख रुपये बतायी जा रही है. इसे अगर मूलधन में जोड़ दिया जाय तो, अब तक करीब 35 लाख रुपये जमा हो गया होगा.
विवि व पीजी विभागों का चक्कर लगाकर थक चुके लाभुक
लाभुक छात्र-छात्रा विवि व पीजी विभागों का चक्कर लगाकर थक चुके हैं. अब तो छात्रों को यह चिंता सताने लगी है कि दान की राशि भी सुरक्षित है या नहीं. कहीं राशि का विवि ने अन्यत्र तो उपयोग नहीं कर लिया है. और इसके कारण पांच वर्ष से छात्रवृत्ति भुगतान नहीं कर रहा है. राशि भुगतान के लिए पीजी विभागों की ओर से अर्हताधारी चयनित छात्र-छात्राओं की सूची कई बार डीएसडब्ल्यू कार्यालय भेजी जा चुकी है. बावजूद पीजी विभागों को अभी तक छात्रवृत्ति मद की राशि नहीं भेजी गयी है. विवि सूत्रों के अनुसार अभी तक मात्र सत्र 2019-21 के प्रथम वर्ष के छात्रों को केवल 10 माह का छात्रवृत्ति भुगतान हुआ है. इसके बाद से सत्र 2020-22, 2021-23, 2022-24, 2023-25, 2024-26 के छात्रों का भुगतान लंबित है.
कहते हैं अधिकारी
जिस प्रारुप पर छात्रवृत्ति के अर्हताधारी चयनित छात्रों की सूची पीजी विभागों द्वारा जमा की जानी है, उस पर अभी तक केवल पीजी व्याकरण विभाग से ही सूची मिली है. अन्य पीजी विभागों को शुक्रवार को प्रारूप की प्रति भेजी गई है. इस प्रारूप पर सूची प्राप्त होने पर भुगतान की अनुमति के लिए कुलसचिव व कुलपति को संचिका बढ़ायी जायेगी.
प्रो. पुरेंद्र बारिक, डीएसडब्ल्यूडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

