13 वार्ड वाले सझुआर पंचायत के 11 वार्डों में नल-जल से जलापूर्ति नहीं, पानी के लिए भटक रहे लोग

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 10 Jun 2024 11:02 PM

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सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना नल-जल प्रखंड के सझुआर पंचायत में हवा-हवाई साबित हो गई है.

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बेनीपुर. सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना नल-जल प्रखंड के सझुआर पंचायत में हवा-हवाई साबित हो गई है. पंचायत के सभी 13 वार्डों में लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर सरकारी राशि को पानी के लिए पानी की तरह भले ही बहा दिया गया, लेकिन इक्का-दुक्का वार्ड को छोड़ सभी वार्डों में यह योजना लोगों का मुंह चिढ़ा रही है. किसी वार्ड में नल-जल का वाटर टैंक हवा में उड़ गया तो अधिकांश वार्ड की भूमिगत पाइप जमीन में गुम हो गयी है. लोग पानी के लिए तरस रहे हैं. सझुआर, अचलपुर, विक्कूपट्टी, नरहा व लक्ष्मणपुर गांव मिला कर 13 वार्डों की पंचायत सझुआर के 12 वार्डों में वार्ड समिति द्वारा तो एक वार्ड में सरकारी एजेंसी पीएचइडी की ओर से यह योजना धरातल पर उतारी गयी, लेकिन आज भी पंचायत के लोगों काे शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा है. कई लोगों ने कर्ज लेकर खुद अपना चापाकल गड़ा लिया है. उसी के सहारे इस उमस भड़ी गर्मी में पानी का उपयोग कर रहे हैं. लोगों का कहना कि भूगर्भीय जलस्तर के नीचे खिसक जाने से चापाकल कम पानी देने लगा है. नल-जल से जलापूर्ति नहीं हो रही है. वार्ड छह के नरहा गांव में नल लगा, लेकिन चालू होने से पहले ही बेकाम हो गया. यहां तो आज तक यह योजना पूरी भी नहीं हो सकी है. स्थानीय लोगों ने कहा कि एक-दो दिन पानी मिला, उसके बाद उसकी टंकी ही हवा के झोंके में उड़ गयी. वहीं वार्ड सात के लोगों का कहना है कि नल-जल लगा घर-घर नलका लगा दिया गया, लेकिन आज तक एक बूंद पानी नहीं मिला. वही वार्ड 11 में पीएचइडी द्वारा लगाया गया नल जल सरकारी मुलाजिमों की उदासीनता की भेंट चढ़कर रह गयी है. लोगों को अभी तक एक बूंद पानी नहीं मिला है. इस संबंध में मुखिया चंदन कुमार झा ने कहा कि पंचायत के सिर्फ दो वार्ड 12 एवं 13 का नल जल चल रहा है. इससे लोगों को नियमित पानी मिल रहा है. बांकी सभी 11 वार्डों का नल जल किसी न किसी दोष के कारण ठप पड़ा है. जब यह योजना पंचायत के अधीन थी तो कई वार्डों के अपने स्तर से मरम्मत करा चालू कराया था, लेकिन अब तो यह पीएचइडी के अधीन हो गयी है. उसे हस्तगत कराए जाने के बाद से आज तक पीएचइडी के एक भी अभियंता इसे देखने तक नहीं आए. इसको लेकर कई बार पीएचइडी को पत्र भी लिखा है.

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