Darbhanga News: भाजपा विधायक मिश्रीलाल यादव को दो वर्ष सश्रम कारावास की सजा

Updated at : 27 May 2025 11:10 PM (IST)
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Darbhanga News: भाजपा विधायक मिश्रीलाल यादव को दो वर्ष सश्रम कारावास की सजा

Darbhanga News:अदालत ने कहा है कि दोषियों द्वारा पहले से काटी गई अवधि को समायोजित किया जाएगा.

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Darbhanga News: दरभंगा. अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक मिश्रीलाल यादव एवं गोसाईं टोल पचाढ़ी निवासी सुरेश कुमार यादव को मंगलवार को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय सह एमपी/एमएलए से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने भादवि की धारा 506 में दो वर्ष सश्रम कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है. अर्थदंड की राशि नहीं देने पर एक माह अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी. अदालत ने कहा है कि दोषियों द्वारा पहले से काटी गई अवधि को समायोजित किया जाएगा.

कानून के कठोर हाथ से अछूते रह जाते, तो समाज में फैल जाएगी अराजकता:

इससे पूर्व अदालत ने मंगलवार को सजा के बिंदु पर बचाव पक्ष और अभियोजन की बहस सुनी. बचाव पक्ष की ओर से मुदालह को परिवीक्षा अधिनियम (प्रोबेशन ऑफ आफेंडर एक्ट) की धारा 03 का लाभ देने की मांग की गयी, जिसे अदालत ने अस्वीकृत कर दिया. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आम लोग किसी भी लोकतांत्रिक देश या समाज की संपति हैं. उनके द्वारा चुने जाने वाले प्रतिनिधि को संयम के असाधारण मानक का पालन करने की आवश्यकता होती है. यदि जनप्रतिनिधि और उसके बाहुबली आम लोगों पर हमला करना और उन्हें धमकाना शुरू कर देते हैं और कानून के कठोर हाथ से अछूते रह जाते हैं, तो इससे समाज में अराजकता फैल जाएगी. इसलिए अपराधियों की परिवीक्षा अधिनियम का उपयोग उन्हें कम से कम पहले अपराध के लिए छूट देने के लिए प्रीमियम के रूप में नहीं किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में आम लोगों का विश्वास यह सोचकर खत्म हो सकता है कि बड़े लोग किसी भी तरह से बच सकते हैं.

श्री दिवाकर की अदालत ने कहा कि दोषी बहुत प्रभावशाली स्थिति में हैं. दोषी मिश्रीलाल यादव एक विधायक हैं, उन्हें अपने कृत्य के बारे में पूरी जानकारी थी कि इसका क्या परिणाम होगा. अभिलेख से ऐसा प्रतीत होता है कि जांच एजेंसी ने जांच के दौरान उसे पहले ही रियायत दे दी है, जो आमतौर पर अन्य मामलों में नहीं किया जाता है. सूचक के सिर पर चोट होने के बावजूद आरोप पत्र मामूली धाराओं में दायर किया गया था. आदेश में श्री दिवाकर ने कहा है कि मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों, आरोप की प्रकृति और दोषियों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उच्चतर सजा देने का प्रस्ताव करता है.

सूचक को मिलेगा मुआवजा

श्री दिवाकर की अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि विद्वान ट्रायल कोर्ट ने मुआवजे के मुद्दे पर विचार नहीं किया है. संबंधित विद्वान न्यायालय से अनुरोध है कि वे इस निर्णय की एक प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव को निर्धारित प्रावधान के अनुसार मुआवजा देने के लिए भेजें. सूचक उमेश मिश्रा (सूचनाकर्ता/घायल) को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 02 (डब्ल्यू) के तहत पीड़ित घोषित किया जाता है.

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कारागार से न्यायालय लाये गये थे विधायक

मंगलवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विधायक मिश्रीलाल यादव और सुरेश यादव को मंडल कारा से न्यायालय में उपस्थित कराया गयी. अदालत द्वारा दोषी पाए गए मिश्रीलाल यादव व सुरेश यादव के सजा की बिंदु पर सुनवाई के पश्चात अदालत ने अपना निर्णय सुनाया.

समाप्त हो सकती है मिश्रीलाल यादव की विधायकी

दरभंगा. अलीनगर के भाजपा विधायक मिश्री लाल यादव की विधानसभा की सदस्यता समाप्त हो सकती है, यदि उन्हें उच्च न्यायालय से सजा पर स्थगन आदेश नहीं मिला. आपराधिक मामले के अधिवक्ता कृष्ण कुमार मिश्र एवं अरुण कुमार चौधरी ने बताया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 (3) में स्पष्ट प्रावधान है कि जिस विधायक (या सांसद) को किसी आपराधिक मामले में दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, उसकी सदन (विधानसभा या संसद) की सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है. यदि किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए दो वर्ष या उससे अधिक की कारावास की सजा होती है, तो वह सजा की तिथि से अयोग्य माना जाएगा और उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है. यह अयोग्यता सजा की तारीख से प्रभावी होती है. यदि आरोपी उच्च न्यायालय से सजा पर स्थगन आदेश ले लेता है, तो सदस्यता बनी रह सकती है. बताया कि उच्चतम न्यायालय ने अपने एक ऐतिहासिक न्याय निर्णय लिली थॉमस बनाम भारत संघ 2013 में यह स्पष्ट किया है कि धारा 8 (4) (जो सांसदों/विधायकों को अपील लंबित होने तक अयोग्यता से बचाती थी) असंवैधानिक है. अर्थात अब कोई भी जन प्रतिनिधि दो साल या अधिक की सजा पाने पर तुरंत अयोग्य हो जाता है. इसको लेकर लोगों के बीच अलग-अलग चर्चा है.

पहले सुनायी गयी थी तीन माह कारावास की सजा

दरभंगा. इसके पहले विगत 21 फरवरी 2025 को दरभंगा व्यवहार न्यायालय के एमपी एमएलए मामले की सुनवाई के लिए गठित विशेष न्यायाधीश सह अवर न्यायाधीश करुणा निधि प्रसाद आर्य की अदालत ने एक आपराधिक मामले में अलीनगर विधान सभा क्षेत्र के भाजपा विधायक मिश्रीलाल यादव एवं गोसाईं टोल पचाढी निवासी सुरेश कुमार यादव को भादवि की धारा 323 में दोषी पाते हुए तीन माह कारावास और पांच सौ रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी. इसके बाद दोनों दोषियों को बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया था. अदालत ने रैयाम थाना कांड संख्या 04/2019 से बने विचारण वाद सं. 884/2023 का विचारण पूरा कर दोनों अभियुक्तों को सजा सुनाई थी. दोनो आरोपियों के विरुद्ध इसी थाना क्षेत्र के समैला गांव निवासी उमेश मिश्र ने 29 जनवरी 2019 की आपराधिक घटना को लेकर 30 जनवरी को थाना में प्राथमिकी संख्या 4/2019 दर्ज करायी थी. दर्ज प्राथमिकी में सूचक ने आरोप लगाया था कि वह 29 जनवरी 2019 की सुबह 06 बजे घर से मॉर्निंग वॉक के लिए निकला था. जब वह रैयाम थाना क्षेत्र के गोसाई टोला पहुंचा तब पूरब दिशा से आ रहे मिश्रीलाल यादव, सुरेश यादव एवं अन्य 20- 25 लोग हथियार से लैश होकर कदम चौक के निकट उसे घेर कर गाली गलौज करने लगा. जब उसने विरोध किया तो मिश्रीलाल यादव ने सूचक के सिर के बीच में जान मारने की नीयत से फरसा से मारा, जिससे सूचक का सिर कट गया और खून बहने लगा. इसी बीच सुरेश यादव सूचक को लाठी से मारने लगा और जेब से 2300 रुपया निकाल लिया. सूचक का इलाज केवटी प्राथमिकी स्वास्थ्य केंद्र में चला. फिर उसे इलाज के लिए डीएमसीएच भेज दिया गया, जहां उसका इलाज चला. सूचक के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई. कांड के अनुसंधानक ने 12 अक्तूबर 2019 को मामले में आरोप पत्र समर्पित किया. अदालत ने 17 अप्रैल 2020 को मामले में संज्ञान लिया. अभियोजन की ओर से मामले में आठ लोगों की गवाही कराई गई. श्री आर्या की अदालत ने विधायक मिश्रीलाल यादव और सुरेश यादव को सजा सुनाई थी.

विधायक एवं वादी ने सजा के खिलाफ की थी अलग-अलग अपील

विधायक मिश्री लाल यादव और सुरेश यादव की ओर से निचली अदालत में सुनाई गई सजा के खिलाफ क्रिमिनल अपील सं.- 3/2025 दाखिल किया गया. वहीं सूचक उमेश मिश्र ने क्रिमिनल अपील 6/2025 संस्थित कराकर अदालत से याचना की कि निचली अदालत में आपराधिक धमकी देने से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने के बावजूद दोषियों को भादवि की धारा 506 में दोषी नहीं पाया गया है. वहीं 323 भादवि में भी साक्ष्य रहने के बावजूद कम सजा दी गई है. पीड़ित ने सजा को बढ़ाये जाने की गुहार लगायी. मामले में अभियोजन पक्ष का संचालन कर रहे एपीपी रेणू झा ने बताया कि जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय सह एमपी/एमएलए से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने सर्वप्रथम मिश्री लाल यादव और सुरेश यादव के अपीलवाद सं. 3/2025 पर सुनवाई पूरी कर निम्न अदालत द्वारा पारित निर्णय को सम्पुष्ट करते हुए निचली अदालत द्वारा विधायक और सुरेश यादव को दी गई तीन माह की सजा को बरकरार रखते हुए दोनों को मंडलकारा, दरभंगा भेज दिया था. जबकि सूचक उमेश मिश्र द्वारा दायर कराए गए क्रिमिनल अपील 6/2025 को आंशिक रूप से स्वीकृत किया तथा भादवि की धारा 506 में दोनों को दोषी करार देते हुए सजा की बिंदु पर सुनवाई के लिए 27 मई की तिथि निर्धारित की थी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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