Darbhanga News: वर्तमान में हिंदी की दशा भले उतनी अच्छी नहीं, पर दिशा बहुत सशक्त

Published by : PRABHAT KUMAR Updated At : 13 Sep 2025 10:09 PM

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Darbhanga News:वर्तमान युग में हिंदी की दशा भले ही उतनी अच्छी नहीं दिखती हो, लेकिन इसकी दिशा बहुत ही सशक्त है.

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Darbhanga News: दरभंगा. वर्तमान युग में हिंदी की दशा भले ही उतनी अच्छी नहीं दिखती हो, लेकिन इसकी दिशा बहुत ही सशक्त है. आज जहां हिंदी का अपना वैश्विक बाजार है, वहीं विश्व स्तर पर हिंदी की सृजनशीलता का बोलबाला है. यह बातें लनामिवि के पीजी हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ प्रभाकर पाठक ने शनिवार को हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर सीएम साइंस कॉलेज में आयोजित व्याख्यान में कही. ””””””””हिंदी : घर और बाहर”””””””” विषय पर आयोजित व्याख्यान में उन्होंने कहा कि हिंदी अगर किसी से हारी है, तो वह अपनों से हारी है. वह अपने घर में हारी है. वरना, हिंदी साहित्य का क्षितिज इतना विशाल है, कि इसे हराना उतना आसान नहीं है. बताया कि किस प्रकार 1857 के बाद भारतेंदु ने सर्वप्रथम खड़ी बोली के रूप में हिंदी का सूत्रपात किया. सृजनशीलता को स्थापित किया. हिंदी का धीरे-धीरे विकास हुआ. हिंदी को कमतर कर नहीं आंका जा सकता है. हिंदी की विडंबना है यहां अंग्रेजी पर अधिक ध्यान दिया जाता है. जबकि वास्तविकता यही है कि हिंदी, अंग्रेजी से किसी रूप में कम नहीं है.अंग्रेजी में यदि किसी ने शेक्सपियर को पढ़कर सब कुछ पढ़ लिया, तो हिंदी में तुलसीदास हैं. दोनों ने 16वीं सदी में सृजनशीलता से लोकप्रियता हासिल की. कहा कि हिंदी को महान बनाने में विवेकानंद का अहम योगदान है.

हिंदी हमारी आत्मा ही नहीं, हमारी अस्मिता- प्रो. संजीव

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य प्रो. संजीव कुमार मिश्र ने कहा कि हिंदी हमारी आत्मा ही नहीं, हमारी अस्मिता है. यह मिथक है कि विज्ञान के छात्र, साहित्य के प्रेमी नहीं होते. इस दिशा में नेहरू से लेकर चेतन भगत तक का उदाहरण हमारे सामने मौजूद है. कहा कि हिंदी में अभी भी उतना ही काम हो रहा है, जितना कि अंग्रेजी में. आज हिंदी इंटरनेट और सोशल मीडिया में प्रयुक्त होने वाली विश्व की दूसरी भाषा है. भारत ही नहीं विश्व के 133 देशों में हिंदी का न सिर्फ सशक्त प्रयोग हो रहा, बल्कि 70 देशों के 150 विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में हिंदी भाषा शामिल है. डॉ सत्येंद्र कुमार झा एवं डॉ ऋचा कुमारी के संचालन में आयोजित व्याख्यान में धन्यवाद ज्ञापन डॉ युगेश्वर साह ने किया. अतिथियों का स्वागत आयोजन डॉ दिनेश प्रसाद साह ने किया. मौके पर शुक्रवार को आयोजित भाषण प्रतियोगिता में अव्वल आए प्रतिभागियों के बीच प्रमाण पत्र एवं मेडल का वितरण किया गया.

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