Bihar: TMBU भागलपुर के कुलपति आवास पहुंची CID की टीम, नयी गाड़ी बताकर खरीदी गयी सेकेंड हैंड गाड़ी जब्त

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में नयी गाड़ी के नाम पर खरीदी गयी सेकेंड हैंड गाड़ी का मामला फिर से तूल पकड़ चुका है. सीआइडी की टीम TMBU भागलपुर के कुलपति आवास पहुंची और विवादित गाड़ी को जब्त किया.
Bihar News: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में पूर्व में नयी गाड़ी के नाम पर सेकेंड हैंड गाड़ी की खरीद की गयी थी, उसे बुधवार को सीआइडी की टीम ने जब्त कर लिया. कुलपति आवास पर पहुंची टीम करीब डेढ़ घंटे तक कागजी प्रक्रिया पूरी की. गाड़ी से संबंधित तमाम दस्तावेजों को देखा. गाड़ी का इंजन व चेसिस नंबर नोट किया.
सीआइडी की टीम ने गाड़ी के उपयोग किये जाने की स्थिति देखी. चक्के की भी जांच की. सीआइडी टीम में डीएसपी कृष्ण कुमार सिंह , विवि थानाध्यक्ष राजीव कुमार सिंह समेत चार लोग शामिल थे. बताया जा रहा है कि अपराध अनुसंधान विभाग के एडीजी ने जिला सीआइडी को पत्र लिख कर गाड़ी जब्त करने सहित चार बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है.
विवि में खरीद की गयी गाड़ी की अब एफएसएल टीम भी जांच करेगी. सूत्रों के अनुसार टीम देखेगी कि गाड़ी कितना किलोमीटर तक चली है. गाड़ी का परिचालन बंद होने के बाद से चलाया गया है या नहीं. इसे लेकर मुख्यालय से एफएलएल टीम को पत्र लिखा गया है. बताया जा रहा है कि एफएसएल टीम भी गाड़ी की जांच करने कभी भी कुलपति आवास पहुंच सकती है.
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विवि के एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2016 में गाड़ी की खरीदारी हुई थी. इसी साल के सितंबर में पहली फ्री सर्विसिंग के दौरान यह पाया गया कि वाहन सेकंड हैंड था. यह भी पाया गया कि वाहन को पहले चंद्र प्रकाश को मार्च 2015 में बेचा गया था. एक पुराने वाहन को नया बता कर टीएमबीयू को बेचा गया था.
विवि में वर्ष 2016 में पूर्व कुलपति प्रो रमा शंकर दुबे व पूर्व प्रोवीसी प्रो एके राय थे. गाड़ी खरीद को लेकर विवि के पूर्व अधिकारी समेत कई लोगों का नाम सामने आया था. इनमें पूर्व रजिस्ट्रार आशुतोष प्रसाद, टीएमबीयू के वित्त अधिकारी (एफओ) बीरेंद्र कुमार, पूर्व एफए एनुलहक, लेखाकार डीके मिश्र और विश्वविद्यालय के इंजीनियर अंजनी कुमार वाहन खरीद मामले के नाम सामने आया था. मामले को लेकर अजीत कुमार सोनू व अन्य के नेतृत्व में छात्र आंदोलन हुआ था.
मामला ज्यादा बढ़ने पर विवि प्रशासन ने पूर्व अधिकारी सहित कई लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. इसके बाद पुलिस प्रशासन द्वारा मामले की जांच की गयी थी. पुलिस प्रशासन की तरफ से आठ लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था. इसमें उक्त लोगों का नाम शामिल था.
पुलिस ने उनलोगों से बारी-बारी से पूछताछ की थी. उस समय एसएसपी मनोज कुमार ने जांच में प्रथम दृष्टया माना था कि गाड़ी की खरीद में धोखाधड़ी की गयी है. हालांकि विवि के पूर्व अधिकारी से लेकर अन्य लोगों ने लगाये गये आरोप को खारिज कर दिया था. उनलोगों का कहना था कि गाड़ी सेकेंड हैंड खरीदारी नहीं की गयी है.
गाड़ी खरीद मामले की कोई जानकारी नहीं है. योगदान दिये हुए कुछ माह ही हुआ है. सीआइडी की टीम आयी थी. गाड़ी जब्त कर चली गयी.
प्रो जवाहर लाल, कुलपति, टीएमबीयू
Posted By: Thakur Shaktilochan
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