नहाय-खाय के साथ सूर्योपासना शुरू

Published at :25 Oct 2017 6:00 AM (IST)
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नहाय-खाय के साथ सूर्योपासना शुरू

छठ महापर्व. सुबह से तालाब व नदियों में स्नान को लगा रहा व्रतियों का तांता, खरना आज दरभंगा : सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ मंगलवार को नहाय-खाय के साथ आरंभ हो गया. व्रतियों ने परंपरा के अनुसार इस अवसर पर पवित्र जल से स्नान कर पूजा-अर्चना के पश्चात अरबा अन्न से तैयार भोजन किया. […]

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छठ महापर्व. सुबह से तालाब व नदियों में स्नान को लगा रहा व्रतियों का तांता, खरना आज

दरभंगा : सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ मंगलवार को नहाय-खाय के साथ आरंभ हो गया. व्रतियों ने परंपरा के अनुसार इस अवसर पर पवित्र जल से स्नान कर पूजा-अर्चना के पश्चात अरबा अन्न से तैयार भोजन किया. बुधवार से इस महापर्व का व्रत शुरू हो जायेगा.
बुधवार को खरना के पश्चात गुरुवार की शाम पहला अर्घ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्पित किया जायेगा. शुक्रवार को प्रात:कालीन अर्घ दान के साथ यह महापर्व संपन्न हो जायेगा. इसे लेकर मंगलवार से व्रतियों के घर में उत्सवी माहौल बन गया है. नहाय-खाय पर पवित्र जलाशय में स्नान के लिए सुबह से ही विभिन्न नदी घाट व तालाबों में व्रतियों की भीड़ जमा रही. सुबह में व्रतियों ने अपने नाखून काटे. इसके बाद पास के पोखरों में स्नान किया. विभिन्न पोखरों में नहाते हुए व्रतियों ने अपने से उम्र में छोटी व्रती को सिंदूर लगाया. मंगलवार की सुबह नदियों के घाटों पर छठ पर्व का पहला दृश्य नजर आया. मौके पर व्रती के साथ उनके परिजन भी मौजूद थे.
नदियों में डुबकी लगाने के संग ही व्रतियों ने सूर्य नमस्कार करते हुए छठ पर्व की शुरुआत की. व्रतियों ने चार दिन तक चलने वाले इस पर्व को सफलता पूर्वक संपन्न करने के लिए छठी मइया से खुद के लिए भी आशीष मांगा. नदियों के घाट पर स्नान करते हुए व्रतियों ने बताया कि पहले की अपेक्षा नदी में स्नान के लिए कम ही लोग अब आते हैं. अधिकांश पावन करने वाले अपने घर पर ही स्नान कर लेते है. बता दें कि इस पावन पर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ शुरू हो जाती है.
व्रतियों को चार दिन तक इस अवधि में ब्रह्मचर्य नियम का पालन करना होता है. नियम का पालन करते हुए जमीन पर ही सोना होता है. इधर स्नान के बाद व्रतियों ने मूंग की दाल, अरबा चावल का भात, कद्दू की सब्ज़ी, गोट का साग, तरुआ आदि भोजन में ग्रहण किया. भोजन मिट्टी के नये चूल्हे पर बनया. इसे भोजन के रूप में ग्रहण किया.
भोजन में हल्दी का प्रयोग नहीं किया गया. वहीं सेंधा नमक ही डाला गया.
उल्लेखनीय है कि बुधवार की शाम व्रती खरना करेंगी. खरना के दिन सायंकाल प्रसाद के रूप में खीर एवं रोटी बनायी जायेगी. प्रसाद को केले के पत्ते पर सजा जायेगा. छठी मइया की व्रती पूजा करेंगी. जितने अर्घ अर्पण करने होंगे, उतने ही जगह प्रसाद लगाया जायेगा. वहां दीये जलाये जायेंगे. धूप व अगरबत्ती जलायी जायेगी. प्रसाद पर तुलसी दल डाला जायेगा. इसके बाद वहीं लगे आसन पर बैठकर व्रती खरना करेंगी. इस दौरान शोर मचाने पर प्रतिबंध परंपरा के अनुसार रहेगा. प्रसाद ग्रहण करने के बाद दुबारा अन्न ग्रहण नहीं करेंगी. इसके बाद से व्रत आरंभ हो जायेगा.
जलकुंभी को हटाने
में शिथिलता पर रोष
नगर के घाटों की सफाई व गिरायी जा रही मिट्टी आदि का मुआयना नगर आयुक्त नागेंद्र कुमार सिंह ने करते हुए कर्मियों को कई दिशा-निर्देश भी दिया. वहीं आरएस टैंक तालाब से निकाली गयी जलकुंभी को हटाने में शिथिलता को देखते हुए नगर आयुक्त ने नाराजगी जतायी. वे पूरी सफाई होने तक खुद तालाब पर मुस्तैद रहे.
घाटों की सफाई पर
रखी जा रही नजर
घाटों की साफ-सफाई का काम लगभग पूरा हो गया है. सुरक्षा को लेकर बैरिकेडिंग आदि किये जाने का काम किया जा रहा है. छठ पर्व को लेकर घाटों को दुरुस्त करने का काम अंतिम चरण में है. साफ-सफाई के बाद घाटों पर फिर गंदगी न फैले इसे लेकर कर्मी बुधवार को भी घाटों पर नजर बनाये रखेंगे.
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