एक साथ उठी चाचा भतीजे की अर्थी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Sep 2016 4:41 AM (IST)
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विलाप करते परिजन, ग्रामीण व मृत पूर्व सरपंच सुदामा महतो के पुत्र को संभालते ग्रामीण़. शेखा बाबा ब्रह्म स्थान के समीप एक सूखे विशाल पेड़ ने तीन सुहागिनों का सुहाग उजाड़ दिया. हरदिया गांव में एक साथ चाचा-भतीजे की अर्थी उठी, तो बरवत में पति की मौत के बाद पत्नी का हाल बेहाल है. कोई […]
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विलाप करते परिजन, ग्रामीण व मृत पूर्व सरपंच सुदामा महतो के पुत्र को संभालते ग्रामीण़.
शेखा बाबा ब्रह्म स्थान के समीप एक सूखे विशाल पेड़ ने तीन सुहागिनों का सुहाग उजाड़ दिया. हरदिया गांव में एक साथ चाचा-भतीजे की अर्थी उठी, तो बरवत में पति की मौत के बाद पत्नी का हाल बेहाल है. कोई नियति की मार कह रहा है,तो कोई पीडब्लूडी की लापरवाही. बहरहाल तीन की मौत से हरदिया व बरवत में चीत्कार मचा हुआ है.
बेतिया : शहर से सटे मुफस्सिल थाने के बरवत व हरिदया गांव में मंगलवार को चीत्कार मचा हुआ था. पूरा गांव आंसुओं में डूबा हुआ था. कारण कि कभी छांव देने वाले पेड़ ने एक साथ तीन सुहागिनियों का सुहाग उजाड़ दिया था. एक साथ अगल-बगल के गांवों से तीन लोगों की मौत होने से चारों तरफ मातमी सन्नाटा छाया हुआ था. हरदिया में एक साथ चाचा उदित महतो व भतीजे पूर्व सरपंच सुदामा महतो की अर्थी निकली. वहीं बरवत सेना से श्रीराम साह की शव यात्रा. इसे देखकर ग्रामीणों के आंखों में आंसू थे. वहीं मृतकों के परिजनों की हालत काफी नाजुक थी.
मृतक उदित महतो की पत्नी बासमती देवी, पूर्व सरपंच सुदामा महतो की पत्नी इंदू देवी व श्रीराम साह की पत्नी श्रीमती देवी का रो-रोकर बुरा हाल था. पिता के सर से पिता का साया उठ जाने से बच्चों का हाल बेहाल था.
नेक दिल व इंसाफ पसंद इंसान थे सुदामा: पंचायत राजनीत में करीब 15 सालों तक दबदबा बनाये रखने वाले बरवत सेना पंचायत के पूर्व सरपंच पूर्व सुदामा महतो नेक दिल व इंसाफ पसंद इंसान थे. ग्रामीण से लेकर आमलोग भी पूर्व सरपंच उनकी सहृदयता की चर्चा करते नहीं थक रहे थे. उनका कहना था कि पूर्व सरपंच ने अपने कार्यकाल में अधिकांश मामलों को सुलझाया. वे हर सुख-दुख में आगे बढ़कर लोगों का मदद करते रहते थे.
घटना स्थल पर शवों को देखने के लिए उमड़ी ग्रामीणों की भीड़़
सुनी आंखों में था बेटा व पौत्र को खोने का गम
हरदिया गांव से जब एक साथ पुत्र व पौत्र की अर्थी निकली,तो बूढ़े शोभित महतो के सुनी आंखों में आंसू के साथ-साथ गम देखा गया. शोभित जहां पौत्र पूर्व सरपंच सुदामा महतो से मिली राजनैतिक पहचान व परिवार की प्रतिष्ठा उच्चा उठाने की बात कहते,तो कभी पुत्र उदित के परिवारिक एकजुट के लिए त्याग की बात कह बिलाख रहे थे. शोभित कह रहे थे, कि यह उम्र उनकी जाने की थी, लेकिन नियति ने उनके पुत्र व पौत्र को छीन लिया. शोभित की बातों पर ग्रामीणों के भी आंखें भर गयी थी.
आंसुओं में डूबा गांव
बरवत में भी पति की मौत के बाद पत्नी का हाल हुआ बेहाल
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