Darbhanga News: संबद्ध कॉलेजों में 65 साल बाद भी रिटायर नहीं हो रहे प्रभारी प्रधानाचार्य

Updated at : 07 Sep 2025 10:44 PM (IST)
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Darbhanga News: संबद्ध कॉलेजों में 65 साल बाद भी रिटायर नहीं हो रहे प्रभारी प्रधानाचार्य

Darbhanga News:लनामिवि का संबद्ध डिग्री कॉलेज कहने को तो बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधान के तहत संचालित है, लेकिन इनका संचालन शासी निकाय की मनमर्जी से होता है.

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Darbhanga News: प्रवीण कुमार चाैधरी, दरभंगा. लनामिवि का संबद्ध डिग्री कॉलेज कहने को तो बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधान के तहत संचालित है, लेकिन इनका संचालन शासी निकाय की मनमर्जी से होता है. अधिकांश शासी निकाय को विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों से कोई लेना- देना नहीं है. पांच से सात सदस्यों की शासी निकाय टीम आपसी तालमेल बिठा कर कॉलेजों को लूट रही है. लूट का सिंडिकेट नहीं टूटे, इसे लेकर यूजीसी के नियमों को भी नहीं माना जाता. 65 साल पूरे कर चुके प्रभारी प्रधानाचार्य कुर्सी पर बनाये रखे जा रहे. चूंकि प्रधानाचार्य शासी निकाय के पदेन सदस्य होते हैं, सो नये लोग के कुर्सी पर आ जाने से फिर से नया सेटिंग नहीं करना पड़े, इससे बचने के लिए रिटायर प्रधानाचार्य को अवैध रूप से कुर्सी पर बनाये रखा जाता है. इस सिंडिकेट में शामिल लिपिक और विशेष आदेशपाल भी रिटायर होकर रिटायर नहीं होते. किसी के पद का नाम बदलकर, तो किसी को वाउचर से भुगतान होता है. कुछ कॉलेजों में तो बकायदा सचिव 10 से 15 हजार तथा शिक्षक प्रतिनिधि पांच से 10 हजार रुपया मासिक लेकर बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं. काॅलेज खर्च के नाम पर अवैध तरीके से हर माह लाखों रुपये सिंडिकेट चुरा ले जा रहा. जबकि शिक्षकों के मासिक मानदेय के नाम पर शासी निकाय पैसे का रोना राेता रहता है. हर कॉलेजों में कुछ दबंग शिक्षाकर्मी को सिर्फ इसलिए बहाल कर रखा गया है, कि विरोध की आवाज उठे तो सख्ती से दबा दी जाये.

विश्वविद्यालय की आगत-निर्गत पंजी में दर्ज नहीं होती शिकायतें

शासी निकायों की कारगुजारियों की ज्यादातर शिकायतों को विश्वविद्यालय की आगत- निर्गत पंजी में दर्ज तक नहीं किया जाता, कि संचिका में अग्रसारित नहीं करना पड़े. गाहे-बगाहे अगर संचिका बढ़ जाती है तो अधिकारी स्तर से उसे आगे बढ़ाने की जगह उल्टे संबंधित कॉलेजों तक यह जानकारी पहुंचा दी जाती है कि आपका अमुक शिक्षाकर्मी शिकायत किया है. ऐसे में कार्रवाई होती नहीं, उल्टे कॉलेज प्रबंधन की आंखों का शिकायतकर्ता कांटा बन जाते हैं. कोपभाजन बनना पड़ता है.

शहर के एक कॉलेज में कुर्सी पर बने हैं रिटायर प्रभारी प्रधानाचार्य

शहर के एक संबद्ध डिग्री कॉलेज में सेवानिवृत्त हो चुके प्रभारी प्रधानाचार्य को प्रबंधन समिति करीब सात माह से अवैध रूप से पद पर बना कर रखे हुए है. उनके दो वर्षों के सेवा विस्तार का समिति ने अनुमोदन के लिए विवि को प्रस्ताव भेजा है. शहर के ही एक कॉलेज में रिटायर प्रभारी प्रधानाचार्य पिछले साल तक पद पर बने रहे. कई कॉलेजों में रिटायर लिपिक तथा आदेशपाल से काम लिया जा रहा है. देखा-देखी धीरे धीरे अन्य संबद्ध कॉलेजों में भी यह बीमारी फैलती जा रही है. रिटायर होने वाले शिक्षाकर्मी सेवा विस्तार की जुगाड़ में लगे रहते हैं.

कुलपति के निर्देश को ठेंगा दिखा रहा शासी निकाय

कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने करीब आठ माह पूर्व सभी संबद्ध कॉलेजों को पत्र द्वारा तथा प्रधानाचार्यों की बैठक में भी निर्देशित किया था कि सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार वाले शिक्षाकर्मियों को पद मुक्त करते हुए विश्वविद्यालय को सूचित करें. कुलपति के निर्देश को कुछ शासी निकायों ने नहीं माना. उनके निर्देश को लगातार ठेंगा दिखाया जा रहा है.

कहते हैं अधिकारी

सेवानिवृत्ति शिक्षाकर्मियों को सेवा विस्तार दिये जाने संबंधी शिकायत सामने नहीं आयी है. शिकायत मिलने पर मामले को कुलपति के संज्ञान में देकर उचित कार्रवाई की जायेगी.

प्रो.अरुण कुमार सिंह, कॉलेज निरीक्षक

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