खुले बाजार से लोगों ने खरीदा सात हजार रुपये प्रति सीएफटी बालू

Published at :02 Dec 2017 6:46 AM (IST)
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खुले बाजार से लोगों ने खरीदा सात हजार रुपये प्रति सीएफटी बालू

दरभंगा : नई व्यवस्था के तहत शुक्रवार से ऑन लाइन बालू- गिट्टी की खरीद प्रारंभ हो गयी. वैसे पहले दिन निगम का वेबसाईट नहीं खुलने की लोग शिकायत करते रहे. कई लोगों ने बुकिंग भी करायी. लाइसेंसधारी कारोबारियों के कार्यालय में काम नहीं हुआ. लाइसेंसधारियों की शिकायत थी कि कालाबाजारी पर जब तक रोक नहीं […]

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दरभंगा : नई व्यवस्था के तहत शुक्रवार से ऑन लाइन बालू- गिट्टी की खरीद प्रारंभ हो गयी. वैसे पहले दिन निगम का वेबसाईट नहीं खुलने की लोग शिकायत करते रहे. कई लोगों ने बुकिंग भी करायी. लाइसेंसधारी कारोबारियों के कार्यालय में काम नहीं हुआ. लाइसेंसधारियों की शिकायत थी कि कालाबाजारी पर जब तक रोक नहीं लगेगी, व्यापार कर पाना संभव नहीं है.

खुले में बालू की खूब बिक्री हुई. लाइसेंसधारियों का कहना है कि 29 नवंबर को पटना में प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया था. वहां कुछ विशेष जानकारी नहीं देकर बताया गया कि जिला स्तर पर प्रशिक्षित किया जाएगा. ऐसे में कब प्रशिक्षित होंगे और कब व्यापार शुरु करेंगे यह निबंधित व्यापारी नहीं जान रहे. पहली दिसंबर को अवैध रुप से बालू गिट्टी मंडियों में गैर लाइसेंसधारी व्यापारियों ने खुलकर व्यापार किया. खुले बाजार में 7000 से लेकर आठ हजार प्रति सीएफटी बालू बेचा गया.
इस पर रोक के लिए खनन विभाग ने अबतक टास्क फोर्स का गठन नहीं किया गया है. खरीदार पुराने व्यापारियों से ही माल खरीद रहे हैं. क्रेताओं का कहना है कि सरकार ने प्रति सीएफटी जो कीमत तय की है, उससे सस्ते दर पर बालू अवैध कारोबारियों द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है. जबकि सरकार का दावा मूल्य में 70 प्रतिशत तक कमी का है.
उधर, गैर लाइसेंसी कारोबारियों का कहना है कि इसे कालाबाजारी नहीं खुले बाजार में बालू का व्यापार कहना ज्यादा बेहतर होगा.
एक दिसंबर से विभाग को बेचना था बालू-गिट्टी : एक दिसंबर से बालू एवं पत्थर बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड के माध्यम से किया जाना था. बालू एवं पत्थर की आवश्यकता होने पर लोग विभाग की वेबसाइट पर जाकर आवश्यकता अनुसार आर्डर दर्ज करायेंगे. खुदरा खरीद के लिए लाइसेंसधारी व्यवसायियों से से संपर्क करने को कहा गया है. जिस पते पर बालू-पत्थर की डिलीवरी चाहिए, उसके पिन कोड की जानकारी अवश्य होनी चाहिए.
इससे खदान से ग्राहक के घर तक की दूरी का पता चल सकेगा. घरेलू आवश्यकता के लिए आधार कार्ड होना अनिवार्य है. वहीं व्यवसाय के लिए पैन कार्ड अनिवार्य किया गया है. कीमत का भुगतान डिलीवरी के बाद करना है. डिलीवरी में अनियमितता पाए जाने पर विभाग से शिकायत करने का प्रावधान है.
इस व्यापार से जुड़ने के लिए अधिसूचित निबंधन को उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को रद्द कर दिया है. सरकार ने वेबसाइट के माध्यम से ग्राहकों को बालू उपलब्ध कराने का जो दावा किया था, वह फेल हो चुका है. इससे सस्ते दर पर पुराने व्यापारी बालू-गिट्टी बेच रहे हैं. पहली दिसंबर को खनन विभाग का वेबसाईट खोलने का क्रेता एवं बिक्रेता ने प्रयास किया पर अधिकांश को सफलता नहीं मिली. इस वजह से मंडियों में अच्छी खासी भीड़ रही.
शैलेंद्र कुमार सिंह, अध्यक्ष, प्रगतिशील बालू गिट्टी व्यावसायिक संघ
ऑनलाइन बुकिंग नहीं होने के कारण सैदनगर मंडी से बालू की खरीद की है. बालू पहले से सस्ता मिला है. कई दिनों से मकान का निर्माण कार्य अधूरा था. अब इसे पूरा कर सकूंगा.
विजय झा, खराजपुर
वेबसाइट के माध्यम से बालू खरीद करना महंगा साबित हुआ. नौ हजार प्रति सीएफटी की दर से 44772 रुपया में पांच सौ सीएफटी बालू की खरीद की. जबकि खुले बाजार में 7500 रुपये की दर से पांच सौ सीएफटी बालू 37 हजार पांच सौ रुपए में पड़ोसी त्रिवेणी कांत मंडी से खरीद कर ले गया है. कहा जा रहा था कि नयी व्यवस्था से कीमत घटेगी पर यह तो बढ़ ही गयी.
प्रवीण कुमार झा, लक्ष्मीसागर निवासी, ऑनलाइन बालू खरीदार
कहते हैं लोग, अभी हो रही परेशानी
विभाग का वेबसाइट नहीं खुला. इस वजह से कारोबार प्रभावित रहा. खनन विभाग जाकर पता करना चाहा पर न कर्मी मिला न ही पदाधिकारी. अब कहां जानकारी लूं समझ नहीं आ रहा.
प्रेम प्रकाश सिंह, लाइसेंसधारी, शिवनगर घाट
पटना में प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया था, परंतु व्यापार से संबंधित थोड़ी जानकारी देकर विदा कर दिया गया. बताया गया कि जिला में प्रशिक्षण दिया जाएगा. पता नहीं कब प्रशिक्षण होगा.श्यामनंदन झा, सिंहवाड़ा
आज से ऑनलाइन बिक्री होनी थी, परंतु विभाग की वेबसाइट नहीं खुल रही है. न ही विभाग ने अबतक बिक्री के लिए लाइसेंस ही निर्गत किया है.
संदीप कुमार, सदर
चयन सूची में नाम तो दर्ज कर लिया गया, परंतु व्यवसाय किस प्रकार होगा, अब तक जानकारी नहीं दी गई है. सरकार जब तक कालाबाजारी पर रोक नहीं लगाएगी, लाइसेंस बेअसर रहेगा.
चंदू कुमार सिंह, कुशेश्वरस्थान
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