बर्दाश्त की परीक्षा ले रहा शीतलहर

बर्दाश्त की परीक्षा ले रहा शीतलहर \\\\टं३३ी१त्र/रपछिया हवा ने बढ़ायी कनकनीशीघ्र निजात की उम्मीद नहीं फोटो संख्या- 40परिचय- ठंड से कांप रहा वृद्ध दरभंगा. आठ वर्ष 2016 के पूर्वार्द्ध में लोग भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से आतंकित रहे तो अब उत्तरार्द्ध में शीतलहर झेलने की विवशता. पूर्व के वर्षों में दिसंबर के अंतिम सप्ताह से […]
बर्दाश्त की परीक्षा ले रहा शीतलहर \\\\टं३३ी१त्र/रपछिया हवा ने बढ़ायी कनकनीशीघ्र निजात की उम्मीद नहीं फोटो संख्या- 40परिचय- ठंड से कांप रहा वृद्ध दरभंगा. आठ वर्ष 2016 के पूर्वार्द्ध में लोग भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से आतंकित रहे तो अब उत्तरार्द्ध में शीतलहर झेलने की विवशता. पूर्व के वर्षों में दिसंबर के अंतिम सप्ताह से कुहासा अधिक होने पर शीतलहर शुरू होती थी. लेकिन इस बार तो दिसंबर के पहले सप्ताह से ही कुहासा झेल रहे थे, अब पिछले एक सप्ताह से पछिया हवा की कनकनी उसमें और वृद्धि कर दी है. स्कूली छात्र-छात्राएं सर्वाधिक प्रभावित सुबह 8 बजे से पहले तक कुहासा का जो व्यापक प्रकोप रहता है, उसमें 20-25 फीट से अधिक दूरी की चीज दिखाई नहीं देती. ऐसी स्थिति में सुबह 8 बजे से संचालित होने वाले निजी स्कूलों तक छात्र कैसे पहुंचते होंगे, यह स्वत: अनुमान किया जा सकता है. पीछे बस्तों का झोला कंपकंपी से हाथ स्वेटर के नीचे दबाये थरथराते पैर इस तरह बढ़ते रहते हैं मानो कहीं लड़खड़ाकर गिर न जाये. सुबह साढ़े सात बजे से ऐसे बच्चों की कतार अधिकांश मुहल्लों में देखी जा सकती है. शहर के प्राय: अधिकांश स्कूलों में सर्द से निजात को क्लास रूम तक कोई व्यवस्था नहीं है. ऐसी स्थिति में स्कूल परिसर में शिक्षक के भय से थरथराते छात्र भी वहां बैठने को विवश रहते हैं. प्रशासन की नजर में अबतक ठंड नहीं पिछले एक सप्ताह में न्यूनतम तापमान 6.02 डिग्री तक चला गया. मौसम वैज्ञानिक के अनुसार अगले 23 दिसंबर तक न्यूनतम तापमान 5 से 8 डिग्री तक रह सकता है, इसके बावजूद जिला प्रशासन अबतक शीतलहर का प्रकोप नहीं मान रहा. अन्य वर्षों में शीतलहर शुरू होते ही जिला प्रशासन एवं नगर निगम प्रशासन की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की जाती थी, जिसके कारण फुटपाथ पर दुकानदारी करनेवाले एवं रिक्सा-ठेला चालक भी उस अलाव के नीचे कुछ देर बैठ अपने शरीर को ताजा करने का प्रयास करते थे. लेकिन प्रशासन ने शीतलहर से बचाव के लिए अबतक ऐसी कोई व्यवस्था के आदेश नहीं दिये हैं. ऐसी स्थिति में लोग जैसे-तैसे इस शीतलहर को झेलने को विवश हैं.
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