LNMU News: मजदूरों ने श्रमदान कर संरक्षित किया दुर्लभ भोजपत्र का पेड़, सुरक्षा की उठी मांग

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लनामिवि परिसर के भोजपत्र के पेड़ को मजदूरों ने किया सुरक्षित

पेड़ को संरक्षित करते मजदूर

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) परिसर में एक दुर्लभ भोजपत्र वृक्ष को मजदूरों ने स्वेच्छा से श्रमदान कर बचाया है. जड़ों के कटाव से पेड़ गिरने का खतरा था. अब विश्वविद्यालय प्रशासन से इसे 'विरासत वृक्ष' घोषित कर संरक्षित करने की मांग की गई है.

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Darbhanga News: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) के मुख्य प्रशासनिक भवन के निकट स्थित तालाब के पूर्वी-दक्षिणी किनारे पर लगे दुर्लभ भोजपत्र वृक्ष को संरक्षित करने के लिए शनिवार को कुछ मजदूरों ने स्वेच्छा से श्रमदान किया. मजदूरों ने बिना किसी पारिश्रमिक के पेड़ की जड़ों में मिट्टी भरकर उसे सुरक्षित करने का प्रयास किया.

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जड़ों का कटाव बना था खतरा

मजदूरों ने बताया कि पेड़ की जड़ों के आसपास मिट्टी का कटाव हो जाने से उसके गिरने का खतरा पैदा हो गया था. इसे देखते हुए उन्होंने जड़ों में मिट्टी भरकर पेड़ को मजबूती दी.

उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में भोजपत्र का यह संभवतः एकमात्र पेड़ है, लेकिन इसके संरक्षण के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं है. परिसर में बैठने वाले छात्र-छात्राएं अनजाने में इसके तने की छाल छील देते हैं, जिससे पेड़ को नुकसान पहुंच रहा है.

ऐतिहासिक और औषधीय महत्व का है भोजपत्र

भोजपत्र का वृक्ष भारतीय इतिहास और संस्कृति में विशेष महत्व रखता है. प्राचीन काल में कागज के अभाव में ऋषि-मुनियों और विद्वानों द्वारा ग्रंथ, मंत्र और शास्त्र इसकी छाल पर लिखे जाते थे. इसे विद्या का प्रतीक भी माना जाता है. आयुर्वेद में भी इसकी छाल का औषधीय महत्व बताया गया है.

इसी कारण विश्वविद्यालय परिसर में इस वृक्ष की मौजूदगी को एक महत्वपूर्ण धरोहर माना जा रहा है.

सुरक्षा घेरा बनाने की मांग

मजदूरों ने कहा कि यदि ऐसे दुर्लभ वृक्षों का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां इन्हें केवल पुस्तकों में ही देख पाएंगी. छात्रों और शिक्षाकर्मियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से भोजपत्र वृक्ष के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाने तथा इसे "विरासत वृक्ष" घोषित कर संरक्षित करने की मांग की है.


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Pravin Kumar Chou

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