शिक्षण को रुचिकर बनाने के लिए प्राध्यापकों को लेना चाहिए नूतन कौशल का आश्रय

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 22 Aug 2024 11:06 PM

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कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडे ने संस्कृत के सर्वांगीण विकास एवं लोक व्यवहार में लाने के लिए संस्कृतज्ञों के बीच शास्त्र चर्चा पर विशेष बल दिया.

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दरभंगा. कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में 16 अगस्त से जारी संस्कृत सप्ताह समारोह के समापन पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडे ने संस्कृत के सर्वांगीण विकास एवं लोक व्यवहार में लाने के लिए संस्कृतज्ञों के बीच शास्त्र चर्चा पर विशेष बल दिया. कहा कि इससे संस्कृत का जनमानस में प्रचार- प्रसार तेज होगा. संस्कृत सप्ताह के समापन को एक तरह से उद्यापन बताते हुए यकीन जताया कि यह संस्कृत छात्रों के लिए उद्दीपन का कार्य करेगा. कुलपति ने कहा कि छात्रों की चहुमुखी प्रतिभा को बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय में कला रंजनी प्रकोष्ठ खोला गया है. ललित कला विभाग को भी जल्द ही जिंदा किया जाएगा. कहा कि शिक्षण को रुचिकर बनाने के लिए प्राध्यापकों को नूतन कौशल का आश्रय लेना चाहिए. अध्यापन रुचिकर होगा, तो छात्र दौड़े- दौड़े वर्ग कक्ष की ओर आयेंगे. मुख्य अतिथि सह संस्कृत भारती बिहार -झारखंड के क्षेत्र मंत्री प्रो. श्रीप्रकाश पांडेय ने संस्कृत के प्रचार – प्रसार के लिए सरल शब्दों के प्रयोग को जरूरी बताया. कहा कि खासकर संस्कृतज्ञों को संस्कृत में ही बोल-चाल करना चाहिए. प्रो. पांडेय ने कहा कि कर्नाटक, मध्यप्रदेश, गुजरात आदि राज्यों में दो- दो संस्कृत ग्राम संघटन के प्रयत्न से व्यवहार भाषा के रूप में संस्कृत का प्रयोग होने लगा है. यहां भी संस्कृत भाषा के पुनरुत्थान के लिए हम सभी को कृतसंकल्पित होकर संगठित होने की जरूरत है. विश्वविद्यालय के साहित्य विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीनाथ झा ने संस्कृत की महत्ता, भाषा के साथ-साथ शास्त्र के रूप में भी प्रतिष्ठित बताया. कहा कि संस्कृत चरित्र का निर्माण करती है. अच्छे-बुरे का ज्ञान कराती है. इसकी सूक्तियां हमें जीने की राह बताती है. उन्होंने संस्कृत भाषा में ही अध्ययन- अध्यापन पर बल दिया तथा साहित्य की दृढ़ता के लिए संस्कृत भाषा की उपासना को आवश्यक बताया. डीन डॉ शिवलोचन झा ने वर्ग में छात्रों की उपस्थिति नियमित करने के विभिन्न उपायों पर चर्चा की. पीआरओ निशिकान्त ने बताया कि सभी वक्ताओं ने संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम को सराहा एवं छात्रों के हित में जरूरी बताया. डॉ राजेश कुमार सिंह के संचालन में हुए कार्यक्रम में कुलगीत डॉ साधना शर्मा ने गाया. स्वागत डॉ सुधीर कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ यदुवीर स्वरूप शास्त्री ने किया. वैदिक मंगलाचरण डॉ शम्भू शरण तिवारी तथा लौकिक मंगलाचरण डॉ रितेश कुमार चतुर्वेदी ने प्रस्तुत किया. समारोह में कुलसचिव प्रो. ब्रजेश पति त्रिपाठी, प्रॉक्टर प्रो. पुरेंद्र वारीक, बजट पदाधिकारी डॉ पवन कुमार झा, सीसीडीसी डॉ दिनेश झा, भू-संपदा पदाधिकारी डॉ उमेश झा, प्रो. दिलीप कुमार झा, प्रो. दयानाथ झा, शिक्षा शास्त्र निदेशक डॉ घनश्याम मिश्र, डॉ रामसेवक झा, डॉ त्रिलोक झा आदि मौजूद रहे.

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