शहर से दूर हुआ निजी बस स्टैंड, स्टेट ट्रांसपोर्ट की चांदी

Published at :07 Mar 2018 3:57 AM (IST)
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शहर से दूर हुआ निजी बस स्टैंड, स्टेट ट्रांसपोर्ट की चांदी

दरभंगा : कादिराबाद स्थित बस पड़ाव का स्थानांतरण दिल्ली मोड़ हो जाने से स्टेट ट्रांसपोर्ट की चांदी हो गयी है. शहर से बस पड़ाव के दूर चले जाने से बढ़ी समस्या के कारण शहरवासी सरकारी बसों की सेवा अधिक लेने लगे हैं. लिहाजा यात्रियों की संख्या बढ़ गयी है. इसका सीधा लाभ राज्य पथ परिवहन […]

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दरभंगा : कादिराबाद स्थित बस पड़ाव का स्थानांतरण दिल्ली मोड़ हो जाने से स्टेट ट्रांसपोर्ट की चांदी हो गयी है. शहर से बस पड़ाव के दूर चले जाने से बढ़ी समस्या के कारण शहरवासी सरकारी बसों की सेवा अधिक लेने लगे हैं. लिहाजा यात्रियों की संख्या बढ़ गयी है. इसका सीधा लाभ राज्य पथ परिवहन को मिल रहा है. मालूम हो कि 16 जनवरी को दिल्ली मोड़ स्थित नये बस पड़ाव के उद्घाटन के साथ ही कादिराबाद से निजी बसों का परिचालन बंद कर दिया गया. इससे लोगों की परेशानी बढ़ गयी.

दूरी अधिक होने के कारण एक तरफ जहां यात्रियों को अधिक वक्त लगता है, वहीं अतिरिक्त किराया भी देना पड़ता है. ऐसे में लोगों का रुझान सरकारी बस पड़ाव की ओर बढ़ गया. यही वजह है कि सरकारी बस पड़ाव से सफर करनेवाले यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ है. बता दें कि पहले करीब एक हजार से 12 सौ यात्री सरकारी बस से सफर करते थे. इन दिनों यह बढ़कर करीब 17 सौ हो गया है. स्वभाविक रूप से डीपो की आय में भी वृद्धि हो गयी है.

बस मेें सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं
सरकारी बस पड़ाव से चलने वाली बस में सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है. बस चालक व संवाहक बसों को रूट पर ले जाने से कतराते हैं. उनका कहना है कि रास्ते में निजी बस कर्मी मनमानी करते हैं. उनके साथ मारपीट तक करते हैं. इसी कारण वे लोग हमेशा डरे हुए रहते हैं. निजी बस कर्मियों के साथ विवाद होने के बाद मामला संबंधित थाना पर ले जाने के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती. रोजाना गंतव्य स्थान पर एवं रास्ते में पैसेंजरों को चढ़ाने को लेकर उन लोगों से नोक-झोंक हो जाती है. प्रशासनिक स्तर से सुरक्षा प्रदान नहीं किया जाता.
डीपो की आय में वृद्धि
सार्वजनिक बस पड़ाव का दिल्ली मोड़ चले से यात्रियों का रुझान सरकारी बस पड़ाव पर बढ़ा है. इससे सरकारी डीपो की आय में वृद्धि हुई है. यहां से निगम एवं जे नर्म पीपी मोड की बस चलती हैं. निगम के अंतर्गत सात बस एवं जे नर्म के अंतर्गत 35 बस चलती हैं. निगम से संचालित बस से करीब 50 हजार रुपये की आय बढ़ी है. पहले रोजाना औसतन 40 हजार रुपये की आय हो रही थी. वहीं जे नर्म से रोजाना एक लाख की आमदनी होती थी. यह बढ़ कर करीब डेढ़ लाख पहुंच गया है.
इन रूटों पर चलेंगी बसें
कादिराबाद स्थित बस पड़ाव से 42 बस विभिन्न रूट पर निकलती हैं. दरभंगा बस पड़ाव से पटना, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, कुशेश्वरस्थान, बेनीपुर, लौकहा, रसियारी भागलपुर, सहरसा आदि जगहों के लिये रोजाना सरकारी बसें रवाना होती हैं. यहां से मुजफ्फरपुर के लिए आधा घंटा पर बस निकलती हैं. सुबह छह बजे पहली बस एवं अंतिम बस शाम 6.30 बजे यहां से मुजफ्फरपुर के लिए खुलती हैं. पटना के लिये दो बस यहां से नित्य चलती हैं. वहीं कुशेश्वरस्थान के लिये अहले सुबह पांच बजे से बसों का परिचालन आरंभ हो जाता है. इस रूट पर भी प्रत्येक आधा घंटा पर यात्रियों को बस मिलती है.
किराये में कोई इजाफा नहीं
निजी बसों की अपेक्षा सरकारी बसों का किराया कम है. पिछले दिनों प्राइवेट बसों के किराये में इजाफा हुआ, लेकिन सरकारी बस के भाड़ा में कोई वृद्धि नहीं हुई है. इसका लाभ भी यात्रियों को मिल रहा है. दरभंगा से पटना का किराया 98 रुपये है. वहीं डिलक्स बस का किराया 112 रुपये हैं. इसी तरह मुजफ्फरपुर का 46 रुपये, कुशेश्वरस्थान का 50 रुपये, बेनीपुर का 20 रुपये, भागलपुर का 148 रुपये, लौकहा का 59 रुपये, रसियारी का 41 रुपये, समस्तीपुर का 32 रुपये भाड़ा निर्धारित है.
12 बसों को नहीं मिला परमिट
पिछले वर्ष 12 बसों को परमिट नहीं मिल सका. बसें डीपो में महीनों तक खड़ी रही. अंत में विभाग ने उन बसों को वापस ले लिया. परमिट मिल जाने के बाद उन बसों को भी यात्रियों की मांग पर संबंधित रूटों में चलाया जाता. इससे डीपो के राजस्व में और वृद्धि होती. यात्रियों को भी इसका लाभ मिलता.
कुशेश्वरस्थान व मुजफ्फरपुर
के यात्रियों की संख्या बढ़ी
सबसे ज्यादा मुजफ्फरपुर एवं कुश्वेश्वरस्थान की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. इसके लिये कोई नया बस विभाग द्वारा नहीं दिया गया है. पुराने बस के रूट को विस्तार कर मुजफ्फरपुर भेजा जा रहा है. इसमें कुशेश्वरस्थान जाने वाली दो बसों एवं लौकहा जाने वाली एक बस को शामिल किया गया है.
सरकारी बस पड़ाव से परिचालित होने वाली बस को कोई सुरक्षा नहीं मिल पाती है. सुरक्षा को लेकर ही समस्तीपुर जाने वाली बस का परिचालन रोक दिया गया है. यात्रियों के विभिन्न रूटों में मांग के बावजूद सुरक्षा एवं अन्य समस्याओं के कारण उन रूट में बस का परिचालन नहीं हो पाता है. इससे विभाग को राजस्व की हानि हो रही है.
– रामाधार पासवान, डीपो अधीक्षक
सुरक्षा नहीं मिलने से बंद हो गया समस्तीपुर रूट पर परिचालन
स्टेट ट्रांसपोर्ट कर्मियों को प्रशासन की ओर से अपेक्षित सहायोग नहीं मिलता. आये दिन निजी बसकर्मी तथा उनसे जुड़े लोग सवारी चढ़ाने तथा आगे बढ़ने को लेकर सरकारी बस के कर्मियों के संग मारपीट करते हैं. प्रशासन सूचना के बावजूद सुरक्षा के प्रबंध नहीं करता. यही वजह है कि जाले रूट पर बसों का परिचालन बंद है, जबकि इस मार्ग पर सरकारी बसों की मांग काफी अधिक है. वहीं हाल ही में इसी तरह की घटना के कारण समस्तीपुर रूट पर परिचालन बंद कर दिया गया है.
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