प्रतिवर्ष " सवा करोड़ खर्च, पर साफ-सफाई की स्थिति बदतर

Updated at : 01 Sep 2018 1:53 AM (IST)
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प्रतिवर्ष " सवा करोड़ खर्च, पर साफ-सफाई की स्थिति बदतर

दरभंगा : डीएमसीएच उत्तर बिहार का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान है, लेकिन परिसर में चारों तरफ पसरे बायो मेडिकल वेस्टेज, कीचड़ व गंदी नालियों के बीच यह फंस कर रह गया है. अस्पताल में स्वच्छता की बात करनी भी बेमानी है. सफाई मामले में अस्पताल प्रशासन पूरी तरह फिसड्डी साबित हो रहा है. जहां-तहां फैले […]

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दरभंगा : डीएमसीएच उत्तर बिहार का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान है, लेकिन परिसर में चारों तरफ पसरे बायो मेडिकल वेस्टेज, कीचड़ व गंदी नालियों के बीच यह फंस कर रह गया है. अस्पताल में स्वच्छता की बात करनी भी बेमानी है. सफाई मामले में अस्पताल प्रशासन पूरी तरह फिसड्डी साबित हो रहा है. जहां-तहां फैले मेडिकल वेस्टेज से प्रदूषण फैल रहा है. स्थिति ऐसी है कि यहां आने पर स्वस्थ व्यक्ति भी बीमार पड़ जाये. मरीज व परिजन वार्ड में घुसते ही सड़ांध के कारण रूमाल से नाक ढक लेते हैं. चारो तरफ गंदी नालियों के पानी में मुंह मारते सूअर अस्पताल प्रशासन की स्वच्छता के प्रति संजीदगी की पोल खोल देता है. उचित साफ-सफाई के बिना ही संबंधित एजेंसियां यहां से मोटी कमाई कर रही है.

प्रति बेड छह रुपये बायो मेडिकल वेस्टेज के लिए भुगतान: बायो मेडिकल वेस्टेज के लिए मेडिकेयर कंपनी को प्रति बेड की दर से छह रुपये भुगतान किए जाते है. अस्पताल में 1030 बेड है. इस हिसाब से मासिक करीब दो लाख रुपए कम्पनी को भुगतान किया जाता है. बावजूद परिसर में चारों तरफ बायो मेडिकल वेस्टेज बिखरे पड़े हैं. अस्पताल के विभिन्न वार्डों, परिसर एवं नालियों की सफाई की जिम्मेदारी आउटसोर्सिंग कंपनी सेवा शक्ति आश्रम को है. इसके करीब 104 मजदूर हैं. एजेंसी द्वारा सफाई कार्य का भरसक पूरा प्रयास किया जाता है पर उतना नहीं जितनी उम्मीद है. इस पर वार्षिक 85 लाख रुपये खर्च होते हैं. वार्डों में कुछ सफाई तो नज़र आती है, लेकिन बाहरी परिसर एवं नालों की स्थिति बदतर है. डंपिंग प्लेस से कचरा उठाने का काम नगर निगम के जिम्मे है, लेकिन विभाग के द्वारा कचरा के उठाव में लापरवाही बरती जाती है.
तीन संस्थाओं पर सफाई की जिम्मेदारी
सरकार का डीएमसीएच की सफाई पर करीब एक करोड़ का वार्षिक खर्च है. अस्पताल में सफाई के लिए नगर निगम, मेडिकेयर व आउटसोर्सिंग एजेंसी जवाबदेह है. इन तीनों में से कोई भी अपना काम पूरी जिम्मेदारी से नहीं कर रहा है. इस कारण स्वच्छता के मामले में अस्पताल की यह दुर्दशा है.
बायो मेडिकल वेस्टेज के िनराकरण के लिए कुछ कर्मियों को ट्रेनिंग के लिए भेजा जायेगा. नगर निगम को भी परिसर के नाले एवं कचरा साफ करने के लिए पत्राचार किया जाता है, लेकिन सफाई के मामले में लापरवाही बरती जा रही है. अस्पताल परिसर में स्वच्छता का ध्यान रखा जाएगा.
डॉ आरआर प्रसाद, अधीक्षक
मेडिकल वेस्टेज के निवारण में लापरवाही उजागर: बिहार स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल की दो सदस्यीय टीम ने पिछले महीने की 18 तारीख को डीएमसीएच परिसर का मुआयना किया था. परिसर में चारों तरफ फैले बायो मेडिकल वेस्टेज को देख सदस्यों ने गहरी नाराजगी जाहिर की थी. पॉल्यूशन कंट्रोल के मानक के अनुसार अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल कचरा के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं की है. निरीक्षण के इस दौरान वार्ड में कहीं भी रंगीन बकेट नहीं पाये गये. बायो मेडिकल वेस्टेज वैसे ही बिखरा हुआ पाया गया.
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