Darbhanga News: हाथी पर सवार होकर आयेंगी भगवती, नरवाहन पर करेंगी प्रस्थान

Published by : PRABHAT KUMAR Updated At : 09 Sep 2025 10:45 PM

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Darbhanga News:शारदीय नवरात्र में भगवती दुर्गा के आगमन एवं प्रस्थान करने वाले वाहन से आने वाले साल के फलाफल का संकेत मिलता है.

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Darbhanga News: दरभंगा. शारदीय नवरात्र में भगवती दुर्गा के आगमन एवं प्रस्थान करने वाले वाहन से आने वाले साल के फलाफल का संकेत मिलता है. इस बार शुभ फल मिलने के संकेत हैं. शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं. वहीं नरवाहन पर आरूढ़ होकर वे प्रस्थान करेंगी. ज्योतिषाचार्य पंडित विश्वनाथ शास्त्री बताते हैं कि यह आने वाले वर्ष में अच्छे फल मिलने के संकेत हैं. अगले वर्ष अधिक वर्षा होगी, जिससे कृषि कार्य बेहतर होगा. जलसंकट भी कम होगा. नरवाहन की सवारी करते हुए उनका प्रस्थान भी शुभप्रद ही है. उल्लेखनीय है कि शक्ति उपासना के लिए चर्चित मिथिला में शारदीय नवरात्र धूमधाम से मनाया जाता है. शहर के पांच दर्जन से अधिक स्थलों पर प्रतिमा स्थापित कर जहां भगवती की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है, वहीं ग्रामीण इलाकों में सैंकड़ो स्थान पर पूजन होता है. देवी मंदिरों में विशेष अनुष्ठान तो होता ही है. इसके अतिरिक्त प्राय: प्रत्येक श्रद्धालु परिवार में पूरे नवरात्र में कलश स्थापित कर माता की आराधना की जाती है. इसकी तैयारी एक पखवाड़ा पूर्व से ही दिखने लगी है. पूजा पंडालों के लिए बांस-बल्ले जहां गाड़े जा रहे हैं, वहीं मूर्तिकार प्रतिमा निर्माण में जुटे हैं. दूसरे प्रदेशों से पंडाल निर्माण के लिए कारीगरों को बुला लिया गया है. बता दें कि पंडाल के माध्यम से अपने आयोजन स्थल को सबसे अलग और आकर्षक दिखाने की कोशिश तमाम पूजा समितियों की रहती है. कहीं ऐतिहासिक स्थल या भवन का प्रतिरूप बनाया जाता है तो कहीं सम-सामयिक घटना पर आधारित पंडाल दिखता है. इस बार भी कुछ ऐसा ही प्रबंध चल रहा है.

29 सितंबर को खुलेगा माता का पट

इस वर्ष नवरात्र 11 दिनों का है. आमतौर पर नौ दिन पूजन एवं दसवें दिन विजयादशमी मनायी जाती है, लेकिन तिथि विस्तार के कारण इस वर्ष दस दिन पूजा के पश्चात 11वें दिन विसर्जन होगा. 22 सितंबर को कलश स्थापन के साथ नवरात्र आरंभ हो रहा है. 23 सितंबर को रेमंत पूजा और 28 सितंबर को बिल्वाभिमंत्रण यानी बेलन्योति होगी. अगले दिन 29 सितंबर को बेलतोड़ी व पत्रिका प्रवेश पूजन के साथ माता का पट भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिया जायेगा. इसी दिन रात में निशा पूजा होगी. हालांकि महाअष्टमी का व्रत अगले दिन 30 सितंबर को होगा. एक अक्तूबर को महानवमी व्रत के साथ त्रिशुलिनी पूजा की जायेगी. दो अक्तूबर को अपराजिता पूजन एवं देवी का विसर्जन किया जायेगा. इस दिन नीलकंठ का दर्शन शुभप्रद कहा गया है.

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