एक करोड़ से अधिक का डीसी विपत्र लंबित,19 बीआरसी कर्मियों के वेतन में 20% कटौती

प्रतीकात्मक तस्वीर
Darbhanga में 19 BRC लेखा सहायकों के वेतन से 20% की कटौती की जाएगी क्योंकि वे शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी के लिए जारी 3.39 करोड़ रुपये में से 1.26 करोड़ रुपये के DC विपत्र जमा करने में विफल रहे हैं. जिला प्राथमिक शिक्षा अभियान ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है.
Darbhanga News: शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी एवं दीक्षांत समारोह के लिए उपलब्ध कराई गई राशि का डीसी विपत्र (उपयोगिता प्रमाण पत्र) जमा नहीं करने वाले बीआरसी के लेखा सहायक सह डाटा इंट्री ऑपरेटरों पर जिला प्राथमिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा अभियान ने सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) संजय कुमार ने संबंधित कर्मियों के जुलाई माह के वेतन से 20 प्रतिशत राशि की कटौती करने का आदेश दिया है.
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डीसी विपत्र नहीं देने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी
डीपीओ ने स्पष्ट किया कि यदि शत-प्रतिशत डीसी विपत्र उपलब्ध नहीं कराया गया तो संबंधित कर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी. इसके लिए संबंधित लेखा सहायक सह डाटा इंट्री ऑपरेटर स्वयं जिम्मेदार होंगे.
दो वर्ष बाद भी एक करोड़ से अधिक का हिसाब लंबित
विभाग के अनुसार वर्ष 2024 से लगातार मौखिक, लिखित और ऑनलाइन माध्यम से डीसी विपत्र जमा करने के निर्देश दिए जाते रहे हैं. इसके बावजूद अधिकांश बीआरसी ने उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया है.
वित्तीय वर्ष 2023-24 में शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी सह दीक्षांत समारोह के लिए जिले के सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों को 3 करोड़ 39 लाख 14 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए थे. कार्यक्रम आयोजित होने के बावजूद 1 करोड़ 26 लाख 97 हजार 624 रुपये का डीसी विपत्र अब तक जिला कार्यालय को प्राप्त नहीं हुआ है.
इन बीआरसी पर सबसे अधिक राशि लंबित
सबसे अधिक लंबित राशि वाले बीआरसी में बेनीपुर (13.63 लाख रुपये), मनीगाछी (13.08 लाख रुपये), तारडीह (12.65 लाख रुपये), जाले (10.06 लाख रुपये) और बहादुरपुर (8.91 लाख रुपये) शामिल हैं.
इसके अलावा केवटी, हनुमाननगर, सिंहवाड़ा, बहेड़ी, बिरौल, कुशेश्वरस्थान, कुशेश्वरस्थान पूर्वी, किरतपुर, नगर, घनश्यामपुर, हायाघाट, गौड़ाबौराम, अलीनगर तथा ग्रामीण बीआरसी से भी उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित है.
राज्य परियोजना निदेशक लगातार मांग रहे हिसाब
बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक लगातार उपयोगिता प्रमाण पत्र की मांग कर रहे हैं, लेकिन बीआरसी स्तर से डीसी विपत्र नहीं मिलने के कारण जिला कार्यालय इसे उपलब्ध नहीं करा पा रहा है.
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