जिले में सड़कों पर नहीं दिखती सरकारी बसें

Published at :25 May 2016 6:42 AM (IST)
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जिले में सड़कों पर नहीं दिखती सरकारी बसें

प्राइवेट बसों में भेड़ बकरियों की तरह यात्रा करने को मजबूर यात्री वसूला जाता मनमाना किराया, सुविधाएं रहती नदारद बेतिया : जिले की सड़कों पर एक भी सरकारी बस देखने को नही मिलेगी़ शाम ढलने के बाद लोगो को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अनेकों बार सोचना पड़ता है़ ट्रेन के अलावा कोई दूसरा […]

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प्राइवेट बसों में भेड़ बकरियों की तरह यात्रा करने को मजबूर यात्री

वसूला जाता मनमाना किराया, सुविधाएं रहती नदारद
बेतिया : जिले की सड़कों पर एक भी सरकारी बस देखने को नही मिलेगी़ शाम ढलने के बाद लोगो को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अनेकों बार सोचना पड़ता है़
ट्रेन के अलावा कोई दूसरा विकल्प लोगों के पास नही रहता़ ऐसे में जहां ट्रेन की सुविधा है वहां तो ठीक है लेकिन जिन रूटों के लिए ट्रेन नही है रात स्टेशन पर ही गुजारनी पड़ती है़ एक दशक पहले बेतिया, वाल्मीकिनगर और थारू बहुल इलाके हरनाटाड़ से सरकारी बसें चलती थी़ पर आज ऐसा कुछ भी नहीं है़
यात्रा करने वाले यात्री प्राइवेट बसों में महंगे दामों और भेड़ बकरियों की तरह यात्रा करने को मजबूर है़ं अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बेतिया से नरकटियागंज,बगहा, मोतिहारी, नौतन, रामनगर आदि क्षेत्रों में जाने के लिए यात्रियों को चालीस से सौ रुपये तक खर्च करने पड़ते है़ जबकि सरकारी बसें चलती तो न केवल किराया कम होता बल्कि जिले वासियों को सहुलियत के साथ सफर का आनंद मिलता़
ऐतिहासिक महत्व सुविधाएं नदारद :इस जिले का कोना कोना ऐतिहासिक महत्व से पटा पड़ा है़ वाल्मीकि ऋषि, महात्मा बुद्ध और महात्मा गांधी की थाती आज भी चम्पारण के गौरवशाली इतिहास का बोध कराती है़ लेकिन सरकारी स्तर पर बस चलाए जाने की पहल नही की जा सकी़ भितिहरवा आश्रम से पटना तक वाया नरकटियागंज बेतिया होते हुए बस चलाने की मांग वर्षो से की जाती रही है़ भितिहरवा गाव निवासी सुखदेव यादव, गांधीवादी चिंतक अनिरूद्ध चौरसिया बताते है कि सरकारी बस चलाए जाने की मांग हमेशा की गई़ लेकिन सरकार और विभाग ने किसी प्रकार की पहल नही की़
मनमाना वसूला जाता किराया: प्राइवेट बसों में यात्रा करना कितना जोखिम भरा होता है बेतिया से जिले के कोने कोने में जाने वाले बसों में यात्रा करने पर पता चल जाता है़ सीट नही रहने के बावजूद यात्रियों को जगह जगह बस के अंदर प्रवेश करा लिया जाता है़ भले ही अंदर पाव रखने की जगह नहीं हो़ यही नहीं डीजल का दाम कम होने के बावजूद यात्रियों से मनमाना किराया वसूला जाता है़
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