डीएमसी की प्रतिष्ठा आगे बढ़ाने का सभी मिलकर करेंगे काम

रभंगा मेडिकल कॉलेज के तीन दिवसीय शताब्दी समारोह का समापन रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हो गया.
दरभंगा. दरभंगा मेडिकल कॉलेज के तीन दिवसीय शताब्दी समारोह का समापन रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हो गया. इसके पूर्व सुबह में झंडोत्तोलन से आज के कार्यक्रम की शुरुआत हुई. चिकित्सकों ने मार्च पास्ट निकाला. गीतों के धुनों पर वरीय एवं कनीय चिकित्सक खूब थिरके. चिकित्सक व छात्रों का भेद मिट गया. मेडिकल छात्रों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से समाज की कुरीतियों पर कटाक्ष किया. सेवानिवृत्त चिकित्सक, फैक्लिट को सम्मानित किया गया. वर्तमान एवं पूर्व के छात्रों ने अपने काम से डीएमसी की प्रतिष्ठा देश-विदेश में बढ़ाने का संकल्प लिया. उदघाटन भाषण प्राचार्य डॉ अलका झा ने दिया. उन्होंने डीएमसी के प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाने के लिये कार्य करने की बात कही. डॉ रमण कुमार वर्मा ने डीएमसीएच बचाओ अभियान की चर्चा की. पूर्व प्राचार्य डॉ एसपी सिंह ने चिकित्सा क्षेत्र में डीएमसीएच के योगदान की चर्चा की. लोगों की जरूरत को समझ राज परिवार ने की थी डीएमसी की स्थापना : कुमार कपिलेश्वर कुमार कपिलेश्वर सिंह ने कहा कि उनके दादा रामेश्वर सिंह ने दरभंगा मेडिकल कॉलेज की स्थापना की. लोगों के मेडिकल संबंधी जरूरतों को समझा. कहा कि डीएमसी के अलावा देश- विदेश में कई जगह राज परिवार ने कई संस्थानों को स्थापित किया. विश्व भर में फैली है दरभंगा मेडिकल कॉलेज की ख्याति- डॉ शाही मुख्य अतिथि डॉ बीके शाही ने कहा कि दरभंगा मेडिकल कॉलेज की ख्याति विश्व भर में फैली हुई है. कुछ माह पहले वाशिंगटन में डीएमसी के पूर्ववर्ती छात्राें का कार्यक्रम हुआ था. उसमें दो स्टूडेंट शामिल हुए. उसमें सहभागिता कर खुद को गौरवान्वित महसूस किया. डॉ शाही ने बताया कि 1959 में उन्होंने दरभंगा मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया. उनके समय की शिक्षा बहुत अच्छी थी. पांच साल की पढ़ाई में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि शिक्षक लेट हुये हों. नहीं भुलाया जा सकता पूर्ववर्ती छात्रों का योगदान : मार्गेट बतौर विशिष्ट अतिथि कीनिया निवासी यूनिसेफ की चीफ ऑफ फील्ड ऑफिसर मार्गेट गौउड़ा ने कहा कि वे चार साल से भारत में हैं. मध्यप्रदेश के बाद बिहार में मेडिकल फील्ड में कार्य कर रही हैं. उनका काम मैटरनल चाइल्ड हेल्थ को कम करना है. कहा कि दरभंगा मेडिकल कॉलेज के पूर्ववर्ती छात्र का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता है. यहां की चिकित्सा व्यवस्था बेहतर है. कहा कि बच्चा बचे तो बिहार आगे को लेकर सभी का साथ जरूरी है. चिकित्सक अपना अधिकांश समय निजी क्लिनिक में देते : कुलपति बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसएन सिन्हा ने कहा कि चिकित्सक अपना अधिकांश समय क्लीनिक में देते हैं. सब कुछ पैसा नहीं है. कहा कि काम करोगे तो नाम होगा. छात्रों के साथ समय बितायें. सुख- दुख में उनका साथ दें. तब ही छात्रों के साथ अच्छा रिश्ता हो सकेगा. कहा कि उनके समय में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में ऑडिटोरियम फूल रहता था. लेकिन, आज अधिकांश सीट खाली है. इसकी जिम्मेदारी कॉलेज प्रबंधन की है. डीएमसीएच अधीक्षक डॉ शीला कुमारी ने डीएमसीएच की चिकित्सा को बेहतर बनाने के लिये नारी सशक्तिकरण की चर्चा की. मौके पर डॉ भरत प्रसाद, डॉ सुशील कुमार, डॉ ओम प्रकाश, डॉ पूनम मिश्रा आदि मौजूद थे.
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By Prabhat Khabar News Desk
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