एसी व कूलर बेदम, नहीं मिल रहा सुकून, 41 पहुंचा तापमान
Author Prabhat khabar digital desk
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दरभंगा : तेजाबी धूप व लू के थपेड़ों ने दो दिनों की राहत के बाद फिर से झुलसाना शुरु कर दिया है. मौसम की इस नाराजगी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है. कहीं भी चैन नहीं मिल रहा. सूर्यदेव के रौद्ररूप में कमी नहीं आ रही है. घर से बाहर कदम रखते ही […]
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दरभंगा : तेजाबी धूप व लू के थपेड़ों ने दो दिनों की राहत के बाद फिर से झुलसाना शुरु कर दिया है. मौसम की इस नाराजगी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है. कहीं भी चैन नहीं मिल रहा. सूर्यदेव के रौद्ररूप में कमी नहीं आ रही है. घर से बाहर कदम रखते ही जहां बदन झुलसता महसूस होता है, वहीं घर के भीतर उमस भरी गर्मी से सुकून नहीं मिल रहा. पंखा की तो मानो कोई अहमियत ही नहीं रह गयी है. एसी व कूलर भी हांफने लगे हैं. इस विकराल मौसम में एक-एक दिन भारी पड़ रहा है. अभी जून ही चल रहा है. लोग आनेवाले महीनों के बारे में सोंचकर अभी से परेशान हैं. वर्षा के दूर-दूर तक आसार भी नजर नहीं आ रहे.
जिस तरह आसमान में बादल छाने के बावजूद वर्षा नहीं हो रही, इससे लोग निराश हो चले हैं. अपने ईष से रहम की गुहार लगा रहे हैं. जिला के लोग प्रकृति की दोहरी मार झेल रहे हैं. एक तरफ पिछले दो महीनों से भीषण जल संकट से पानी की एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. नगर निगम के टैंकर व पड़ोसियों से पानी का जुगाड़ कर वक्त काट रहे लोगों के हरे जख्मी पर यह भीषण गर्मी नमक छिड़क रही है. पिछले 22 जून को अपेक्षाकृत हुई अच्छी बारिश से लोगों में मौसम बदलने तथा जलसंकट दूर होने की आस जगी, लेकिन दो दिनों के बाद ही मौसम फिर से यू-टर्न लेते हुए पुराने तेवर में लौट आया है.
बच्चों की खुशियां लील गया प्रतिकूल मौसम : इस विकराल मौसम से यूं तो आम से लेकर खास सभी परेशान हैं, लेकिन सबसे अधिक मायूस बच्चे हो रहे हैं. शिद्दत से गर्मी की छुट्टी का इंतजार कर रहे बच्चों के अरमान चकनाचूर हो गये. न तो कहीं घूमने ही जा सके और न ही घर पर ही मस्ती का मौका मिल सका. इस भीषण गर्मी व लू के थपेड़ों ने बच्चों की खुशियां छीन ली. उनकी सुरक्षा के लिए घर से बाहर निकलने पर पाबंदी है. इस बीच उनकी पूरी गर्मी छुट्टी बीत गयी.
समाप्त हो रहीं छुट्टियां, खुल गये कोचिंग संस्थान : जानलेवा बने मौसम को देखते हुए डीएम के आदेश पर सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी. कोचिंग संस्थानों को भी बंद कर दिया. गत 22 जून तक के लिए सुबह 10 बजे से शाम तक मजदूरों से काम लिये जाने को भी प्रतिबंधित कर दिया गया. आदेश की समय सीमा समाप्त होते ही मजबूरन रोटी के लिए मजदूरों ने काम शुरु कर दिया. इधर अधिकांश कोचिंग संस्थाना चालू कर दिये गये हैं. स्कूलों की भी छुट्टी समाप्त हो रही है. अगर मौसम का मिजाज ऐसा ही रहा तो यह बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
पूरी रात में ठंडा नहीं हुआ बिस्तर
सोमवार की रात सबसे अधिक गर्म व उमस भरी रही. आलम यह था कि पंखा चलने के बाद भी बिस्तर ठंडा नहीं हुआ. ऐसा महसूस हो रहा था मानो किसी ने बिस्तर पर आयरन कर दिया हो. आमतौर पर आधी रात के बाद वातावरण ठंडा हो जाता है, लेकिन बीती रात ऐसा नहीं हुआ. बिस्तर पर लेटते ही बदन जलता से अनुभव होता रहा. आंखों ही आंखों में लोगों की पूरी रात गुजर गयी. बड़ी संख्या में लोग राहत की उम्मीद में सड़क पर टहलते नजर आये, हालांकि सुकून नहीं मिला.
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