हाथ में स्लाइन और फर्श पर होता इलाज
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Feb 2018 5:22 AM (IST)
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बदहाली. डीएमसीएच में मरीजों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हाथ में स्लाइन लटका कर रखते हैं मरीजों के परिजन इमरजेंसी का हाल बदतर रोज पहुंचते हैं 150 से अधिक मरीज हाथ में स्लाइन लटका कर रखते हैं मरीजों के परिजन इमरजेंसी का हाल बदतर रोज पहुंचते हैं 150 से अधिक मरीज दरभंगा : […]
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बदहाली. डीएमसीएच में मरीजों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं
हाथ में स्लाइन लटका कर रखते हैं मरीजों
के परिजन
इमरजेंसी का हाल बदतर
रोज पहुंचते हैं 150
से अधिक मरीज
हाथ में स्लाइन लटका कर रखते हैं मरीजों
के परिजन
इमरजेंसी का हाल बदतर
रोज पहुंचते हैं 150
से अधिक मरीज
दरभंगा : उत्तर बिहार का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान डीएमसीएच पर नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली कहावत पूरी तरह चरितार्थ हो रही है. मरीजों को बेड तक मयस्सर नहीं मिल पाता. फर्श पर लेट कर उपचार करना पड़ता है. इतना ही नहीं संसाधन के अभाव में रोगी के परिजनों को स्लाइन की बोतल हाथ में लटका कर रखनी पड़ती है. एक वार्ड से दूसरे वार्ड ले जाने-लाने के लिए ट्रॉली को खुद धक्का देकर ले जाना तो यहां की कार्य संस्कृति में शामिल सा है. कई बार तो मरीज को परिजन गोद में उठाकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाते नजर आते हैं.
यहां की लचर चिकित्सा व्यवस्था के कारण मरीजों एवं परिजनों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ती है.
यहां बुनियादी सुविधा भी नहीं मिल पाती. विभिन्न विभागों के अंतर्गत इंमरजेंसी में रोजाना करीब डेढ़ सौ मरीज यहां बेहतर उपचार की आस लेकर पहुंचते हैं, लेकिन उस अनुपात में यहां सुविधा मिल नहीं पाती. उपचार के लिये यहां पहुंचनेवाले अधिकांश रोगियों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रहती. यानी गरीब तबके के लोग ही यहां इलाज के लिये आते हैं, जिन्हें समुचित सुविधा अस्पताल प्रशासन उपलब्ध नहीं करा पा रहा है.
बुनियादी चिकित्सकीय उपकरणों की कमी
इमरजेंसी में कार्यरत कर्मी एवं चिकित्सकों को बुनियादी उपकरणों की कमी के कारण मरीजों को इलाज करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है. उपचार के लिये बुनियादी मशीन भी उपलब्ध नहीं है. एक्स-रे मशीन पिछले वर्ष से ही खराब पड़ा है. इसके लिये उनको सर्जरी भवन के एक्स-रे कक्ष जाना पड़ता है. वहां पहले से ही मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है. मजबूरन लोग बाहर जाकर प्राइवेट में एक्स-रे करवाते हैं. वहीं मात्र दो ब्लड प्रेशर मशीन एवं एक इसीजी मशीन होने के कारण जांच करने में कठिनाई होती है. विभाग का दोनों संक्शन मशीन खराब होने के कारण बलगम व कफ से पीड़ित मरीजों का इलाज करने में चिकित्सकों को समस्या का सामना करना पड़ता है.
सर्जरी के लिए लाइट का भी प्रबंध नहीं
ओटी लाइट खराब होने के कारण मरीजों की सर्जरी करने में भी दिक्कत होती है. कमरे की सामान्य रोशनी में ही चिकित्सक उनका ऑपरेशन करते हैं. मरीजों के बेड पर चादर भी नहीं बिछायी जाती. महिला एवं पुरुष बेड के बीच डिवाइडर पर्दे नहीं रहने के कारण मरीजों को खुले में ही ऑपरेशन करना पड़ता है. इससे परेशानी हो जाती है.
150 मरीजों के लिए दो कमरों में मात्र 11 बेड
इमरजेंसी में रोजाना डेढ़ सौ से ज्यादा मरीज इलाज के लिये पहुंचते हैं. चिकित्सा कार्य मात्र दो कमरे में ही सिमट कर रह गया है. उस कमरे में मात्र 11 बेड लगे हैं. बता दें कि आपात स्थिति में रोजाना मरीज यहां इलाज कराने पहुंचते हैं. कभी-कभी आपात स्थिति के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ जाती है. जगह कम होने के कारण चिकित्सक व कर्मी को इलाज के दौरान समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं. मरीजों की संख्या अधिक होने की स्थिति में वहां खड़ा रहने तक की जगह भी नहीं रहती. इलाज के लिये उनको बाहर में रखे तीन बेडों पर लेटाकर इलाज किया जाता है. उससे अधिक संख्या मरीजों के पहुंचने पर उनको फर्श पर लेटाकर इलाज किया जाता है.
मरीजों की संख्या बढ़ते ही मच जाती अफरातफरी
आपातकालीन विभाग में लगातार चौबीस घंटे मरीजों का आना लगा रहता है. अचानक अधिक संख्या में मरीजों के आने के बाद यहां अफरा-तफरी का माहौल हो जाता है. वहां मेले जैसी भीड़ हो जाती है. सुरक्षा गार्डों को स्थिति संभालने में पसीने बहाने पड़ते हैं. चिकित्सकों का कहना है कि इलाज के लिये वैसे ही जगह बहुत कम है. इससे परेशानी होती है, लेकिन जब मरीजों की भीड़ ज्यादा होती चिकित्सा को छोड़कर स्थिति संभालने में ही कई घंटे लग जाते हैं. इससे चिकित्सा कार्य भी बाधित होता है. इससे मरीजों के परिजन से नोक-झोंक भी हो जाती है.
मरीजों को उपलब्ध सुविधा का लाभ दिया जाता है. सुविधाओं के विस्तार के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है. विभाग का आदेश आते ही आगे की कार्रवाई की जायेगी. मरीजों को तमाम सुविधाएं देने के प्रयास किये जायेंगे.
डॉ संतोष कुमार मिश्र, अधीक्षक डीएमसीएच
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